Tag: MITHILA JAN JAN KI AAWAJ
दरभंगा की वो माँ, जो सिर्फ़ सब्ज़ी लेने निकली थी मगर लौटते...
कभी लूट हथियारों के बल पर होती थी, अब लूट मानसिकता के धारदार किनारों से की जाती...
जब अपहरण हुआ और फिरौती मांगी गई, तब कोतवाली थाना बना मिशन...
6 जून की रात दरभंगा में दो मेहनतकश गैस पाइप श्रमिकों का अपहरण एक ऐसी घटना जिसने...
जब जेल की दीवारों से रिसा लहू और न्याय घुटता रहा ताले में...
यह कोई सामान्य अपराध कथा नहीं है। यह उस मानसिकता की बानगी है, जहाँ अधिकार, अहंकार...
एक सांसद का बेटा, एक गुमशुदा पहचान, और एक जिले की रात-दिन...
रविवार की वह सुबह सामान्य नहीं थी। दरभंगा की हवाओं में एक अजीब सी खामोशी थी। सियासत...
जब मधुबनी के भाजपा सांसद अशोक कुमार यादव के बेटे विभूति...
दरभंगा का बंगाली टोला उस शाम कुछ ज़्यादा ही चुप था। आम दिनों में जहां बच्चों की...
दरभंगा की ऐतिहासिक सुबह में माँ कांकली की चौखट पर नतमस्तक...
दरभंगा की सुबह में उस दिन कुछ अलग ही आभा थी। एक सादगीभरा, भावुक और आत्मीय क्षण जिसने...
दरभंगा की रात जब जगी बाघमोड़ से घनश्यामपुर थाने तक पसीना...
मिथिला की आत्मा को समेटे एक नगर जहाँ चाँदनी भी इतिहास के कपोलों पर उतरती है और जहाँ...
14 जून की वो घड़ी जब दरभंगा के बाघमोड़ बना दरभंगा पुलिस...
दरभंगा शहर की नब्ज़ को अगर किसी ने करीब से थामा है, तो वह है पुलिस की वो रात जो...
खंडहर की दीवारों से उठती थी साजिश की साँसें, चाबी और चुप्पी...
एक ऐसा शहर जो किसी ज़माने में मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहलाता था, आज अपने शहरी...
कागज़ों के कब्रिस्तान और कंप्यूटरों की जमी धूल पर चलती...
जब सिस्टम के भीतर सन्नाटा पसरा हो, अपराध के आंकड़े बेहिसाब बढ़ते जाएं और थाने की...
जिन्होंने नहीं सुनी वो ‘धाँय!’, वे पढ़ें यह रिपोर्ट ताकि...
भरवाड़ा की वह शाम सामान्य नहीं थी। हल्की हवा बह रही थी, बाजार में चूड़ी की खनखनाहट...
जब दरभंगा की सड़कों पर कानून की परिभाषा खुद चलती मिली:...
यह दरभंगा की वही रात थी वही चांद, वही सड़कें, वही बिजली के खंभों पर थरथराते बल्ब,...
मशाल जुलूस पर बरसी लाठियाँ, घायल कार्यकर्ता और मौन प्रशासन...
इतिहास की पगडंडियों से निकलती मिथिला की राजधानी दरभंगा आज फिर एक सवाल के घेरे में...
संजय सरावगी के संकल्प और नितिन नवीन की निगरानी में दरभंगा...
पटना की एक शांत सुबह। लेकिन उस सुबह की एक मीटिंग ने दरभंगा के निवासियों के जीवन...
हे राम! उस रात दरभंगा के कमतौल में क्या बीता उस अबला माँ...
पांच जून की वह शाम न केवल एक स्त्री की आत्मा के लिए अंत का आरंभ थी, बल्कि बिहार...
दरभंगा के टावर चौक पर दिनदहाड़े ₹3.81 लाख की लूट: सेंट्रल...
बिहार का एक ऐतिहासिक शहर, जो अपनी सांस्कृतिक विरासत और मिथिला की कला के लिए जाना...