कर्मठ संजय सरावगी की कलम से बिहार की नव-उषा: दरभंगा से मुंबई तक विकास की स्वर्णिम आभा

बिहार दिवस 2025 के पावन अवसर पर मुंबई की धरती पर बिहार के गौरव का परचम लहराया, जब राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ने अपनी ओजस्वी वाणी से उपस्थित जनमानस को मंत्रमुग्ध कर दिया. पढ़े पुरी खबर.......

कर्मठ संजय सरावगी की कलम से बिहार की नव-उषा: दरभंगा से मुंबई तक विकास की स्वर्णिम आभा
कर्मठ संजय सरावगी की कलम से बिहार की नव-उषा: दरभंगा से मुंबई तक विकास की स्वर्णिम आभा; फोटो: मिथिला जन जन की आवाज

मुंबई: बिहार दिवस 2025 के पावन अवसर पर मुंबई की धरती पर बिहार के गौरव का परचम लहराया, जब राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी ने अपनी ओजस्वी वाणी से उपस्थित जनमानस को मंत्रमुग्ध कर दिया। दरभंगा से पाँच बार विधायक निर्वाचित यह कर्मवीर, जिनकी ईमानदारी और परिश्रम की मिसाल बिहार की गलियों से लेकर महाराष्ट्र के महानगर तक गूँजती है, ने बिहार फाउंडेशन महाराष्ट्र चैप्टर के समारोह में बिहार की प्राचीन वैभवशाली विरासत और आधुनिक प्रगति का ऐसा चित्रण किया कि हर दिल में गर्व का संचार हो उठा।

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बिहार भवन: सेवा और संन्यास का स्वप्निल संगम: महाराष्ट्र प्रवास के दौरान श्री सरावगी ने मुंबई के डॉकयार्ड के समीप प्रस्तावित बिहार भवन के निर्माण स्थल का भ्रमण किया। 150 करोड़ रुपये की भव्य लागत से आकार ले रहा यह बहुमंजिला भवन बिहारवासियों के लिए एक आशा का दीप बनने को तैयार है। कैंसर पीड़ितों के लिए विशिष्ट सुविधाएँ और अन्य सेवाओं का यह आलय बिहार-महाराष्ट्र के अटूट रिश्तों का साक्षी बनेगा। बाउंड्री वॉल का कार्य तेजी से बढ़ रहा है, और यह परियोजना श्री सरावगी की संवेदनशीलता और दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण है।

मखाना बोर्ड: अन्नदाता के जीवन में समृद्धि का सूर्योदय: मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा करते हुए श्री सरावगी ने किसानों के भाग्य को चमकाने का संकल्प दोहराया। "मखाना अब बिहार की थाली से निकलकर विश्व पटल पर शान बनेगा," उनके शब्दों में यह जोश और जुनून झलका। दरभंगा के मखाना उत्पादकों के लिए यह पहल किसी स्वर्णिम क्रांति से कम नहीं। विशेष योजनाओं के साथ उनकी मेहनत किसानों की आय को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

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डिजिटल क्रांति: कागज के ढेर से तकनीक का ताज: अपने विभाग की उपलब्धियों का बखान करते हुए श्री सरावगी ने बताया कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब डिजिटल युग का सेनापति बन चुका है। दाखिल-खारिज, जमाबंदी, भू-अभिलेख, और ई-मैपिंग जैसे कार्य अब एक क्लिक की दूरी पर। राजस्व नक्शे की डोर-स्टेप डिलीवरी ने जनता के जीवन में अभूतपूर्व सुगमता ला दी। यह डिजिटल परिवर्तन उनके कुशल नेतृत्व का ऐसा आभूषण है, जो पारदर्शिता की चमक बिखेर रहा है।

मुंबई डॉकयार्ड के समीप प्रस्तावित बिहार भवन के निर्माण स्थल भ्रमण के दौरान मंत्री श्री सरावगी का स्वागत करते बिहार फाउंडेशन के अध्यक्ष कैसर खालिद (एडीजीपी, महाराष्ट्र) व अन्य!

कनेक्टिविटी और आस्था का संगम: बिहार को आकाश और धरती से जोड़ने की उनकी मुहिम रंग ला रही है। दरभंगा एयरपोर्ट की नई उड़ानें, गया-पटना का विस्तार, और पूर्णिया एयरपोर्ट का शुभारंभ उनकी मेहनत का फल है। साथ ही, सीतामढ़ी में 50 एकड़ पर माँ जानकी मंदिर का निर्माण आस्था और पर्यटन का अनुपम संगम है। अयोध्या की तर्ज पर यह मंदिर बिहार के आर्थिक स्वर्ण युग का द्वार खोलेगा।

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विकास का संगीत, रोजगार का राग: आँकड़ों की मधुर धुन में श्री सरावगी ने बिहार की प्रगति का सुर छेड़ा। विकास दर 14.50%, प्रति व्यक्ति आय 66,828 रुपये, और ग्रामीण सड़कें 1,12,505 किमी—यह सब उनकी कर्मठता का गीत है। "10 साल में बिहार रोजगार का स्वर्णिम केंद्र बनेगा," उनका यह वचन बिहार को आत्मनिर्भरता की राह पर ले जाने की उनकी अडिग प्रतिबद्धता है।

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संस्कृति की सुगंध, सम्मान की वर्षा: समारोह में बिहार की लोककला, नृत्य और व्यंजनों ने माटी की मधुर सुगंध बिखेरी। बिहार फाउंडेशन के अध्यक्ष कैसर खालिद सहित विशिष्ट जनों ने इस कर्मयोद्धा का अभिनंदन किया। प्रवासियों से बिहार की उन्नति में योगदान की उनकी पुकार हर हृदय को झंकृत कर गई।

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दरभंगा के इस शिरोमणि ने अपनी मेहनत, ईमानदारी और स्वप्नदृष्टि से बिहार को नव-उषा का आलोक प्रदान किया है। संजय सरावगी मात्र विधायक नहीं, बल्कि बिहार की आकांक्षाओं के सच्चे शिल्पकार हैं, जिनके कदमों से प्रगति की यह अमृत धारा प्रवाहित हो रही है।