Tag: DARBHANGA POLICE
हे लोकतंत्र! तू अब थाने में कैद है दरभंगा डीएमसीएच की सड़ी...
जब सत्ता के गलियारों में मंत्रियों के काफिले सरपट दौड़ते हैं, तब लोकतंत्र अक्सर किनारे...
हे ईश्वर! मृत्यु और जीवन का विधान तो तेरे ही हाथ था......
जब खून अपना रिश्ता भूल जाए, जब लालच रिश्तों से बड़ा हो जाए… तब बाप के साँस लेने...
दरभंगा पुलिस प्रशासन में वर्दियों का नवगठित संवाद... जब...
24 जून 2025 को दरभंगा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से एक प्रेस विज्ञप्ति ने जिले की पुलिस...
जब अनुसंधान बना मज़ाक, न्याय पड़ा मौन और बहेड़ा थानाध्यक्ष...
कभी अपराध का पर्याय रहा बहेड़ा इलाका आज फिर सुर्खियों में है। पर इस बार सुर्ख़ियों...
बड़ी वारदात: जब 15 डकैतों ने बेलही की रात को लहू में डुबो...
बिहार की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में बीती शनिवार की रात को घटी एक सनसनीखेज वारदात...
जब रामजानकी मंदिर बना शराब तस्करी के विरुद्ध रणभूमि, लहेरियासराय...
जहाँ मंदिरों की घंटियों से सुबह होती है और खेतों में हल चलाकर किसान सूरज को सलाम...
जब कानून की चौखट पर वकील ही कटघरे में खड़ा हुआ: दरभंगा...
दरभंगा की ऐतिहासिक न्यायभूमि ने बहुत से हाई-प्रोफाइल मुकदमों को देखा, सुना और सहा...
दरभंगा के जमालपुर थाने में जब फरियाद बना अपराध दिव्यांग...
दरभंगा के जमालपुर थाने से निकली एक घटना आज पूरे पुलिस महकमे के चेहरे पर सवाल खड़े...
लहेरियासराय की गलियों में घूमता था जो बेखौफ़... वही ललन...
वर्ष 2020। महामारी की उथल-पुथल के बीच एक खबर ने दरभंगा की शांत दीवारों को चीर डाला...
दरभंगा की वो माँ, जो सिर्फ़ सब्ज़ी लेने निकली थी मगर लौटते...
कभी लूट हथियारों के बल पर होती थी, अब लूट मानसिकता के धारदार किनारों से की जाती...
जब अपहरण हुआ और फिरौती मांगी गई, तब कोतवाली थाना बना मिशन...
6 जून की रात दरभंगा में दो मेहनतकश गैस पाइप श्रमिकों का अपहरण एक ऐसी घटना जिसने...
जब जेल की दीवारों से रिसा लहू और न्याय घुटता रहा ताले में...
यह कोई सामान्य अपराध कथा नहीं है। यह उस मानसिकता की बानगी है, जहाँ अधिकार, अहंकार...
एक सांसद का बेटा, एक गुमशुदा पहचान, और एक जिले की रात-दिन...
रविवार की वह सुबह सामान्य नहीं थी। दरभंगा की हवाओं में एक अजीब सी खामोशी थी। सियासत...
दरभंगा की रात जब जगी बाघमोड़ से घनश्यामपुर थाने तक पसीना...
मिथिला की आत्मा को समेटे एक नगर जहाँ चाँदनी भी इतिहास के कपोलों पर उतरती है और जहाँ...
14 जून की वो घड़ी जब दरभंगा के बाघमोड़ बना दरभंगा पुलिस...
दरभंगा शहर की नब्ज़ को अगर किसी ने करीब से थामा है, तो वह है पुलिस की वो रात जो...
खंडहर की दीवारों से उठती थी साजिश की साँसें, चाबी और चुप्पी...
एक ऐसा शहर जो किसी ज़माने में मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहलाता था, आज अपने शहरी...