मिथिला की माटी के ये सितारे अब सिंगापुर में रचेंगे संस्कृति का इंद्रधनुष! सृष्टि फाउंडेशन के गुरु जयप्रकाश पाठक के सानिध्य में सत्यम कुमार झा, सुबोध दास, ऋतु रानी, ऋषिका भारती, अंकिता झा, निशा कुमारी सिंह, विद्या अग्रवाल और श्रुति सिंह समेत कलाकारों की टोली ‘ऋतु चक्र’ में झिझिया, छठ, सामा-चकेवा, कजरी और होली की अनुपम लोकछटा से दुनिया को कराएगी मिथिला की अमर सांस्कृतिक विरासत का साक्षात्कार...पढ़िए कौन-कौन हैं ये सितारे, जिनकी कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाएगी दरभंगा और मिथिला का मान!

मिथिला की माटी में सदियों से संचित लोक-संस्कृति, पर्व-परंपराओं और लोकनृत्य की समृद्ध विरासत अब अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी विशिष्ट पहचान अंकित करने जा रही है। दरभंगा में स्थापित सृष्टि फाउंडेशन के कलाकार आगामी 23 अगस्त 2026 को सिंगापुर में आयोजित होने वाले BiJhar Cultural Confluence 2026 के अंतर्गत ‘ऋतु चक्र’ विषयक सांस्कृतिक आयोजन में मिथिला की बहुरंगी लोकपरंपराओं को नृत्य एवं नृत्य-नाट्य की सशक्त अभिव्यक्ति के माध्यम से वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे. पढ़े पूरी रिपोर्ट....

मिथिला की माटी के ये सितारे अब सिंगापुर में रचेंगे संस्कृति का इंद्रधनुष! सृष्टि फाउंडेशन के गुरु जयप्रकाश पाठक के सानिध्य में सत्यम कुमार झा, सुबोध दास, ऋतु रानी, ऋषिका भारती, अंकिता झा, निशा कुमारी सिंह, विद्या अग्रवाल और श्रुति सिंह समेत कलाकारों की टोली ‘ऋतु चक्र’ में झिझिया, छठ, सामा-चकेवा, कजरी और होली की अनुपम लोकछटा से दुनिया को कराएगी मिथिला की अमर सांस्कृतिक विरासत का साक्षात्कार...पढ़िए कौन-कौन हैं ये सितारे, जिनकी कला अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ाएगी दरभंगा और मिथिला का मान!
मिथिला के सितारे सिंगापुर में करेंगे सांस्कृतिक धमाल, ‘ऋतु चक्र’ में दिखेगी दरभंगा की लोककला: फोटो- मिथिला जन जन की आवाज

दरभंगा। मिथिला की माटी में सदियों से संचित लोक-संस्कृति, पर्व-परंपराओं और लोकनृत्य की समृद्ध विरासत अब अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी विशिष्ट पहचान अंकित करने जा रही है। दरभंगा में स्थापित सृष्टि फाउंडेशन के कलाकार आगामी 23 अगस्त 2026 को सिंगापुर में आयोजित होने वाले BiJhar Cultural Confluence 2026 के अंतर्गत ‘ऋतु चक्र’ विषयक सांस्कृतिक आयोजन में मिथिला की बहुरंगी लोकपरंपराओं को नृत्य एवं नृत्य-नाट्य की सशक्त अभिव्यक्ति के माध्यम से वैश्विक दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

यह अवसर केवल सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों के लिए विदेश में प्रस्तुति देने का अवसर नहीं, बल्कि मिथिला की उस सांस्कृतिक चेतना को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल है, जिसकी जड़ें लोकजीवन, ऋतुचक्र, पर्व-त्योहार और सामाजिक परंपराओं में गहराई तक पैठी हुई हैं। कार्यक्रम की परिकल्पना ऐसी सांस्कृतिक यात्रा के रूप में की गई है, जिसमें वर्ष के विभिन्न महीनों के साथ मिथिला और बिहार-झारखंड की लोकजीवन परंपराओं का अंतर्संबंध मंच पर जीवंत होगा। सृष्टि फाउंडेशन के वरिष्ठ कलाकार झिझिया, छठ, सामा-चकेवा, होली, कजरी सहित विभिन्न लोकपर्वों और उनसे संबद्ध लोकनृत्यों को एक समेकित प्रस्तुति में पिरोकर दर्शकों के सामने रखेंगे। सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक एवं ओडिसी नृत्य गुरु जयप्रकाश पाठक के अनुसार कार्यक्रम का प्रारंभ ओडिसी नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति से होगा। इसके पश्चात ‘ऋतु चक्र’ के माध्यम से मिथिला की सांस्कृतिक परंपराओं के उन विविध आयामों को मंच पर उकेरा जाएगा, जिनमें प्रकृति, लोकआस्था, पर्व, सामाजिक सरोकार और सामुदायिक जीवन की सहज अभिव्यक्ति दिखाई देती है।

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गुरु जयप्रकाश पाठक ने इसे सृष्टि फाउंडेशन के साथ-साथ संपूर्ण मिथिला के लिए गौरव का क्षण बताया है। उनके अनुसार देश की सीमाओं से बाहर पहली बार सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन का अवसर मिलना इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय धरती पर साधना करने वाली प्रतिभाएं भी वैश्विक सांस्कृतिक पटल पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ सकती हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुति के लिए मिथिला के नौ कलाकारों की टोली सिंगापुर जाएगी। गुरु जयप्रकाश पाठक के सानिध्य में सत्यम कुमार झा, सुबोध दास, ऋतु रानी, ऋषिका भारती, अंकिता झा, निशा कुमारी सिंह, विद्या अग्रवाल और श्रुति सिंह सहित कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। यह दल अपने साथ केवल नृत्य की प्रस्तुति नहीं, बल्कि मिथिला की लोकस्मृति, सांस्कृतिक अस्मिता और पीढ़ियों से हस्तांतरित परंपराओं की जीवंत कथा लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचेगा।

प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने के लिए संगीत, स्वर और संवाद के स्तर पर भी विशेष तैयारी की गई है। आकाशवाणी के प्रसिद्ध उद्घोषक दीपक कुमार झा तथा बीझार सिंगापुर संस्था की आराधना जी की आवाज में ट्रैक रिकॉर्ड किया गया है। इस रिकॉर्डिंग को विशाल कुमार झा के सानिध्य में पूर्ण किया गया, जबकि कार्यक्रम के संवाद शिवम झा शांडिल्य द्वारा लिखे गए हैं। इस प्रकार प्रस्तुति में नृत्य, संगीत, वाचन और संवाद का समन्वित स्वरूप देखने को मिलेगा। सिंगापुर स्थित BiJhar संस्था पिछले कई वर्षों से बिहार और झारखंड की समृद्ध कला, संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। संस्था का उद्देश्य प्रवासी भारतीय समुदाय को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने के साथ-साथ बिहार और झारखंड के कस्बाई एवं ग्रामीण अंचलों से निकलने वाली प्रतिभाओं को वैश्विक मंच उपलब्ध कराना भी है।

लोकगायक, कलाकार, शिल्पकार और विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं से जुड़े प्रतिभाशाली लोगों को प्रोत्साहित करने की इसी व्यापक अवधारणा के तहत BiJhar Cultural Confluence 2026 का आयोजन ‘ऋतु चक्र’ विषय पर किया जा रहा है। आयोजन की संकल्पना, संरचना और कार्यक्रम निर्देशन कार्यकारी निदेशक अंजनी कुमार चौधरी के नेतृत्व में तैयार किया गया है। ‘ऋतु चक्र’ के माध्यम से बिहार और झारखंड की ऋतुओं, पर्व-त्योहारों, लोकविश्वासों, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक जीवन के विविध रंगों को एक साझा मंच पर अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया जा रहा है। इस आयोजन की सांस्कृतिक यात्रा में पिछले वर्ष आयोजित ‘पूरब के रंग’ कार्यक्रम की भी महत्वपूर्ण स्मृति जुड़ी है, जिसे पद्मश्री मालिनी अवस्थी की लोकगायकी ने अविस्मरणीय बना दिया था। इस वर्ष सृष्टि फाउंडेशन को आमंत्रित किया जाना इस सांस्कृतिक यात्रा को एक नई कलात्मक ऊंचाई प्रदान करता है। मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता उसकी जीवन-सापेक्षता है। यहां लोकनृत्य केवल मंचीय प्रदर्शन नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक स्मृति और जीवन-पद्धति का अभिन्न हिस्सा हैं। ऋतु बदलती है तो लोकजीवन का स्वर बदलता है, पर्व आते हैं तो गीत और नृत्य उसमें नए रंग भरते हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक अवसर लोक-अभिव्यक्ति का माध्यम बन जाते हैं।

‘ऋतु चक्र’ इसी सांस्कृतिक निरंतरता को मंचीय भाषा में रूपांतरित करने का प्रयास है। झिझिया से लेकर छठ और सामा-चकेवा से लेकर होली तक, अलग-अलग लोकपरंपराओं को एक सूत्र में पिरोकर सृष्टि फाउंडेशन के कलाकार यह संदेश देने जा रहे हैं कि मिथिला की संस्कृति केवल इतिहास के पन्नों में सुरक्षित विरासत नहीं, बल्कि आज भी जीवंत, गतिशील और सृजनशील परंपरा है। दरभंगा की धरती से निकलकर सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने वाली यह प्रस्तुति स्थानीय प्रतिभा और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के बीच एक सेतु का निर्माण करेगी। विशेष रूप से दरभंगा जिले के युवा कलाकारों के लिए यह अवसर उनके कला-साधना के व्यापक क्षितिज का उद्घाटन करेगा। सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि वे विदेश में जाकर किसी बाहरी सांस्कृतिक शैली का अनुकरण नहीं, बल्कि अपनी ही मिट्टी की मौलिक लोक-संवेदना को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने प्रस्तुत करेंगे। 23 अगस्त को सिंगापुर में जब मिथिला के लोकनृत्यों की यह प्रस्तुति मंच पर आकार लेगी, तब उसके साथ दरभंगा की सांस्कृतिक विरासत, मिथिला की लोकचेतना और बिहार की बहुरंगी सांस्कृतिक परंपरा की भी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति दर्ज होगी। यह प्रस्तुति उन कलाकारों की साधना का परिणाम होगी, जिन्होंने स्थानीय स्तर से अपनी कला-यात्रा प्रारंभ कर अब वैश्विक सांस्कृतिक पटल तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया है। मिथिला की लोकधुनों, पर्व-परंपराओं और नृत्याभिव्यक्तियों को लेकर सृष्टि फाउंडेशन की यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा निश्चित रूप से दरभंगा और समूची मिथिला के लिए गौरव, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान का महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है।