नौकरी दिलाने के नाम पर कथित आठ लाख रुपये की ठगी के आरोप में विक्की झा गिरफ्तार, पुलिस जांच में फर्जी जॉइनिंग लेटर और अन्य दावों की पड़ताल जारी; सोशल मीडिया पर कई राजनीतिक नेताओं के साथ सार्वजनिक तस्वीरें, विभिन्न संगठनों में सक्रियता के दावे और झंझारपुर नेशनल हाईवे किनारे संचालित बताए जा रहे 'चंपारण मीट हाउस' तक अब चर्चा और जांच के दायरे में कई अहम सवाल... पढ़िए पूरी खोजी रिपोर्ट और जानिए विक्की झा के कथित कारनामों की पूरी कहानी।
बाबूबरही थाना क्षेत्र के बरदाहा निवासी विक्की कुमार झा की गिरफ्तारी के बाद यह मामला केवल एक कथित आठ लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं रह गया है। मधुबनी पुलिस की प्रेस वार्ता के बाद जैसे-जैसे तथ्य सामने आए और सोशल मीडिया पर उपलब्ध सार्वजनिक तस्वीरों तथा गतिविधियों पर लोगों की नजर गई, वैसे-वैसे इस पूरे प्रकरण को लेकर कई नए प्रश्न खड़े होने लगे हैं। हालांकि इन सभी पहलुओं की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. पढ़े पूरी रिपोर्ट....
मधुबनी। बाबूबरही थाना क्षेत्र के बरदाहा निवासी विक्की कुमार झा की गिरफ्तारी के बाद यह मामला केवल एक कथित आठ लाख रुपये की ठगी तक सीमित नहीं रह गया है। मधुबनी पुलिस की प्रेस वार्ता के बाद जैसे-जैसे तथ्य सामने आए और सोशल मीडिया पर उपलब्ध सार्वजनिक तस्वीरों तथा गतिविधियों पर लोगों की नजर गई, वैसे-वैसे इस पूरे प्रकरण को लेकर कई नए प्रश्न खड़े होने लगे हैं। हालांकि इन सभी पहलुओं की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

मधुबनी के पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि 18 जुलाई को बाबूबरही थाना में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि संविदा पर सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उससे आठ लाख रुपये लिए गए। पुलिस ने विशेष टीम गठित कर वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की और उसके बाद विक्की कुमार झा को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि कथित रूप से फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार कर लोगों को सरकारी नौकरी और ठेका दिलाने का भरोसा दिया जाता था। एसएसपी ने यह भी बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन से कई युवतियों के साथ कोर्ट मैरिज की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस इन तस्वीरों और उनसे जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। इस संबंध में अभी जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना समय से पहले होगा।

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गिरफ्तारी के बाद सबसे अधिक चर्चा जिस पहलू की हो रही है, वह आरोपी की सार्वजनिक सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता है। सोशल मीडिया पर उपलब्ध तस्वीरों में वह विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के साथ दिखाई देता है। कुछ तस्वीरों में वह जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा के साथ नजर आता है। कुछ अन्य तस्वीरों में आरसीपी सिंह, पप्पू यादव सहित अन्य सार्वजनिक हस्तियों के साथ भी उसकी तस्वीरें दिखाई देती हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह अलग-अलग समय में विभिन्न राजनीतिक संगठनों में पदाधिकारी होने का दावा भी करता रहा है। हालांकि केवल किसी नेता या सार्वजनिक व्यक्ति के साथ तस्वीर होना किसी प्रकार के संरक्षण, संबंध या आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस पूरे मामले का एक और पहलू स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। झंझारपुर नेशनल हाईवे के समीप "चंपारण मीट हाउस" नाम से एक रेस्टोरेंट संचालित होने की बात स्थानीय स्तर पर कही जा रही है, जिसे विक्की कुमार झा से जोड़ा जा रहा है। यदि यह प्रतिष्ठान वास्तव में उनके संचालन या स्वामित्व में है, तो यह भी एक ऐसा तथ्य है जिसकी पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर की जा सकती है। फिलहाल पुलिस की प्रेस वार्ता में इस व्यावसायिक प्रतिष्ठान का कोई उल्लेख नहीं किया गया। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं या नहीं।

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अब यह मामला केवल एक प्राथमिकी का नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों की उम्मीदों से भी जुड़ गया है, जिन्होंने यदि वास्तव में नौकरी, संविदा नियुक्ति या सरकारी ठेका मिलने की आशा में धन दिया है, तो वे सामने आएं और पुलिस को अपनी शिकायत उपलब्ध कराएं। स्वयं एसएसपी ने भी अपील की है कि यदि कोई अन्य व्यक्ति भी इस प्रकार की कथित ठगी का शिकार हुआ है, तो वह बाबूबरही थाना या निकटतम थाना में शिकायत दर्ज कराए, ताकि जांच का दायरा व्यापक हो सके।आने वाले दिनों में पुलिस की जांच, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजों की सत्यता और पीड़ितों के बयान इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और अंतिम सत्य का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। पत्रकारिता और कानून.... दोनों की यही मांग है कि आरोपों और तथ्यों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखा जाए तथा हर निष्कर्ष प्रमाण और न्यायिक परीक्षण के आधार पर ही निकाला जाए।
