डीएमसीएच में उस समय हड़कंप मच गया जब बीएससी नर्सिंग का एक छात्र अपनी मांगों को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। आंतरिक परीक्षा में अंक बढ़ाने और प्राचार्य पर कार्रवाई की मांग को लेकर तीन घंटे तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा। आखिर क्या है पूरा मामला और छात्र ने क्या लगाए गंभीर आरोप? जानिए इस विशेष रिपोर्ट में।

बुधवार का दिन दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के इतिहास में उन दिनों में दर्ज हो गया, जब एक युवक की जिद, व्यवस्था के प्रति उसका आक्रोश और ऊंचाई पर खड़े उसके एक-एक कदम ने हजारों लोगों की धड़कनों को थाम दिया। दोपहर का समय था। अस्पताल परिसर में मरीजों की आवाजाही सामान्य रूप से चल रही थी। डॉक्टर अपने कार्य में व्यस्त थे। परिजनों की भीड़ अस्पताल के विभिन्न वार्डों के बाहर दिखाई दे रही थी। तभी अचानक एक ऐसी खबर जंगल में लगी आग की तरह पूरे परिसर में फैल गई, जिसने देखते ही देखते पूरे डीएमसीएच को भय, आशंका और सनसनी के भंवर में धकेल दिया. पढ़े पूरी रिपोर्ट....

डीएमसीएच में उस समय हड़कंप मच गया जब बीएससी नर्सिंग का एक छात्र अपनी मांगों को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। आंतरिक परीक्षा में अंक बढ़ाने और प्राचार्य पर कार्रवाई की मांग को लेकर तीन घंटे तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा। आखिर क्या है पूरा मामला और छात्र ने क्या लगाए गंभीर आरोप? जानिए इस विशेष रिपोर्ट में।
मौत के मुहाने पर तीन घंटे तक टंगा रहा डीएमसीएच! मोबाइल टावर की खौफनाक ऊंचाई पर चढ़े बीएससी नर्सिंग छात्र ने मचाया हड़कंप, अस्पताल परिसर में उमड़ी हजारों निगाहें, पुलिस-प्रशासन की सांसें अटकी रहीं, अंकों की बढ़ोतरी और प्राचार्य पर कार्रवाई की मांग को लेकर आसमान से गूंजती रही बगावत की आवाज, हर पल मंडराता रहा किसी बड़े अनर्थ का खतरा, आखिर कैसे टला संभावित हादसा और क्यों उठाने पड़े छात्र को इतने खतरनाक कदम? जानिए मोबाइल टावर पर चढ़े बीएससी नर्सिंग छात्र का क्या कहना है, जानिए आगे इस विशेष रिपोर्ट मे

दरभंगा। बुधवार का दिन दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के इतिहास में उन दिनों में दर्ज हो गया, जब एक युवक की जिद, व्यवस्था के प्रति उसका आक्रोश और ऊंचाई पर खड़े उसके एक-एक कदम ने हजारों लोगों की धड़कनों को थाम दिया। दोपहर का समय था। अस्पताल परिसर में मरीजों की आवाजाही सामान्य रूप से चल रही थी। डॉक्टर अपने कार्य में व्यस्त थे। परिजनों की भीड़ अस्पताल के विभिन्न वार्डों के बाहर दिखाई दे रही थी। तभी अचानक एक ऐसी खबर जंगल में लगी आग की तरह पूरे परिसर में फैल गई, जिसने देखते ही देखते पूरे डीएमसीएच को भय, आशंका और सनसनी के भंवर में धकेल दिया। सूचना मिली कि बीएससी नर्सिंग अंतिम वर्ष का एक छात्र परिसर स्थित मोबाइल टावर पर चढ़ गया है। पहले तो लोगों ने इसे अफवाह समझा, लेकिन जब नजरें आसमान की ओर उठीं तो हर कोई स्तब्ध रह गया।

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लोहे के विशालकाय ढांचे के शीर्ष की ओर बढ़ता एक युवक: नीचे खड़ी भीड़। हवा में तैरती बेचैनी। और हर चेहरे पर सिर्फ एक सवाल.... अब क्या होगा? देखते ही देखते अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई। लोग अपने काम छोड़कर टावर के नीचे जमा होने लगे। कोई मोबाइल से वीडियो बना रहा था, कोई युवक को नीचे उतरने की अपील कर रहा था, तो कोई किसी अनहोनी की आशंका से कांप रहा था। टावर पर चढ़ा युवक धनंजय कुमार बताया गया, जो बीएससी नर्सिंग सत्र 2023-26 का छात्र है और पूर्वी चंपारण के मोतिहारी का निवासी है। लेकिन उस समय उसकी पहचान से ज्यादा लोगों को उसकी जान की चिंता थी। करीब सैकड़ों फीट ऊंचे टावर पर खड़ा युवक बार-बार अपनी मांगें दोहरा रहा था। उसकी मांग थी कि आंतरिक परीक्षा में उसके अंक बढ़ाए जाएं और नर्सिंग कॉलेज की प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की जाए। नीचे मौजूद लोगों के लिए यह सिर्फ एक छात्र का विरोध नहीं था।यह ऐसा दृश्य था, जिसमें एक युवक अपनी बात मनवाने के लिए मौत के बेहद करीब जाकर खड़ा हो गया था। हर गुजरते मिनट के साथ स्थिति और अधिक भयावह होती जा रही थी।तेज धूप के बीच टावर के ऊपरी हिस्से में खड़ा युवक कभी बैठता, कभी खड़ा होता, कभी हाथ हिलाता और कभी जोर-जोर से अपनी मांगों को दोहराता। नीचे खड़े लोगों की आंखें लगातार उसी पर टिकी थीं। यदि एक क्षण के लिए भी उसका संतुलन बिगड़ता, तो पूरा दृश्य किसी भयावह त्रासदी में बदल सकता था। यही कारण था कि सूचना मिलते ही डीएमसीएच प्रशासन हरकत में आ गया। पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। कई थानों की पुलिस बुला ली गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेना शुरू किया। अस्पताल परिसर में सुरक्षा घेरा तैयार किया गया। हर किसी की प्राथमिकता सिर्फ एक थी.... किसी भी कीमत पर छात्र की जान बचानी है। टावर के नीचे खड़े पुलिसकर्मी लगातार उसे समझाने का प्रयास करते रहे। अधिकारी धैर्य के साथ बातचीत करते रहे। उसे भरोसा दिलाया गया कि उसकी बात सुनी जाएगी। उसकी मांगों की जांच होगी। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। लेकिन ऊपर खड़ा युवक अपने निर्णय पर अडिग दिखाई दे रहा था। समय बीतता गया। दोपहर धीरे-धीरे शाम की ओर बढ़ने लगी। लेकिन डीएमसीएच परिसर में तनाव का बादल छंटने का नाम नहीं ले रहा था।

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हर गुजरते मिनट के साथ भीड़ बढ़ती जा रही थी: लोगों के चेहरों पर भय स्पष्ट दिखाई दे रहा था। कुछ लोग भगवान से प्रार्थना कर रहे थे। कुछ लोग प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे थे। और कुछ लोग व्यवस्था की विफलताओं पर सवाल उठा रहे थे। करीब तीन घंटे तक चला यह हाई वोल्टेज ड्रामा पूरे परिसर की धड़कनों को अपने साथ बांधे रहा। अंततः लगातार समझाइश, बातचीत और कार्रवाई के आश्वासन के बाद छात्र का मन बदला। वह धीरे-धीरे नीचे उतरने को तैयार हुआ। जैसे-जैसे वह नीचे आ रहा था, वैसे-वैसे लोगों की सांसें लौट रही थीं। और फिर वह क्षण आया, जिसका सभी को इंतजार था। करीब तीन बजे छात्र को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। टावर से नीचे उतरते ही लोगों ने राहत की सांस ली। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के चेहरों पर भी संतोष दिखाई दिया। क्योंकि कुछ मिनटों की चूक पूरे डीएमसीएच को एक बड़े हादसे का गवाह बना सकती थी।घटना के बाद पुलिस ने छात्र को अपने संरक्षण में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। प्रशासन अब उसकी मांगों, परीक्षा संबंधी विवाद और पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गया है।हालांकि छात्र सुरक्षित है और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर प्रश्न छोड़ दिए हैं।

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क्या एक छात्र को अपनी बात कहने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़े: क्या शैक्षणिक संस्थानों में शिकायत निवारण की व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है कि छात्र टावरों पर चढ़ने को मजबूर हो जाएं? क्या संवाद की कमी ऐसे खतरनाक विरोधों को जन्म दे रही है? डीएमसीएच परिसर में घटित यह घटना केवल एक छात्र के टावर पर चढ़ने की कहानी नहीं है।यह उस बेचैनी की कहानी है, जो व्यवस्था और छात्र के बीच बढ़ती दूरी का संकेत देती है। यह उस आक्रोश की कहानी है, जिसने एक युवक को जमीन छोड़कर आसमान की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। और यह उस राहत की कहानी भी है, जिसमें तीन घंटे तक मौत की आशंका से जूझने के बाद आखिरकार जिंदगी जीत गई।