गांव की शांत गलियों के नीचे पनप रहा था ‘नशे का अंधेरा खेल’! जमीन चीरकर बाहर निकलीं 77 बोतलें, पुलिस की रातभर चली कार्रवाई से मचा हड़कंप... आखिर किसके लिए जमा किया जा रहा था यह जहर, कौन हैं इसके पीछे के असली खिलाड़ी, और क्यों बढ़ गई है अवैध कारोबारियों की बेचैनी?
कभी-कभी अपराध अपने चेहरे को इतना गहरा पर्दा ओढ़ा देता है कि वह आम आंखों को दिखाई नहीं देता। वह खेतों की हरियाली, गांव की खामोशी और सामान्य जिंदगी के बीच ऐसे छिप जाता है मानो उसका अस्तित्व ही न हो। लेकिन जब कानून की नजरें जागती हैं, तो मिट्टी के नीचे दफन रहस्य भी बाहर निकल आते हैं. पढ़े पूरी खबर....
दरभंगा/घनश्यामपुर। कभी-कभी अपराध अपने चेहरे को इतना गहरा पर्दा ओढ़ा देता है कि वह आम आंखों को दिखाई नहीं देता। वह खेतों की हरियाली, गांव की खामोशी और सामान्य जिंदगी के बीच ऐसे छिप जाता है मानो उसका अस्तित्व ही न हो। लेकिन जब कानून की नजरें जागती हैं, तो मिट्टी के नीचे दफन रहस्य भी बाहर निकल आते हैं।

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घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के रसियारी गांव में मंगलवार की देर रात कुछ ऐसा ही हुआ। गांव सो रहा था, गलियां सुनसान थीं और अंधेरे की चादर पूरे इलाके पर पसरी हुई थी। लेकिन इसी सन्नाटे के बीच पुलिस की एक टीम चुपचाप गांव में प्रवेश कर रही थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया ऐसा सामान बरामद होने वाला है, जो केवल कानून का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि समाज की नसों में जहर घोलने की आशंका भी पैदा करता है। घनश्यामपुर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई 77 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद की है। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।

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मिट्टी के नीचे छिपा था कारोबार का काला सच: पुलिस सूत्रों के अनुसार, घनश्यामपुर थाना को सूचना मिली थी कि रसियारी गांव में नशीले पदार्थों का अवैध भंडारण किया गया है। सूचना सामान्य नहीं थी। यह ऐसा संकेत था जो किसी बड़े खेल की ओर इशारा कर रहा था। सूचना के सत्यापन के बाद थाना प्रभारी आलोक कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई। पुलिस ने बिना किसी शोर-शराबे के गांव में दबिश दी। तलाशी शुरू हुई और फिर वह दृश्य सामने आया जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। जमीन के नीचे बोर में छिपाकर रखी गई 77 बोतल कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुई। यह सिर्फ बोतलें नहीं थीं, बल्कि उस अवैध कारोबार के संकेत थे, जो युवाओं के भविष्य, परिवारों की शांति और समाज की सुरक्षा पर खतरा बन सकता है।

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नशे की अंधेरी सुरंग और गांवों तक पहुंचता जहर: विशेषज्ञों का मानना है कि कोडीन युक्त कफ सिरप का दुरुपयोग लंबे समय से देश के कई हिस्सों में नशे के रूप में किया जाता रहा है। जब ऐसी दवाइयां चिकित्सकीय उपयोग से हटकर अवैध नेटवर्क के हाथों में पहुंचती हैं, तब वे धीरे-धीरे युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेने लगती हैं। घनश्यामपुर में हुई यह बरामदगी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह संकेत देती है कि नशे का कारोबार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। इसकी परछाइयां गांवों तक फैलने की कोशिश कर रही हैं। और यही वह खतरा है जिसे पुलिस समय रहते रोकना चाहती है।

गिरफ्तार हुआ आरोपी, खुल सकते हैं कई और नाम: छापेमारी के दौरान पुलिस ने रसियारी गांव निवासी रामपुनित झा के पुत्र मोनू कुमार झा को गिरफ्तार किया। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों की नजर अब इस बात पर है कि इतनी बड़ी मात्रा में बरामद कफ सिरप कहां से लाई गई, किन लोगों के माध्यम से इसका भंडारण किया गया और इसकी आपूर्ति किन क्षेत्रों में की जानी थी। जांच के जानकार बताते हैं कि ऐसे मामलों में अक्सर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई स्तरों पर काम करने वाला नेटवर्क सक्रिय होता है। थाना प्रभारी आलोक कुमार ने बताया कि इस मामले में घनश्यामपुर थाना कांड संख्या 211/26 दर्ज किया गया है।आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आना बाकी हैं।

ड्रग्स इंस्पेक्टर की भी नजर: ड्रग्स इंस्पेक्टर अर्चना कुमारी ने बताया कि बरामद कफ सिरप का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद कानूनी प्रक्रिया को और आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर लिप्त पाए जाने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। घनश्यामपुर थाना में पिछले कुछ समय से लगातार हो रही कार्रवाइयों ने स्थानीय स्तर पर एक अलग संदेश दिया है। हाल ही में मोबाइल झपटमारी के मामले में 24 घंटे के भीतर अपराधियों की गिरफ्तारी और छीना गया मोबाइल बरामद कर पुलिस ने अपनी त्वरित कार्रवाई का परिचय दिया था। अब रसियारी गांव में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए कोडीन युक्त कफ सिरप की बरामदगी ने यह संकेत दिया है कि पुलिस केवल घटित अपराधों पर ही नहीं, बल्कि संभावित अपराधों की जड़ों तक पहुंचने की भी कोशिश कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराब तस्करी, अवैध कारोबार, चोरी, छिनतई और अन्य आपराधिक गतिविधियों के खिलाफ लगातार चल रही कार्रवाई से अपराध से जुड़े तत्वों में बेचैनी बढ़ी है।

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सवाल सिर्फ 77 बोतलों का नहीं है: इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू केवल 77 बोतलों की बरामदगी नहीं है। सवाल यह है कि यदि यह खेप बाजार तक पहुंच जाती तो उसका असर कितने युवाओं, कितने परिवारों और कितनी जिंदगियों पर पड़ता? सवाल यह भी है कि क्या यह केवल एक भंडारण केंद्र था या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा? और सबसे बड़ा सवाल यह कि आखिर गांव की मिट्टी के नीचे इस तरह का जहर छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी? इन सवालों के जवाब अभी जांच के गर्भ में हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। संभव है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हों तथा नशे के कारोबार से जुड़े कई नए नाम सामने आएं। फिलहाल रसियारी गांव की वह जमीन, जिसके नीचे 77 बोतलें दफन थीं, अब एक बड़े सवाल का प्रतीक बन चुकी है.... क्या गांवों की शांत सतह के नीचे अपराध की कोई ऐसी दुनिया भी पनप रही है, जिसे समय रहते पहचानना जरूरी है? घनश्यामपुर पुलिस की यह कार्रवाई कम से कम इतना संकेत जरूर देती है कि कानून की नजर अब उन अंधेरे कोनों तक पहुंचने लगी है, जहां अपराध खुद को सबसे सुरक्षित समझता था।
