Last seen: 22 hours ago
मिथिला जन जन की आवाज सत्य, साहस और जनविश्वास का वह सशक्त डिजिटल मंच है, जहाँ हर समाचार केवल सूचना नहीं, बल्कि समाज की धड़कनों का प्रामाणिक प्रतिबिंब बनकर आपके समक्ष प्रस्तुत होता है। हमारी प्रतिबद्धता निष्पक्ष, निर्भीक, तथ्यपरक और जनोन्मुख पत्रकारिता के प्रति है। राजनीति, अपराध, शिक्षा, प्रशासन, संस्कृति, खेल और जनसरोकार से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण विषय पर हमारी पैनी दृष्टि रहती है। हम सनसनी नहीं, सत्य; अफवाह नहीं, प्रमाण; और पक्षपात नहीं, निष्पक्षता को अपनी पहचान मानते हैं। प्रत्येक खबर गहन पड़ताल, विश्वसनीय तथ्यों और नैतिक पत्रकारिता के मानकों पर आधारित होती है। आपका विश्वास हमारी सबसे बड़ी शक्ति, आपकी सहभागिता हमारी प्रेरणा और जनहित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मिथिला जन जन की आवाज़ केवल समाचार नहीं, बल्कि समाज की चेतना, लोकतंत्र की सजग अभिव्यक्ति और हर आम नागरिक की बुलंद आवाज है।
वह नगरी जहाँ परंपरा, श्रद्धा और संस्कृति की त्रिवेणी बहती है। यह नगर केवल ईंट और...
कभी जिन पंखों को कटे हुए मान लिया गया था, आज वही पंख उड़ान भरने को अधीर हैं। मिथिला...
दरभंगा के वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा सिमरी थाना का किया गया औचक निरीक्षण एक मात्र...
जब किसी पद की मर्यादा को चरित्र की दृढ़ता से साधा जाए, तब एक अधिकारी सिर्फ कुर्सी...
जब सत्ता के गलियारों में मंत्रियों के काफिले सरपट दौड़ते हैं, तब लोकतंत्र अक्सर किनारे...
जब नीतीश कुमार ने बिहार के हर पंचायत को स्वच्छता से जोड़ने का संकल्प लिया था, तब...
जब खून अपना रिश्ता भूल जाए, जब लालच रिश्तों से बड़ा हो जाए… तब बाप के साँस लेने...
24 जून 2025 को दरभंगा पुलिस अधीक्षक कार्यालय से एक प्रेस विज्ञप्ति ने जिले की पुलिस...
कभी अपराध का पर्याय रहा बहेड़ा इलाका आज फिर सुर्खियों में है। पर इस बार सुर्ख़ियों...
जब सत्ता के सिंहासन तक पहुँचने की आहट सुनाई देती है, तो लोकतंत्र का समस्त ढांचा...
बिहार में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है, पर सत्ता की चाल जरूर बदल गई है। इस बार तबादले...
दरभंगा की धरती... जहाँ हर बरस जून-जुलाई के दस्तक से पहले नदी की धाराएँ सरगोशियाँ...
नगर निगम का प्रांगण केवल एक नगर निकाय कार्यालय नहीं रहा, बल्कि वह एक भावनात्मक तीर्थक्षेत्र...
बिहार की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में बीती शनिवार की रात को घटी एक सनसनीखेज वारदात...
प्रमंडल की गलियों में कई घर ऐसे हैं, जहाँ खाँसी की आवाज़ किसी की पुकार बन चुकी थी।...
जहाँ मंदिरों की घंटियों से सुबह होती है और खेतों में हल चलाकर किसान सूरज को सलाम...