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दरभंगा ज़िले के सकतपुर थाना क्षेत्र स्थित काकोढ़ा गाँव में मुहर्रम की संध्या एक...
शाम की ढलती रौशनी में जब एक डॉक्टर अपनी दिनभर की सेवाओं से लौट रहा था, तब रास्ते...
दरभंगा की गर्म और अपेक्षाकृत शांत मानी जाने वाली रातों में एक रात ऐसी भी आई, जो...
सड़कें महज़ गंतव्य तक पहुँचने का मार्ग नहीं होतीं। वे साक्षी होती हैं व्यवस्था के...
बुधवार की सुबह दरभंगा ने अपने आप में एक राजनीतिक दस्तावेज देखा। जनशक्ति, जनाक्रोश...
दरभंगा की माटी में जब भी श्रद्धा का स्वर फूटता है, तो माँ श्यामा के मंदिर से उठती...
शब्द थरथरा रहे हैं, आत्मा काँप रही है, और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ आज लहूलुहान है......
ये सिर्फ एक खबर नहीं... यह उस मौन पीड़ा का दस्तावेज़ है जो आज भी ककोढ़ा गांव की...
दरभंगा की धरती पर फिर एक बार धर्म, संस्कृति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला।...
संस्कृति जहां मौन होती है, वहां विवाद मुखर हो जाते हैं। और जब विवाद पंचांग जैसे...
वह भूमि जिसे मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है, वह शहर जहाँ ज्ञान, परंपरा...
मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी से।कभी-कभी कोई रचना एक पुस्तक के रूप में नहीं, बल्कि...
27 जून की सुबह थी। मौसम भी कुछ वैसा ही, जैसे कोई अनहोनी दस्तक देने को तैयार हो।...
मंगलवार की सुबह थी। सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था, पर राष्ट्रीय राजमार्ग NH-27...
रात की स्याही में जब शहर अपने ख्वाबों में खोया था, तब दरभंगा के विश्वविद्यालय थाना...
जब शहर की सड़कों पर चांदनी उतरती है, दुकानें आधी-नीम रौशनी में खुद को समेटने लगती...