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जब अनुसंधान बना मज़ाक, न्याय पड़ा मौन और बहेड़ा थानाध्यक्ष...
कभी अपराध का पर्याय रहा बहेड़ा इलाका आज फिर सुर्खियों में है। पर इस बार सुर्ख़ियों...
बूथों पर सन्नाटा है, अफसरों पर निगरानी है, शस्त्रधारी अब...
जब सत्ता के सिंहासन तक पहुँचने की आहट सुनाई देती है, तो लोकतंत्र का समस्त ढांचा...
प्रशासनिक समर के नए सेनापति नियुक्त: बिहार में सात आईपीएस...
बिहार में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ है, पर सत्ता की चाल जरूर बदल गई है। इस बार तबादले...
कमला की कोप कथा को रोकने की कवायद: जिलाधिकारी कौशल कुमार...
दरभंगा की धरती... जहाँ हर बरस जून-जुलाई के दस्तक से पहले नदी की धाराएँ सरगोशियाँ...
जब ज़िंदगी ने मुँह मोड़ा और मौत ने भी पहचानने से इनकार...
मिथिला की शान, सांस्कृतिक विरासतों की नगरी, जहाँ की धरती अक्सर कविताओं और संगीत...
जब कानून की चौखट पर वकील ही कटघरे में खड़ा हुआ: दरभंगा...
दरभंगा की ऐतिहासिक न्यायभूमि ने बहुत से हाई-प्रोफाइल मुकदमों को देखा, सुना और सहा...
दरभंगा की सियासी फिजाओं में गिरा एक और पत्ता: अलीनगर से...
राजनीति में कब कौन गिर जाए, इसका अंदाज़ा लगाना उतना ही कठिन होता है जितना कि किसी...
दरभंगा की वो माँ, जो सिर्फ़ सब्ज़ी लेने निकली थी मगर लौटते...
कभी लूट हथियारों के बल पर होती थी, अब लूट मानसिकता के धारदार किनारों से की जाती...
जब अपहरण हुआ और फिरौती मांगी गई, तब कोतवाली थाना बना मिशन...
6 जून की रात दरभंगा में दो मेहनतकश गैस पाइप श्रमिकों का अपहरण एक ऐसी घटना जिसने...
जब जेल की दीवारों से रिसा लहू और न्याय घुटता रहा ताले में...
यह कोई सामान्य अपराध कथा नहीं है। यह उस मानसिकता की बानगी है, जहाँ अधिकार, अहंकार...
14 जून की वो घड़ी जब दरभंगा के बाघमोड़ बना दरभंगा पुलिस...
दरभंगा शहर की नब्ज़ को अगर किसी ने करीब से थामा है, तो वह है पुलिस की वो रात जो...
खंडहर की दीवारों से उठती थी साजिश की साँसें, चाबी और चुप्पी...
एक ऐसा शहर जो किसी ज़माने में मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहलाता था, आज अपने शहरी...
कागज़ों के कब्रिस्तान और कंप्यूटरों की जमी धूल पर चलती...
जब सिस्टम के भीतर सन्नाटा पसरा हो, अपराध के आंकड़े बेहिसाब बढ़ते जाएं और थाने की...
जब फेसबुक ने छीना राजू कुमार का सपना और दरभंगा साइबर थाना...
वक़्त बदल रहा है, और बदलते वक़्त के साथ ठगों की चालें भी बदल रही हैं। अब लाठी और...
जिन्होंने नहीं सुनी वो ‘धाँय!’, वे पढ़ें यह रिपोर्ट ताकि...
भरवाड़ा की वह शाम सामान्य नहीं थी। हल्की हवा बह रही थी, बाजार में चूड़ी की खनखनाहट...
जब दरभंगा की सड़कों पर कानून की परिभाषा खुद चलती मिली:...
यह दरभंगा की वही रात थी वही चांद, वही सड़कें, वही बिजली के खंभों पर थरथराते बल्ब,...