बड़ी खबर: पैर में लगी गोली से शुरू हुई कहानी ने लिया खतरनाक मोड़, अज्ञात हमलावरों का दावा, विरोधाभासी बयान और फिर छिपा मिला देशी कट्टा...पुलिस की गहन पड़ताल में सामने आया ऐसा घटनाक्रम, जिसने पूरे गोलीकांड की तस्वीर ही पलट दी; पढ़िए जांच में खुले राज की पूरी कहानी।
कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा में पैर में गोली लगने के बाद अस्पताल पहुंचे सुरवित कुमार उर्फ सचिन सिंह के मामले ने जांच आगे बढ़ने के साथ नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर मामला अज्ञात लोगों द्वारा गोली मारे जाने का बताया गया था, लेकिन दरभंगा पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों ने इस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए। दरभंगा पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 29 सितंबर 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि केवटगामा निवासी सुरवित कुमार उर्फ सचिन सिंह के पैर में गोली लगी है और उनका इलाज बिरौल के प्रथम हॉस्पिटल में चल रहा है. पढ़े पूरी खबर....
दरभंगा। कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा में पैर में गोली लगने के बाद अस्पताल पहुंचे सुरवित कुमार उर्फ सचिन सिंह के मामले ने जांच आगे बढ़ने के साथ नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती तौर पर मामला अज्ञात लोगों द्वारा गोली मारे जाने का बताया गया था, लेकिन दरभंगा पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों ने इस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए। दरभंगा पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, 29 सितंबर 2026 को पुलिस को सूचना मिली कि केवटगामा निवासी सुरवित कुमार उर्फ सचिन सिंह के पैर में गोली लगी है और उनका इलाज बिरौल के प्रथम हॉस्पिटल में चल रहा है। सूचना मिलने के बाद कुशेश्वरस्थान थानाध्यक्ष ने उसका सत्यापन कराया। पुलिस के अनुसार सूचना सही पाए जाने पर बिरौल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में मामले की जांच शुरू की गई। यहीं से उस घटना की तस्वीर बदलनी शुरू हुई, जिसे शुरुआती तौर पर गोलीबारी की वारदात के रूप में देखा जा रहा था।

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अज्ञात हमलावरों की कहानी पर पुलिस को क्यों हुआ संदेह: पुलिस के अनुसार जख्मी सुरवित कुमार उर्फ सचिन सिंह से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि दुकान बंद कर घर लौटने के दौरान अज्ञात व्यक्तियों ने उन्हें गोली मार दी। लेकिन पुलिस की जांच यहीं नहीं रुकी। जख्मी व्यक्ति के परिजनों से पूछताछ की गई तो पुलिस को उनके बयानों में विरोधाभास मिला।अलग-अलग लोगों से मिली जानकारी में एकरूपता नहीं होने के बाद पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल यानी SIT के स्तर पर घटनास्थल की गहन पड़ताल शुरू की। यही पड़ताल आगे चलकर उस कहानी तक पहुंची, जो शुरुआती दावे से बिल्कुल अलग थी। दरभंगा पुलिस के अनुसार, जख्मी सुरवित कुमार उर्फ सचिन सिंह की पत्नी मीरा कुमारी से गहन पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान घटना का अलग घटनाक्रम सामने आया। पुलिस के मुताबिक मीरा कुमारी ने बताया कि 28 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे सुरवित अपना दुकान बंद कर घर पहुंचे थे। इसके बाद वह घर में कपड़े बदल रहे थे। पुलिस के अनुसार, उनके कमर में पहले से एक देशी लोडेड कट्टा था। कपड़े बदलने के दौरान कथित तौर पर कट्टा गिर गया और फायर हो गया। पुलिस के अनुसार गोली उनके पैर में लगी और आर-पार निकल गई। अगर पुलिस की जांच में सामने आए इस घटनाक्रम को देखा जाए तो यहां मामला किसी अज्ञात हमलावर द्वारा बाहर गोली मारे जाने के बजाय घर के भीतर हथियार चलने की घटना के रूप में सामने आता है।

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अस्पताल तक पहुंचने की कहानी भी जांच के दायरे में: पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, घटना के बाद मामले को तत्काल सार्वजनिक नहीं किया गया और जख्मी व्यक्ति का इलाज बिरौल स्थित प्रथम हॉस्पिटल में कराया गया। पुलिस का दावा है कि इलाज भी गुप्त तरीके से कराया जा रहा था और घटना के संबंध में तत्काल किसी को जानकारी नहीं दी गई। यानी एक तरफ पैर में गोली लगी थी, दूसरी तरफ पुलिस के अनुसार घटना को अज्ञात हमलावरों से जोड़कर बताया गया और दूसरी ओर हथियार को भी कथित तौर पर छिपाने की कोशिश की गई। यहीं पर जांच ने मामले को और गंभीर बना दिया। पुलिस के अनुसार जख्मी की पत्नी की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल देशी कट्टा और एक खोखा बरामद किया गया। दोनों को घर के सामने एक तार के पेड़ के नीचे से बरामद किए जाने की बात पुलिस ने कही है। पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि जख्मी के भाई भानु कुमार सिंह ने कथित तौर पर साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से देशी कट्टा और खोखा वहां गाड़ दिया था। यानी पुलिस की जांच में अब केवल यह सवाल नहीं रह गया कि गोली किसने चलाई, बल्कि यह भी सामने आया कि घटना के बाद हथियार और खोखा कहां गया और उसे कथित तौर पर क्यों छिपाया गया।

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एक गोली, एक कट्टा और बदलती कहानी: पूरे घटनाक्रम को पुलिस की ओर से जारी जानकारी के आधार पर क्रमवार देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह बनती है...28 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे दुकान बंद करने के बाद सुरवित घर पहुंचे। पुलिस के अनुसार उनके पास देशी कट्टा था। कपड़े बदलते समय कट्टा गिरा और फायर हो गया। गोली पैर में लगी। इसके बाद मामला पुलिस के सामने सीधे तौर पर नहीं आया। जख्मी का इलाज कराया गया। 29 सितंबर को पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति के पैर में गोली लगी है। जख्मी से पूछताछ में अज्ञात लोगों द्वारा गोली मारने की बात सामने आई। लेकिन परिजनों के बयानों में पुलिस को विरोधाभास मिला। SIT ने घटनास्थल की पड़ताल की। इसके बाद पुलिस ने जख्मी की पत्नी से गहन पूछताछ की। और फिर पुलिस के अनुसार, घटना का वह कथित घटनाक्रम सामने आया जिसमें अज्ञात हमलावरों की कहानी के बजाय घर के भीतर हथियार से अचानक गोली चलने की बात सामने आई। अब सवाल सिर्फ गोली लगने का नहीं, हथियार रखने का भी है आगे दरभंगा पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए जख्मी व्यक्ति के भाई भानु कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से नहीं, बल्कि उसकी निशानदेही/मामले से जुड़े घटनास्थल से कथित तौर पर एक देशी कट्टा और एक खोखा बरामद किया है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार हथियार और खोखा घर के सामने तार के पेड़ के नीचे से बरामद किए गए। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस ने इसे अवैध हथियार रखने वालों के विरुद्ध कार्रवाई से जोड़ते हुए प्रस्तुत किया है।

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पुलिस की जांच ने किस दावे को पलटा: इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शुरुआती तौर पर सामने आया घटनाक्रम और जांच के बाद सामने आया घटनाक्रम एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। शुरुआती तौर पर जख्मी व्यक्ति ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि उसे दुकान बंद कर घर लौटते समय अज्ञात लोगों ने गोली मारी। लेकिन पुलिस के अनुसार जांच में परिजनों के बयानों में विरोधाभास मिला और बाद में जख्मी की पत्नी से पूछताछ के आधार पर यह दावा सामने आया कि गोली घर के भीतर कट्टा गिरने से चली थी। इसलिए यह मामला अब केवल गोली लगने की घटना नहीं रह गया है। इसमें कथित तौर पर गलत कहानी बताने, हथियार छिपाने और साक्ष्य को दबाने की कोशिश जैसे सवाल भी जांच के केंद्र में आ गए हैं। इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तारी के साथ हथियार और खोखा बरामद करने का दावा किया है। छापेमारी दल में कुशेश्वरस्थान के थानाध्यक्ष, तिलकेश्वर थानाध्यक्ष सह पुलिस अवर निरीक्षक मानव शंकर, पुलिस अवर निरीक्षक रूपेंद्र कुमार सिंह, महिला सिपाही कंचन कुमारी और महाल चौकीदार बुच्ची कुर्मी शामिल रहे। फिलहाल पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल और परिजनों के बयानों से ऐसी जानकारियां मिलीं, जिनके बाद गोलीकांड की शुरुआती कहानी पर सवाल खड़े हुए। हालांकि, अंतिम रूप से घटनाक्रम और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया तथा आगे की पुलिस जांच में होने वाले साक्ष्यों से होगी। एक पैर में लगी गोली से शुरू हुई कहानी अब अवैध हथियार, कथित तौर पर छिपाए गए साक्ष्य और बयानों के विरोधाभास तक पहुंच चुकी है। दरभंगा पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति ने इस मामले में वह परत जरूर हटा दी है, जिसके पीछे घटना की शुरुआती कहानी छिपी हुई थी।
