ताजपुर में पंचायत नहीं, बारूद से फैसला लिखने की थी तैयारी! पुलिस चेकिंग देखते ही तीन बाइक पर सवार हथियारबंद युवक भागे, घेराबंदी में पांच दबोचे गए; कमर से 7.65 एमएम पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद, पूछताछ में सामने आई कथित फायरिंग की साजिश...दो फरार, एक कथित मास्टरमाइंड भी नामजद; वक्त रहते पुलिस पहुंची, वरना पंचायत की चौखट पर गूंज सकती थीं गोलियां!

ताजपुर में एक कथित पंचायत को खूनी टकराव में बदलने की तैयारी की सूचना के बाद पुलिस की सक्रियता ने संभावित वारदात से पहले ही पूरे घटनाक्रम को रोक दिया। पुलिस के अनुसार, हथियार और गोली लेकर पहुंचे युवकों का एक समूह ताजपुर–चकपहाड़ रोड पर माधोपुर दिघरुआ मस्जिद के समीप पहुंचा था। आरोप है कि पंचायत के दौरान विवादित पक्ष पर गोली चलाने की योजना थी। लेकिन इससे पहले कि हथियारों की कथित भाषा में पंचायत का फैसला लिखा जाता, पुलिस की चेकिंग शुरू हो गई और तीन मोटरसाइकिलों पर सवार सात लोगों का समूह अचानक पुलिस को देखकर भागने लगा. पढ़े पूरी खबर....

ताजपुर में पंचायत नहीं, बारूद से फैसला लिखने की थी तैयारी! पुलिस चेकिंग देखते ही तीन बाइक पर सवार हथियारबंद युवक भागे, घेराबंदी में पांच दबोचे गए; कमर से 7.65 एमएम पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद, पूछताछ में सामने आई कथित फायरिंग की साजिश...दो फरार, एक कथित मास्टरमाइंड भी नामजद; वक्त रहते पुलिस पहुंची, वरना पंचायत की चौखट पर गूंज सकती थीं गोलियां!
ताजपुर में पंचायत नहीं, बारूद से फैसला लिखने की थी तैयारी! पुलिस चेकिंग देखते ही तीन बाइक पर सवार हथियारबंद युवक भागे, घेराबंदी में पांच दबोचे गए; कमर से 7.65 एमएम पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद, पूछताछ में सामने आई कथित फायरिंग की साजिश...दो फरार, एक कथित मास्टरमाइंड भी नामजद; वक्त रहते पुलिस पहुंची, वरना पंचायत की चौखट पर गूंज सकती थीं गोलियां!

समस्तीपुर। ताजपुर में एक कथित पंचायत को खूनी टकराव में बदलने की तैयारी की सूचना के बाद पुलिस की सक्रियता ने संभावित वारदात से पहले ही पूरे घटनाक्रम को रोक दिया। पुलिस के अनुसार, हथियार और गोली लेकर पहुंचे युवकों का एक समूह ताजपुर–चकपहाड़ रोड पर माधोपुर दिघरुआ मस्जिद के समीप पहुंचा था। आरोप है कि पंचायत के दौरान विवादित पक्ष पर गोली चलाने की योजना थी। लेकिन इससे पहले कि हथियारों की कथित भाषा में पंचायत का फैसला लिखा जाता, पुलिस की चेकिंग शुरू हो गई और तीन मोटरसाइकिलों पर सवार सात लोगों का समूह अचानक पुलिस को देखकर भागने लगा। पुलिस ने पीछा कर दो बाइक पर सवार पांच लोगों को पकड़ लिया, जबकि तीसरी बाइक पर सवार दो व्यक्ति मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने एक 7.65 एमएम का पिस्टल, एक जिंदा कारतूस, चार मोबाइल फोन और दो हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा किया है। मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को आरोपित किया है, जिनमें पांच गिरफ्तार, दो फरार और एक कथित रूप से पूरी योजना तैयार करने वाला व्यक्ति शामिल है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 12 सितंबर 2026 की शाम करीब 5:30 बजे ताजपुर–चकपहाड़ रोड स्थित माधोपुर दिघरुआ मस्जिद से लगभग 500 मीटर दक्षिण दिशा में पक्की सड़क पर की गई।

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STF और DIU की सूचना ने खोला संभावित खूनी खेल का रास्ता: ताजपुर थानाध्यक्ष पु०नि० मनीष कुमार के लिखित बयान के अनुसार, 12 सितंबर को करीब 4:10 बजे शाम STF बिहार, पटना और DIU समस्तीपुर से सूचना प्राप्त हुई कि चक फाजिल निवासी अजित कुमार अपने कुछ साथियों के साथ हथियार और गोली लेकर ताजपुर–चकपहाड़ रोड होते हुए माधोपुर दिघरुआ मस्जिद के आसपास आने वाला है। पुलिस को यह भी सूचना मिली थी कि बाघी निवासी भोला कुमार वहां पहुंचकर इन लोगों को रिसीव करेगा और इसके बाद किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी है। सूचना को हल्के में नहीं लिया गया। थानाध्यक्ष ने वरीय अधिकारियों को जानकारी दी, सनहा दर्ज किया और सशस्त्र बल के साथ पुलिस वाहन से करीब 4:20 बजे थाना से निकल पड़े। इसके बाद शुरू हुआ वह ऑपरेशन, जो कुछ देर बाद एक संदिग्ध हथियारबंद समूह की गिरफ्तारी में बदल गया।

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सड़क पर पुलिस की नजर, सामने से आती तीन काली बाइक: पुलिस टीम माधोपुर दिघरुआ मस्जिद के पास पहुंची और वाहन चेकिंग शुरू कर दी। शाम करीब 5:30 बजे चकपहाड़ की ओर से ताजपुर की तरफ एक साथ तीन काले रंग की स्प्लेंडर मोटरसाइकिलें आती दिखाई दीं। पहली बाइक पर तीन लोग सवार थे। दूसरी और तीसरी बाइक पर दो-दो व्यक्ति बैठे थे। पुलिस के मुताबिक, जैसे ही इन लोगों की नजर चेकिंग पर पड़ी, तीनों बाइक अचानक पीछे मोड़कर भागने लगीं। यहीं से पुलिस को शक और गहरा गया। सशस्त्र बल ने पीछा किया और दो मोटरसाइकिलों को घेरकर उन पर सवार पांच लोगों को पकड़ लिया। तीसरी बाइक पर सवार दो व्यक्ति पुलिस की घेराबंदी से निकलकर फरार होने में सफल रहे। पुलिस के अनुसार, पकड़े गए लोगों से पुलिस चेकिंग देखकर भागने का कारण पूछा गया, लेकिन वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पुलिस ने पकड़े गए पांचों लोगों की विधिवत तलाशी ली। स्थानीय राहगीरों से तलाशी का स्वतंत्र साक्षी बनने का अनुरोध किया गया, लेकिन पुलिस के अनुसार किसी ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस टीम के सशस्त्र बल के दो जवानों को स्वतंत्र साक्षी मानते हुए तलाशी की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। तलाशी के दौरान अजित कुमार की कमर से कथित रूप से एक लोहे का पिस्टल बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, पिस्टल में मैगजीन लगी थी और मैगजीन निकालने पर उसमें एक जिंदा कारतूस मिला, जिसके पेंदे पर 7.65 KF अंकित था। पुलिस ने बताया कि हथियार का बट लकड़ी का था। बरामद हथियार और कारतूस के संबंध में अजित कुमार से वैध लाइसेंस अथवा अन्य दस्तावेज मांगे गए, लेकिन पुलिस के अनुसार वह कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। यानी पुलिस के सामने अब केवल संदिग्ध युवकों का भागना नहीं था एक कथित अवैध हथियार और जिंदा कारतूस भी बरामद हो चुका था।

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चार मोबाइल, दो बाइक और एक कथित हथियारबंद नेटवर्क: पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन भी जब्त किए। इसके अलावा दो काले रंग की हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिलें भी जब्त की गईं। पुलिस के अनुसार, पहली बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर BR33Z5510 है, जबकि दूसरी बाइक का नंबर BR33BM0134 बताया गया है। दोनों वाहनों के चेसिस और इंजन नंबर भी जब्ती सूची में दर्ज किए गए हैं। जब्त किए गए मोबाइल और वाहनों की तकनीकी जांच आगे की जांच का अहम हिस्सा बन सकती है। पुलिस के अनुसार, मोबाइल फोन से संपर्कों और घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल साक्ष्य की जांच की जाएगी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में अजित कुमार ने कथित तौर पर जो जानकारी दी, उसने मामले को और गंभीर बना दिया। थानाध्यक्ष के बयान के अनुसार, अजित ने पुलिस को बताया कि उसके पास से बरामद हथियार और गोली भोला कुमार ने छिपाकर रखने के लिए दिया था। आरोप है कि 12 सितंबर की सुबह भोला कुमार ने अजित को फोन कर कहा था कि गांव में पंचायती होने वाली है। उसे हथियार और गोली के साथ दो-तीन आपराधिक प्रवृत्ति के लड़कों को लेकर आने को कहा गया था। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में यह भी सामने आया कि पंचायत में यदि विवाद का समाधान नहीं होता, तो कथित रूप से विरोधी पक्ष पर गोली चलाने की तैयारी थी। यही वह बिंदु है, जिसने इस पूरे मामले को सामान्य हथियार बरामदगी से आगे बढ़ाकर संभावित पूर्व नियोजित हिंसा की साजिश के रूप में जांच के दायरे में ला दिया है।

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मस्जिद के पास 'रिसीव' करने का कथित प्लान: पुलिस के अनुसार, अजित ने बताया कि उसे माधोपुर दिघरुआ मस्जिद के पास भोला कुमार द्वारा रिसीव किए जाने की बात कही गई थी। अजित कथित तौर पर सोनू कुमार पासवान और प्रकाश कुमार के साथ वहां पहुंचा। दूसरी तरफ भोला कुमार अपने साथ नितीश कुमार तथा दो अन्य लोगों के साथ वहां मौजूद था। पुलिस के अनुसार, सभी लोग वहां मिलने के बाद ताजपुर की तरफ बढ़े ही थे कि पुलिस की चेकिंग शुरू हो गई और पांच लोग को पकड़ लिए गए, जबकि दो लोग बाइक लेकर फरार हो गए। पूछताछ के दौरान फरार हुए दोनों व्यक्तियों के बारे में भी पुलिस को जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, भोला कुमार ने फरार युवकों की पहचान रंजन कुमार और मंजय कुमार के रूप में बताई। दोनों आधारपुर थाना कर्पूरिग्राम क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस ने दोनों को फरार आरोपी के रूप में नामजद किया है। उनकी गिरफ्तारी के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ में जन्माष्टमी विसर्जन के दौरान अबीर लगाने को लेकर हुआ विवाद बताया जा रहा है। पुलिस के बयान के मुताबिक, बाघी निवासी अरविन्द राय उर्फ गुर्जर और चंदन राय के बीच विवाद हुआ था। इसी विवाद को लेकर 12 सितंबर को पंचायत के माध्यम से मामला सुलझाने की बात थी। लेकिन पुलिस के अनुसार, इसी पंचायत को लेकर कथित तौर पर हिंसक तैयारी की गई। पुलिस पूछताछ में भोला कुमार ने कथित रूप से बताया कि अरविन्द राय उर्फ गुर्जर ने उससे हथियार और गोली का इंतजाम करने तथा पांच-छह आपराधिक प्रवृत्ति के युवकों के साथ एक-दो हथियार लेकर शाम में पहुंचने को कहा था। पुलिस के अनुसार, कथित योजना यह थी कि यदि पंचायत में बात नहीं बनी तो विरोधी पक्ष पर फायरिंग की जाएगी।

पंचायत से पहले पुलिस की चेकिंग बनी निर्णायक मोड़: इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पुलिस की समय पर हुई चेकिंग बताई जा रही है। एक तरफ कथित तौर पर पंचायत की तैयारी थी, दूसरी तरफ हथियारबंद युवकों के पहुंचने की सूचना। पुलिस ने रास्ते में वाहन चेकिंग शुरू की और उसी दौरान तीन बाइक पर सवार संदिग्ध युवक पुलिस की नजर में आ गए। चेकिंग देखकर उनका अचानक बाइक मोड़कर भागना पुलिस के लिए संदेह का बड़ा कारण बना। इसके बाद तलाशी में पिस्टल और जिंदा कारतूस मिलने से पुलिस की आशंका और मजबूत हुई। अगर पुलिस की सूचना और कार्रवाई को घटनाक्रम की कड़ियों में जोड़ा जाए तो मामला इस क्रम में सामने आता है... सूचना, घेराबंदी, तीन बाइक, पुलिस को देखकर पलायन, पांच गिरफ्तारी, हथियार की बरामदगी, पूछताछ और कथित फायरिंग की योजना। इस मामले में पुलिस ने कुल आठ लोगों को आरोपित किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अजित कुमार, प्रकाश कुमार, सोनू कुमार पासवान, भोला कुमार और नितीश कुमार शामिल हैं। और फरार आरोपियों में रंजन कुमार और मंजय कुमार के नाम बताए गए हैं। वहीं पुलिस ने अरविन्द राय उर्फ गुर्जर को कथित रूप से घटना की योजना बनाने वाले व्यक्ति के रूप में आरोपित किया है। पुलिस का कहना है कि बिना अनुज्ञप्ति आग्नेयास्त्र रखना और उसका परिवहन करना संज्ञेय अपराध है। इसी आधार पर गिरफ्तार आरोपियों के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की सुसंगत धाराओं में कार्रवाई की जा रही है।

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अब जांच का असली सवाल...हथियार आया कहां से: पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में पिस्टल और कारतूस बरामद हो चुके हैं। लेकिन जांच का अगला और अहम सवाल हथियार के स्रोत को लेकर होगा। यह हथियार किससे मिला? किसने उपलब्ध कराया? क्या पहले भी इसका इस्तेमाल हुआ है? मोबाइल फोन पर किन लोगों से बातचीत हुई? फरार दोनों युवकों की भूमिका क्या थी? क्या कथित पंचायत में और लोग भी शामिल होने वाले थे? और क्या किसी बड़े आपराधिक नेटवर्क से इन आरोपियों का संपर्क है...इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है। आगे पुलिस ने गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को दी है...थानाध्यक्ष के बयान के अनुसार, गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को गिरफ्तारी का कारण बताते हुए विधिवत गिरफ्तारी ज्ञापन तैयार किया गया तथा उनके परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना दी गई। बरामद हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन और दोनों मोटरसाइकिलों की वीडियोग्राफी कर विधिवत जब्ती की गई। जब्ती सूची की प्रति गिरफ्तार आरोपियों को भी उपलब्ध कराई गई। पुलिस के अनुसार, सभी गिरफ्तार आरोपियों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। ताजपुर की इस कार्रवाई ने फिलहाल एक ऐसे घटनाक्रम को रोक दिया, जिसमें पुलिस के मुताबिक गांव की पंचायत के दौरान विवाद सुलझाने के बजाय हथियारों के जरिए फैसला थोपने की तैयारी थी। हालांकि कथित गोलीबारी वास्तव में होती या नहीं, यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। लेकिन पुलिस के अनुसार मौके से पिस्टल और जिंदा कारतूस की बरामदगी, हथियारबंद युवकों का समूह, पुलिस चेकिंग देखकर भागने की कोशिश और पूछताछ में सामने आई कथित फायरिंग की योजना ने मामले की गंभीरता जरूर बढ़ा दी है। अब पुलिस की नजर फरार रंजन कुमार और मंजय कुमार के साथ-साथ कथित तौर पर योजना बनाने वाले अरविन्द राय उर्फ गुर्जर पर है। उनकी गिरफ्तारी और पूछताछ से यह साफ हो सकता है कि 12 सितंबर की शाम ताजपुर–चकपहाड़ रोड पर जुटा यह समूह महज एक पंचायत में शामिल होने जा रहा था या पुलिस के मुताबिक वास्तव में एक संभावित खूनी टकराव की तैयारी चल रही थी। फिलहाल पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं, दो फरार हैं और एक कथित मुख्य योजनाकार के रूप में नामजद किया गया है। मामले की आगे की जांच ही यह तय करेगी कि इस कथित साजिश की जड़ें कितनी गहरी थीं।