शराबबंदी वाले बिहार में तस्करों की बड़ी चाल बेनकाब: पतंजलि के सामानों की आड़ में 4,947 लीटर विदेशी शराब, 60 लाख की खेप जब्त; अब खुलेगा पूरा नेटवर्क...कहां से आई शराब, किसके इशारे पर चली और किसके दरवाजे तक पहुंचनी थी, जांच की रडार पर हर कड़ी

बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी के बीच अवैध शराब की तस्करी पर नकेल कसने के लिए मद्यनिषेध विभाग की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच दरभंगा में अवैध शराब की एक बड़ी खेप पकड़ी गई है। मद्यनिषेध विभाग की टीम ने बिशनपुर थाना क्षेत्र के भरौल स्थित एकमी-शोभन रोड पर कार्रवाई करते हुए एक कंटेनर से 4,947.120 लीटर विदेशी शराब बरामद की है. पढ़े पूरी खबर....

शराबबंदी वाले बिहार में तस्करों की बड़ी चाल बेनकाब: पतंजलि के सामानों की आड़ में 4,947 लीटर विदेशी शराब, 60 लाख की खेप जब्त; अब खुलेगा पूरा नेटवर्क...कहां से आई शराब, किसके इशारे पर चली और किसके दरवाजे तक पहुंचनी थी, जांच की रडार पर हर कड़ी
शराबबंदी वाले बिहार में तस्करों की बड़ी चाल बेनकाब: पतंजलि के सामानों की आड़ में 4,947 लीटर विदेशी शराब, 60 लाख की खेप जब्त; अब खुलेगा पूरा नेटवर्क...कहां से आई शराब, किसके इशारे पर चली और किसके दरवाजे तक पहुंचनी थी, जांच की रडार पर हर कड़ी

दरभंगा। बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी के बीच अवैध शराब की तस्करी पर नकेल कसने के लिए मद्यनिषेध विभाग की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच दरभंगा में अवैध शराब की एक बड़ी खेप पकड़ी गई है। मद्यनिषेध विभाग की टीम ने बिशनपुर थाना क्षेत्र के भरौल स्थित एकमी-शोभन रोड पर कार्रवाई करते हुए एक कंटेनर से 4,947.120 लीटर विदेशी शराब बरामद की है। बरामद शराब की अनुमानित बाजार कीमत करीब 60 लाख रुपये बताई गई है। यह कार्रवाई महज शराब की एक खेप पकड़े जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जिस तरीके से शराब को दूसरे सामानों के बीच छिपाकर परिवहन किया जा रहा था, उसने तस्करी के नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शराब को कंटेनर में रखे पतंजलि के उत्पादों के बीच इस तरह छिपाया गया था कि सामान्य जांच के दौरान उसकी पहचान करना आसान न हो। हालांकि, गुप्त सूचना के आधार पर सक्रिय मद्यनिषेध टीम ने कंटेनर की गहन तलाशी ली और सामानों की आड़ में छिपी शराब की बड़ी खेप का पर्दाफाश कर दिया।

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सामानों की आड़ में बनाया गया था शराब का रास्ता: मद्यनिषेध विभाग के अनुसार कंटेनर में बड़ी संख्या में पतंजलि के उत्पाद भी लदे हुए थे। इनमें 478 कार्टन साबुन, 460 कार्टन टूथपेस्ट, 155 बोरा सर्फ और 111 कार्टन ब्रश समेत अन्य सामान शामिल थे। इन्हीं उत्पादों के बीच शराब की बोतलों को छिपाकर रखा गया था। तस्करों की ओर से अपनाया गया यह तरीका जांच एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सामान्य तौर पर किसी मालवाहक वाहन में वैध व्यापारिक सामग्री देखकर जांच की गंभीरता कम होने की संभावना रहती है, लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर टीम ने कंटेनर को रोककर व्यवस्थित तरीके से तलाशी ली। इसके बाद सामने आई शराब की मात्रा ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।

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दो लोग गिरफ्तार, यूपी से जुड़ा है कनेक्शन: कार्रवाई के दौरान कंटेनर के चालक और उपचालक को गिरफ्तार किया गया है। दोनों उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के निवासी बताए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद दोनों से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शराब की खेप कहां से लाई गई थी, इसका वास्तविक गंतव्य क्या था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं। पूछताछ का दायरा केवल चालक और उपचालक तक सीमित नहीं रहने वाला है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब के परिवहन के पीछे आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण स्थल, संभावित खरीदार और स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। मद्यनिषेध विभाग अब इस बात की जानकारी जुटाने में लगा है कि कंटेनर को किस मार्ग से दरभंगा तक लाया गया और इसके पीछे संगठित तस्करी का कोई नेटवर्क काम कर रहा था या नहीं।

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शराबबंदी के बावजूद तस्करी की चुनौती: बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन पर कानूनी रोक है। इसके बावजूद राज्य के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर अवैध शराब की खेप पकड़ी जाती रही है। यही कारण है कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए केवल शराब की बरामदगी ही पर्याप्त नहीं मानी जा सकती, बल्कि उसके पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क तक पहुंचना भी जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। दरभंगा में पकड़ी गई करीब पांच हजार लीटर विदेशी शराब की यह खेप इसी चुनौती की गंभीरता को सामने रखती है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब का एक साथ परिवहन यह संकेत देता है कि अवैध शराब कारोबार में शामिल लोग जांच से बचने के लिए लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। कभी दूसरे सामानों के बीच शराब छिपाई जाती है तो कभी मालवाहक वाहनों के जरिए लंबी दूरी तक खेप पहुंचाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होता है कि सिर्फ वाहन और उसमें मौजूद लोगों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि शराब की सप्लाई लाइन की अंतिम कड़ी तक जांच पहुंचे। शराब कहां से आई, किसने भेजी, किसके लिए भेजी गई और इसे कहां खपाया जाना था... इन सवालों के जवाब पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सकते हैं।

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दरभंगा में मद्यनिषेध विभाग का अभियान जारी: जिला प्रशासन के निर्देश पर मद्यनिषेध विभाग द्वारा जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ लगातार छापेमारी एवं जांच अभियान चलाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। मद्यनिषेध के सहायक आयुक्त प्रदीप कुमार के अनुसार अवैध शराब के कारोबार के विरुद्ध विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। उनका कहना है कि जिले में शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर रोक सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार निगरानी और कार्रवाई कर रहा है। भरौल में पकड़ा गया कंटेनर अब जांच का अहम केंद्र बन गया है। करीब 4,947 लीटर विदेशी शराब की बरामदगी ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि इतनी बड़ी खेप को दरभंगा तक पहुंचाने की योजना कितनी दूर तक फैली थी। क्या यह खेप केवल दरभंगा के लिए थी या इसे किसी दूसरे जिले अथवा राज्य तक पहुंचाया जाना था? कंटेनर में मौजूद वैध सामानों के बीच शराब छिपाने की योजना किस स्तर पर तैयार की गई थी? इस पूरी व्यवस्था में और कितने लोग शामिल हैं? इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।

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फिलहाल मद्यनिषेध विभाग ने बड़ी खेप को जब्त कर चालक और उपचालक को गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच की असली दिशा उस नेटवर्क तक पहुंचने की होगी, जिसने शराबबंदी वाले बिहार में हजारों लीटर विदेशी शराब को एक वैध मालवाहक खेप का हिस्सा दिखाकर आगे बढ़ाने की कोशिश की। दरभंगा की यह कार्रवाई एक बार फिर स्पष्ट करती है कि शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार करने वाले तत्व कानून की निगरानी से बचने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में बड़ी खेप की बरामदगी से आगे बढ़कर तस्करी की पूरी श्रृंखला को चिन्हित करना और उसके आर्थिक तंत्र पर प्रहार करना ही शराबबंदी को प्रभावी बनाने की दिशा में सबसे अहम कदम होगा।