जहाँ अधिकारों की आवाज दबने लगे, वहाँ सजगता ही बदलाव का पहला संकेत...जनक राम का संदेश; अन्याय, उपेक्षा और शोषण पर चुप्पी के बजाय बात उचित स्तर तक पहुंचाने की नसीहत, माँ श्यामा न्यास से जुड़े कर्मचारियों के सवालों पर संज्ञान का भरोसा, सनातन-वैदिक परंपरा और मिथिला की विरासत पर संवाद के बीच जल्द माँ श्यामा के दरबार में पहुंचने की जताई इच्छा
अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहना और किसी भी परिस्थिति में तटस्थ होकर अपनी बात रखना ही स्वस्थ समाज की वास्तविक शक्ति है। जब समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहता है, तब अन्याय, उपेक्षा और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने की शक्ति भी मजबूत होती है। ये बातें सत्तारूढ़ दल के उप-मुख्य सचेतक सह बिहार सरकार के पूर्व मंत्री जनक राम ने कहीं. पढ़े पूरी खबर.....
दरभंगा। अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहना और किसी भी परिस्थिति में तटस्थ होकर अपनी बात रखना ही स्वस्थ समाज की वास्तविक शक्ति है। जब समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहता है, तब अन्याय, उपेक्षा और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने की शक्ति भी मजबूत होती है। ये बातें सत्तारूढ़ दल के उप-मुख्य सचेतक सह बिहार सरकार के पूर्व मंत्री जनक राम ने कहीं। मौका था कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत स्नातकोत्तर साहित्य विभागाध्यक्ष सह माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति के न्यासी सदस्य डॉ. संतोष कुमार पासवान द्वारा मिथिला की पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुरूप पूर्व मंत्री जनक राम के अभिनंदन का।

अभिनंदन के पश्चात जनक राम ने कहा कि समाज में अधिकारों के प्रति सजगता बेहद आवश्यक है। उन्होंने सामाजिक समरसता और आपसी सद्भाव को वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए कहा कि समाज को किसी भी प्रकार के विभाजन, वैमनस्य अथवा असंतुलन से ऊपर उठकर मिल-जुलकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन और वैदिक परंपरा से हमारा गहरा और अटूट संबंध है। मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक चेतना की अपनी विशिष्ट पहचान है। इसी क्रम में उन्होंने माँ श्यामा मंदिर के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि वे जल्द ही माँ श्यामा के दर्शन के लिए दरभंगा आएंगे।

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अधिकारों के लिए सजग रहना ही स्वस्थ समाज की ताकत: जनक राम ने अधिकारों के प्रति जागरूकता को सामाजिक मजबूती से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी स्वस्थ व्यवस्था में लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों दोनों के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था, प्रतिष्ठान अथवा धार्मिक न्यास से जुड़े कर्मचारी अथवा किसी अन्य व्यक्ति के साथ शोषण या अन्याय की स्थिति सामने आती है, तो उसे दबाने अथवा नजरअंदाज करने के बजाय उचित स्तर तक पहुंचाना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने डॉ. संतोष कुमार पासवान से कहा कि माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति के अतिरिक्त यदि न्यास समिति के अधीन आने वाले किसी अन्य मंदिर में कर्मचारी आदि के शोषण की कोई बात सामने आती है, तो उसे उनके संज्ञान में अवश्य लाया जाए। उनके इस कथन को अधिकारों की रक्षा और संस्थागत जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अवसर पर डॉ. संतोष कुमार पासवान ने संस्कृत स्नातकोत्तर साहित्य विभागाध्यक्ष के रूप में पूर्व मंत्री जनक राम को आगामी सेमिनार में शामिल होने का निमंत्रण दिया। साथ ही निमंत्रण को जनक राम ने सहर्ष स्वीकार किया। संस्कृत, वैदिक परंपरा और मिथिला की सांस्कृतिक विरासत के संदर्भ में यह मुलाकात विशेष रही। डॉ. पासवान ने मिथिला की परंपरा के अनुरूप उनका अभिनंदन किया और संस्कृत साहित्य एवं अकादमिक गतिविधियों से संबंधित आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी।

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माँ श्यामा मंदिर न्यास की गतिविधियों से कराया अवगत: मुलाकात के दौरान डॉ. संतोष कुमार पासवान ने माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति की विभिन्न गतिविधियों से भी पूर्व मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने न्यास से जुड़े कार्यों, धार्मिक गतिविधियों और मंदिर की व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी साझा की। इसके साथ ही बातचीत के दौरान न्यास से जुड़े कर्मचारियों और अन्य मंदिरों में कार्यरत कर्मियों से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई। जनक राम ने स्पष्ट कहा कि यदि कहीं भी कर्मचारी के साथ शोषण अथवा अधिकारों के हनन का कोई मामला सामने आता है, तो उसे उनके संज्ञान में लाया जाना चाहिए। मुलाकात का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा के बीच सामाजिक अधिकारों एवं संस्थागत जिम्मेदारी का विषय भी सामने आया। जनक राम ने कहा कि समाज में सामाजिक समरसता और सद्भाव की आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है। अलग-अलग विचारों और मतों के बावजूद समाज को संवाद का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की पहचान केवल उसकी धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि से नहीं होती, बल्कि इस बात से भी होती है कि वहां कमजोर व्यक्ति, कर्मचारी और आम नागरिक अपने अधिकारों को लेकर कितने सुरक्षित और जागरूक हैं।

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माँ श्यामा के दर्शन का दिया भरोसा: बातचीत के दौरान माँ श्यामा मंदिर का भी विशेष रूप से उल्लेख हुआ। जनक राम ने माँ श्यामा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए शीघ्र ही मंदिर पहुंचकर दर्शन करने की बात कही। दरभंगा की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान में माँ श्यामा मंदिर के विशेष महत्व को देखते हुए उनका यह वक्तव्य भी चर्चा का विषय बना। कार्यक्रम में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के राज्य परामर्शदात्री सदस्य उज्ज्वल कुमार भी मौजूद थे। कुल मिलाकर मुलाकात में सनातन परंपरा, वैदिक संस्कृति, मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता, अधिकारों की सजगता और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद हुआ।
