दरभंगा में "पच्छुआ की निरंकुश आंधी में, मासूम की जिन्दगी के स्वप्न चुराए गए, ममता का आकाश ध्वस्त हुआ"

तेज पछुआ हवाओं के बीच एक घर की दीवारें धू-धू कर जल उठीं, और लपटों के साथ एक मासूम की किलकारियां भी राख हो गईं। बहेड़ी प्रखंड के रमौली गुजरौली पंचायत के नवटोल गांव में सोमवार को आग लगने से छह घर जलकर खाक हो गए। इस भयावह घटना में ढाई साल के मासूम सनी की झुलसकर मौत हो गई। मां सुलेखा बेबस होकर देखती रह गई, लेकिन अपने लाल को जलती हुई झोपड़ी से बाहर नहीं निकाल सकी. पढ़े पुरी खबर......

दरभंगा में "पच्छुआ की निरंकुश आंधी में, मासूम की जिन्दगी के स्वप्न चुराए गए, ममता का आकाश ध्वस्त हुआ"
दरभंगा में पच्छुआ की निरंकुश आंधी में, मासूम की जिन्दगी के स्वप्न चुराए गए, ममता का आकाश ध्वस्त हुआ

दरभंगा:- तेज पछुआ हवाओं के बीच एक घर की दीवारें धू-धू कर जल उठीं, और लपटों के साथ एक मासूम की किलकारियां भी राख हो गईं। बहेड़ी प्रखंड के रमौली गुजरौली पंचायत के नवटोल गांव में सोमवार को आग लगने से छह घर जलकर खाक हो गए। इस भयावह घटना में ढाई साल के मासूम सनी की झुलसकर मौत हो गई। मां सुलेखा बेबस होकर देखती रह गई, लेकिन अपने लाल को जलती हुई झोपड़ी से बाहर नहीं निकाल सकी।

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सुबह का समय था। सुलेखा चूल्हे पर खाना बना रही थी। उसकी दुनिया उसके तीन बच्चों के इर्द-गिर्द ही घूमती थी। खाना बनाने के बाद वह बकरी बांधने चली गई। अपने दोनों बेटों को बुआ को बुलाने के लिए भेज दिया। घर में सनी अकेला था। वह गहरी नींद में था, उसे क्या पता था कि यह नींद उसकी आखिरी होगी।

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आग की लपटें और मां की चीखें: कुछ ही पलों में आग की चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया। झोपड़ी के सूखे खपरैल और लकड़ी के खंभे चटकने लगे। तेज पछुआ हवा ने आग को और भड़का दिया। जब तक कोई कुछ समझ पाता, घर पूरी तरह से लपटों में घिर चुका था। सुलेखा की नजर जैसे ही जलती हुई झोपड़ी पर पड़ी, उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह दौड़ी, चीखती रही, रोती रही, लेकिन जलते दरवाजों ने उसे अंदर जाने नहीं दिया। उसके हाथों से उसका लाल छूट चुका था।

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गांव वालों ने जैसे-तैसे आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन सब कुछ राख हो चुका था। लपटों में सनी का मासूम शरीर जलकर खाक हो गया। मां की चीखें पूरे गांव में गूंज उठीं। वह बिलखती रही, अपनी तकदीर को कोसती रही, लेकिन नियति ने उसका सबसे अनमोल धन छीन लिया था।

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दमकल की गाड़ी नहीं पहुंच पाई: घटना की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डीएसपी अग्निशमन अनुरोध प्रसाद ने बताया कि घटनास्थल मुख्य सड़क से 100 मीटर अंदर था, जहां दमकल की गाड़ी भी नहीं जा सकी। ग्रामीणों ने बताया कि अगर समय पर दमकल पहुंच पाती, तो शायद यह मासूम मौत के मुंह में जाने से बच जाता।

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तीन दिनों में तीन बच्चों की मौत: दरभंगा जिले में बीते तीन दिनों में आग लगने की घटनाओं में तीन मासूमों की मौत हो चुकी है। प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि पछुआ हवा के मौसम में सावधानी बरती जाए, खासकर चूल्हा जलाने के समय। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल अपीलों से इन दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सकता है? क्या प्रशासन का कर्तव्य सिर्फ चेतावनी देना भर है? या फिर उन गांवों तक आधारभूत सुविधाएं पहुंचाना भी जरूरी है, जहां दमकल की गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं?

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मां की सूनी गोद, बुझा हुआ आंगन: सुलेखा की आंखों में अब भी आंसुओं की धार बह रही है। उसका घर तो जल ही चुका था, लेकिन उसकी ममता भी जलकर राख हो गई। वह अपने छोटे से सनी को आखिरी बार गोद में नहीं ले सकी, उसे सीने से नहीं लगा सकी। गांव में मातम पसरा हुआ है, हर कोई इस पीड़ा को महसूस कर रहा है। पछुआ की लपटें बुझ भी जाएं, लेकिन सुलेखा के आंगन में अब कभी हंसी-खुशी के दीप नहीं जलेंगे।