दरभंगा में धर्म, अपराध और कानून की टकराहट: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी कथावाचक की जमानत पर 24 जनवरी को सुनवाई, जेल की सलाखों के पीछे ‘महाराज’, अब अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें....
दरभंगा की वह काली फाइल, जिसने पूरे मिथिला को झकझोर कर रख दिया है, अब अदालत के कठघरे में और गहराती जा रही है। कथावाचक के वेश में छिपा वह व्यक्ति, जिस पर नाबालिग की अस्मिता रौंदने, धर्म का दुरुपयोग करने और अपराध को आस्था का लबादा ओढ़ाने के गंभीर आरोप हैं, फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। चर्चित कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर की जमानत याचिका पर सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी. पढ़े पूरी खबर......
दरभंगा की वह काली फाइल, जिसने पूरे मिथिला को झकझोर कर रख दिया है, अब अदालत के कठघरे में और गहराती जा रही है। कथावाचक के वेश में छिपा वह व्यक्ति, जिस पर नाबालिग की अस्मिता रौंदने, धर्म का दुरुपयोग करने और अपराध को आस्था का लबादा ओढ़ाने के गंभीर आरोप हैं, फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। चर्चित कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर की जमानत याचिका पर सुनवाई अब 24 जनवरी को होगी। यह वही श्रवण दास है, जिसकी गिरफ्तारी ने दरभंगा में धर्म, मंदिर और तथाकथित साधु-संतों की भूमिका पर बड़े और डरावने सवाल खड़े कर दिए थे।

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गिरफ्तारी से अदालत तक का भयावह सफर: महिला थानाकांड संख्या 182/25 के तहत नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी कथावाचक श्रवण दास को महिला थाना की पुलिस ने 17 जनवरी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश प्रोतिमा परिहार की अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने आरोपी को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए दरभंगा जेल भेज दिया। जिस व्यक्ति को लोग कथा मंचों पर बैठा देखकर चरण-स्पर्श करते थे, वही अब कैदी नंबर बनकर जेल की ऊंची दीवारों के भीतर है। धर्म का सिंहासन पल भर में अदालत के कटघरे में बदल चुका है।

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वही आरोप, वही डर लेकिन अब कानूनी लड़ाई: इस मामले में महिला थाना में दर्ज प्राथमिकी में श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर के साथ-साथ राम उदित दास उर्फ मौनी, जो पचाढ़ी स्थान के महंत बताए जाते हैं, को भी नामजद आरोपी बनाया गया है। आरोपों की गंभीरता ऐसी है कि यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि धर्म की आड़ में पनपे संगठित शोषण की आशंका को जन्म देता है। पहले सामने आई रिपोर्ट में नाबालिग ने जो बयान दिए थे, वे आज भी इस केस की रीढ़ बने हुए हैं शादी का झांसा, बार-बार शारीरिक शोषण, गर्भ ठहरने पर दवाइयों से अबॉर्शन, निर्वस्त्र होकर ‘सेवा’ करने जैसे कथित आदेश, और मंदिर व गुरु की चुप्पी।

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जमानत की कोशिश, लेकिन केस डायरी बनी दीवार: काराधीन अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता ने जमानत याचिका दायर की है, लेकिन विशेष लोक अभियोजक ने अदालत के समक्ष साफ शब्दों में कहा कि इस संवेदनशील और संगीन मामले में केस डायरी का अवलोकन आवश्यक है। इसी के बाद महिला थाना से केस डायरी की मांग की गई। केस डायरी वही दस्तावेज, जिसमें दर्ज हैं पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, जांच की दिशा और वे सबूत, जो तय करेंगे कि कथावाचक की कहानी अदालत में कितनी टिकेगी।

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24 जनवरी एक तारीख, कई सवाल: केस डायरी आने की प्रत्याशा में अदालत ने 24 जनवरी की तारीख तय की है। यह तारीख सिर्फ एक जमानत सुनवाई नहीं है, बल्कि यह तय करेगी कि क्या आरोपी को राहत मिलेगी? या फिर धर्म के नाम पर अपराध करने वालों के लिए जेल ही ठिकाना बनेगी?

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यह मामला अब सिर्फ श्रवण दास तक सीमित नहीं रहा। यह सवाल बन चुका है उस व्यवस्था पर, जो आस्था के नाम पर आंखें मूंद लेती है। यह चेतावनी है उन घरों के लिए, जहां कथावाचकों को देवदूत समझकर दरवाज़े खोल दिए जाते हैं। आज आरोपी जेल में है, कल जमानत की अर्जी है, और परसों फैसला। लेकिन नाबालिग की वह चीख़, वह डर और वह टूटता भरोसा वह अदालत की हर सुनवाई में मौजूद रहेगा। यह मामला सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, समझने के लिए है। क्योंकि यहां धर्म नहीं, अपराध कटघरे में है।
