दरभंगा में 'खौफ की काली रात'! छत फाड़कर मौत की तरह घर में उतरे पांच नकाबपोश दरिंदे... डेढ़ साल की मासूम के सामने बहू को बनाया बंधक, बेरहमी से पीटा, काट दिए बाल, हाथ-पांव बांधकर पूरे घर में घसीटा, पीठ में रहस्यमयी इंजेक्शन लगाकर किया बेहोश... फिर 20 मिनट तक बंद कमरों में मचाया आतंक का तांडव, लाखों के जेवर और नकदी समेटकर अंधेरे में हुए फरार, पूरे इलाके में दहशत और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

बहादुरपुर थाना क्षेत्र का शांत माना जाने वाला डरहार गांव गुरुवार की देर शाम उस समय दहशत के साए में डूब गया, जब हथियारबंद और पूरी तैयारी के साथ पहुंचे अपराधियों ने एक चिकित्सक के घर को अपना निशाना बनाकर ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया, जिसने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद गांव में भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। लोग देर रात तक अपने-अपने घरों के बाहर खड़े होकर इस दिल दहला देने वाली घटना की चर्चा करते रहे. पढ़े पूरी खबर....

दरभंगा में 'खौफ की काली रात'! छत फाड़कर मौत की तरह घर में उतरे पांच नकाबपोश दरिंदे... डेढ़ साल की मासूम के सामने बहू को बनाया बंधक, बेरहमी से पीटा, काट दिए बाल, हाथ-पांव बांधकर पूरे घर में घसीटा, पीठ में रहस्यमयी इंजेक्शन लगाकर किया बेहोश... फिर 20 मिनट तक बंद कमरों में मचाया आतंक का तांडव, लाखों के जेवर और नकदी समेटकर अंधेरे में हुए फरार, पूरे इलाके में दहशत और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।
दरभंगा में 'खौफ की काली रात'! छत फाड़कर मौत की तरह घर में उतरे पांच नकाबपोश दरिंदे... डेढ़ साल की मासूम के सामने बहू को बनाया बंधक, बेरहमी से पीटा, काट दिए बाल, हाथ-पांव बांधकर पूरे घर में घसीटा, पीठ में रहस्यमयी इंजेक्शन लगाकर किया बेहोश... फिर 20 मिनट तक बंद कमरों में मचाया आतंक का तांडव, लाखों के जेवर और नकदी समेटकर अंधेरे में हुए फरार, पूरे इलाके में दहशत और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल।

दरभंगा। बहादुरपुर थाना क्षेत्र का शांत माना जाने वाला डरहार गांव गुरुवार की देर शाम उस समय दहशत के साए में डूब गया, जब हथियारबंद और पूरी तैयारी के साथ पहुंचे अपराधियों ने एक चिकित्सक के घर को अपना निशाना बनाकर ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया, जिसने पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद गांव में भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। लोग देर रात तक अपने-अपने घरों के बाहर खड़े होकर इस दिल दहला देने वाली घटना की चर्चा करते रहे।

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जानकारी के अनुसार, होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. पवन मिश्रा के आवास पर लगभग पांच बदमाशों का गिरोह सुनियोजित तरीके से पहुंचा। मुख्य दरवाजे से प्रवेश करने के बजाय अपराधियों ने छत के रास्ते घर में घुसने का रास्ता चुना, जिससे साफ संकेत मिलता है कि उन्हें मकान की बनावट और घर की स्थिति की पहले से जानकारी रही होगी। घर में उस समय डॉक्टर की 22 वर्षीय छोटी पुत्रवधू करिश्मा देवी अपनी महज डेढ़ वर्ष की मासूम बच्ची के साथ अकेली थीं। इसी अकेलेपन का फायदा उठाकर अपराधियों ने घर के भीतर आतंक का ऐसा तांडव मचाया, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है।

घर में घुसते ही बदमाशों ने सबसे पहले महिला को अपने कब्जे में ले लिया। विरोध करने पर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इतना ही नहीं, दरिंदगी की सारी सीमाएं पार करते हुए अपराधियों ने उसके बाल काट दिए, हाथ-पांव कसकर बांध दिए और पूरे घर में घसीटते रहे। महिला की चीख-पुकार बाहर तक न पहुंचे, इसके लिए अपराधियों ने घर का टेलीविजन तेज आवाज में चला दिया। यह तरीका इस बात की ओर इशारा करता है कि बदमाश केवल लूटपाट करने नहीं आए थे, बल्कि उन्होंने हर कदम पहले से सोच-समझकर रखा था ताकि आसपास के लोगों को भनक तक न लगे।

वारदात का सबसे भयावह पहलू तब सामने आया, जब अपराधियों ने महिला की पीठ में इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद वह अचेत हो गई और फिर अपराधियों ने बिना किसी बाधा के पूरे घर को खंगालना शुरू कर दिया। इस दौरान मासूम बच्ची अपनी मां के साथ हो रही बर्बरता की मूक गवाह बनी रही। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने के लिए काफी है।

करीब 20 मिनट तक बदमाश घर के तीन अलग-अलग कमरों में बेखौफ घूमते रहे। उन्होंने दो गोदरेज अलमारियों के ताले तोड़ डाले और उनमें रखे कीमती सामान को एक-एक कर अपने कब्जे में लेते गए। अपराधियों ने लगभग पांच लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और 35 हजार रुपये नकद लेकर फरार होने में सफलता हासिल की। लूटे गए सामान में मंगलसूत्र, सोने की चेन, टीका, नथिया, झुमके, अंगूठियां, पायल, बिछिया, कान के विभिन्न आभूषण, चाबी रिंग सहित कई बहुमूल्य जेवर शामिल बताए जा रहे हैं। परिवार के वर्षों की मेहनत और विश्वास की पूंजी कुछ ही मिनटों में अपराधियों के हाथों चली गई।

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घटना के बाद जब परिजनों और ग्रामीणों को जानकारी मिली तो पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना पुलिस तक पहुंचाई गई, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस लगभग एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची। इस दौरान ग्रामीणों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर नाराजगी भी देखने को मिली। बहादुरपुर थानाध्यक्ष प्रसुनजय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और पूरे घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। इसके बाद फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया। विशेषज्ञों ने घर के भीतर और आसपास मौजूद संभावित साक्ष्यों को सुरक्षित करते हुए वैज्ञानिक तरीके से जांच की प्रक्रिया शुरू की। घटनास्थल से मिले हर छोटे-बड़े सुराग को संकलित किया जा रहा है ताकि अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिल सके।

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उधर गंभीर रूप से घायल करिश्मा देवी को तत्काल इलाज के लिए डीएमसीएच भेजा गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। चिकित्सक यह भी जांच कर रहे हैं कि महिला को लगाया गया इंजेक्शन किस प्रकार का था और उसमें कौन-सा पदार्थ मौजूद था। यदि इसकी पुष्टि होती है तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है। पुलिस का कहना है कि घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, संभावित संदिग्धों की पहचान की जा रही है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या बदमाशों को घर की पूरी जानकारी पहले से थी या किसी स्थानीय व्यक्ति ने उनकी मदद की थी।

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इस सनसनीखेज डकैती ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ कैसे गया कि वे एक परिवार की बहू को बंधक बनाकर, उसके साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए, घर में लगभग 20 मिनट तक खुलेआम तांडव मचाते रहे और फिर लाखों की संपत्ति लेकर आराम से फरार हो गए। अब पूरे जिले की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस खौफनाक वारदात के पीछे छिपे चेहरों को जल्द बेनकाब कर कानून के कठघरे तक पहुंचाया जाएगा, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में यह संदेश जाए कि अपराध कितना भी सुनियोजित क्यों न हो, उसका अंत कानून की गिरफ्त में ही होता है।