दरभंगा में 18 वर्षीय लड़की का दूसरी बार अपहरण, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक 18 वर्षीय लड़की के दोबारा अपहरण की घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पीड़िता की मां ने सिंहवाड़ा थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई है, जिसमें अज्ञासपुर गांव के मो. नौशाद, उसकी मां नसीमा खातून और उसकी मौसी को नामजद किया गया है. पढ़े पुरी खबर......

दरभंगा में 18 वर्षीय लड़की का दूसरी बार अपहरण, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
दरभंगा में 18 वर्षीय लड़की का दूसरी बार अपहरण, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

दरभंगा: बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक 18 वर्षीय लड़की के दोबारा अपहरण की घटना ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पीड़िता की मां ने सिंहवाड़ा थाने में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई है, जिसमें अज्ञासपुर गांव के मो. नौशाद, उसकी मां नसीमा खातून और उसकी मौसी को नामजद किया गया है। मां का आरोप है कि इन लोगों ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपहरण कर लिया और वह अब अपनी बेटी की जान को लेकर चिंतित हैं।

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घटना का विवरण: पीड़िता की मां ने पुलिस को बताया कि उनके पति परदेस में मजदूरी करते हैं और वह अपनी बेटी के साथ घर पर अकेली रहती हैं। घटना के दिन सुबह-सुबह उनकी बेटी मोबाइल फोन लेकर घर से निकली थी। जब वह वापस नहीं लौटी, तो मां ने उसकी खोजबीन शुरू की। इस दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मो. नौशाद और उसके परिजनों ने उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए हैं। मां ने यह भी खुलासा किया कि यह पहली बार नहीं है जब उनकी बेटी का अपहरण हुआ हो। इससे पहले भी यही आरोपी उनकी बेटी को अगवा कर चुके थे, जिसे पंचायत के हस्तक्षेप के बाद बरामद किया गया था। लेकिन इस बार मां को डर है कि उनकी बेटी को कहीं बेच दिया जाए या उसके साथ कोई अनहोनी घटना हो जाए।

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पुलिस की कार्रवाई: सिंहवाड़ा थानाध्यक्ष रंजीत कुमार चौधरी ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि लड़की की बरामदगी के लिए पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, "हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और आरोपियों की तलाश में टीम लगातार काम कर रही है।" हालांकि, यह सवाल उठ रहा है कि पहली घटना के बाद आरोपियों पर कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई, जिसके चलते उन्होंने दोबारा ऐसा करने की हिम्मत जुटाई।

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कानून के प्रति बेखौफ अपराधी: यह घटना दरभंगा में बढ़ते अपराध और अपराधियों में कानून के प्रति घटते डर को उजागर करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में अपहरण, चोरी और अन्य अपराधों की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई प्रभावी नहीं दिख रही। इस मामले में भी यह तथ्य चिंताजनक है कि एक ही लड़की को दूसरी बार निशाना बनाया गया। इससे पहले जनवरी 2025 में सिंहवाड़ा बाजार से एक अन्य लड़की के अपहरण की खबर सामने आई थी, जहां पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच शुरू की थी। इन घटनाओं से साफ है कि अपराधी बेखौफ होकर अपने मंसूबों को अंजाम दे रहे हैं।

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परिवार की चिंता और समाज का गुस्सा: पीड़िता की मां ने अपनी शिकायत में आशंका जताई है कि उनकी बेटी को मानव तस्करी का शिकार बनाया जा सकता है या उसकी जान को खतरा हो सकता है। उनका कहना है, "मेरे पास अपनी बेटी के अलावा कोई सहारा नहीं है। अगर उसे कुछ हो गया, तो मैं जी नहीं पाऊंगी।" इस घटना से स्थानीय समुदाय में भी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस और प्रशासन समय रहते सख्त कदम नहीं उठाएंगे, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ेंगी।

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प्रशासन पर दबाव: इस घटना ने दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। एक ही पीड़िता के साथ दोबारा अपहरण की घटना यह सवाल उठाती है कि क्या पुलिस की निगरानी और अपराधियों पर लगाम कसने की रणनीति में कोई कमी है? क्या पहली घटना के बाद आरोपियों को सजा मिली होती, तो यह दूसरी वारदात टल सकती थी? ये सवाल न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान लगाते हैं।

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आगे की राह: फिलहाल पुलिस का दावा है कि वह इस मामले में तेजी से कार्रवाई कर रही है, लेकिन पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग त्वरित न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। यह घटना न केवल एक परिवार की पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि समाज में बढ़ते अपराध और कानून व्यवस्था की कमजोर कड़ी को भी उजागर करती है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी जल्दी पीड़िता को बरामद कर आरोपियों को सजा दिलवाती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सके।