दरभंगा के सीने में धधक रहा था कथित नशे का भूमिगत साम्राज्य? गौरीशंकर चौधरी के घर से बरामद हुए लाखों रुपये, प्रतिबंधित सिरप और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने मचाया हड़कंप।दरभंगा पुलिस की कार्रवाई को सलाम, पढ़िए हमारी इस महापड़ताल में कैसे एक गुप्त सूचना ने खोल दी रहमगंज के उस रहस्यमयी नेटवर्क की परतें, जिसके साए ने पूरे शहर को भय, आशंका और सवालों के भंवर में धकेल दिया....
दरभंगा शहर के हृदयस्थल माने जाने वाले लहेरियासराय थाना क्षेत्र के नाका नंबर-06 रहमगंज की तंग गलियों में गुरुवार की शाम जो कुछ हुआ, उसने न केवल स्थानीय प्रशासनिक तंत्र को बल्कि पूरे शहर को गहरे सवालों के भंवर में धकेल दिया है। पुलिस की मानें तो एक साधारण आवासीय परिसर के भीतर कथित तौर पर ऐसा कारोबार संचालित हो रहा था, जिसकी जड़ें सीधे युवाओं की नसों तक पहुंच रही थीं और जिसकी कमाई का अनुमान उस वक्त सामने आया जब छापेमारी के दौरान लाखों रुपये नकद बरामद हुए।दरभंगा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार लहेरियासराय थाना क्षेत्र स्थित नाका नंबर-06 मंदिर के पीछे एक घर से प्रतिबंधित नशीली दवा, लगभग पच्चीस लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी सिस्टम बरामद किए गए हैं. पढ़े पूरी रिपोर्ट.....
दरभंगा। दरभंगा शहर के हृदयस्थल माने जाने वाले लहेरियासराय थाना क्षेत्र के नाका नंबर-06 रहमगंज की तंग गलियों में गुरुवार की शाम जो कुछ हुआ, उसने न केवल स्थानीय प्रशासनिक तंत्र को बल्कि पूरे शहर को गहरे सवालों के भंवर में धकेल दिया है। पुलिस की मानें तो एक साधारण आवासीय परिसर के भीतर कथित तौर पर ऐसा कारोबार संचालित हो रहा था, जिसकी जड़ें सीधे युवाओं की नसों तक पहुंच रही थीं और जिसकी कमाई का अनुमान उस वक्त सामने आया जब छापेमारी के दौरान लाखों रुपये नकद बरामद हुए।दरभंगा पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार लहेरियासराय थाना क्षेत्र स्थित नाका नंबर-06 मंदिर के पीछे एक घर से प्रतिबंधित नशीली दवा, लगभग पच्चीस लाख रुपये नकद, मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी सिस्टम बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इस मामले में गौरीशंकर चौधरी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

एक गुप्त सूचना और फिर शुरू हुआ अभियान: पुलिस के अनुसार 29 मई 2026 की शाम लगभग पांच बजे लहेरियासराय थानाध्यक्ष को एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई। सूचना में आरोप लगाया गया कि नाका नंबर-06 मंदिर के पीछे रहने वाला एक व्यक्ति अपने घर से प्रतिबंधित दवा और नशीले पदार्थों की बिक्री करता है तथा इसके कारण आसपास के अनेक युवक नशे की गिरफ्त में जा रहे हैं। सूचना जितनी गंभीर थी, उसके निहितार्थ उससे कहीं अधिक भयावह बताए जा रहे हैं। क्योंकि यदि पुलिस के दावे सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी का मामला नहीं बल्कि शहर के युवाओं को धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले कथित तंत्र का संकेत माना जा सकता है। गुप्त सूचना प्राप्त होने के बाद पुलिस ने इसे सामान्य सूचना मानकर नजरअंदाज नहीं किया। लहेरियासराय थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एक संयुक्त छापेमारी दल गठित किया गया। इस दल में पुलिस अधिकारियों के साथ तकनीकी शाखा, बेंता थाना, कोतवाली थाना तथा अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया।

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ऑडियो-वीडियोग्राफी के बीच हुई तलाशी: पुलिस का दावा है कि छापेमारी पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई, औषधि निरीक्षक को सूचना दी गई तथा पूरे अभियान की ऑडियो और वीडियोग्राफी भी कराई गई। करीब शाम के 5:15 बजे पुलिस टीम जब नाका नंबर-06 रहमगंज स्थित घर पहुंची तो वहां विधिवत तलाशी शुरू की गई। इसके बाद जो कुछ सामने आया, उसने जांच टीम को भी चौंका दिया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार तलाशी के दौरान घर के भीतर रखी एक टेबल के नीचे से कोडीन फॉस्फेट एवं ट्राइप्रोलिडीन हाइड्रोक्लोराइड युक्त 43 बोतल सिरप बरामद किए गए। बरामद सिरप की कुल मात्रा 4.3 लीटर बताई गई है.... विशेषज्ञों के अनुसार कोडीन युक्त दवाओं का दुरुपयोग लंबे समय से देश के कई हिस्सों में चिंता का विषय रहा है। चिकित्सकीय उपयोग के लिए निर्धारित ऐसी दवाओं का अवैध इस्तेमाल नशे के रूप में किए जाने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि बरामद सिरप का उपयोग अवैध नशीले पदार्थ के रूप में किया जा रहा था, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर आघात माना जाएगा।

नकदी का पहाड़: गिनते-गिनते थक गई टीम: लेकिन इस छापेमारी का सबसे सनसनीखेज पहलू वह नकदी रही जिसकी बरामदगी ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया। पुलिस के अनुसार: 500 रुपये के 3550 नोट – कुल 17,75,000 रुपये। 100 रुपये के 3880 नोट – कुल 3,88,000 रुपये। 200 रुपये के 1673 नोट – कुल 3,34,600 रुपये। लगभग पच्चीस लाख रुपये की नकदी किसी भी जांच एजेंसी के लिए स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती है। आखिर इतनी बड़ी राशि कहां से आई? इसका स्रोत क्या है? क्या यह वास्तव में किसी कथित अवैध कारोबार की कमाई है या इसके पीछे कोई अन्य आर्थिक गतिविधि मौजूद है? इन सभी प्रश्नों के उत्तर अब जांच पर निर्भर करेंगे।

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मोबाइल फोन और सीसीटीवी सिस्टम भी जब्त: छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो मोबाइल फोन और घर में लगा सीसीटीवी डीवीआर सिस्टम भी जब्त किया है। जांच एजेंसियां आमतौर पर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को महत्वपूर्ण साक्ष्य मानती हैं क्योंकि इनमें कॉल डिटेल, संपर्क सूत्र, लेन-देन संबंधी जानकारी अथवा अन्य डिजिटल सुराग मिलने की संभावना रहती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं। पुलिस प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गिरफ्तार व्यक्ति ने पूछताछ के दौरान कथित रूप से स्वीकार किया कि वह प्रतिबंधित दवा की बिक्री करता था और बरामद नकदी उसी बिक्री से प्राप्त हुई है। पुलिस का यह भी दावा है कि आरोपी ने एक अन्य व्यक्ति का नाम लिया है, जो कथित तौर पर मोटरसाइकिल से उक्त सामग्री पहुंचाता था। हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पूछताछ में कही गई बातें अभी जांच का हिस्सा हैं और न्यायालय में प्रमाणित होना शेष है।

दरभंगा के युवाओं पर मंडराता नशे का साया: यह मामला केवल एक गिरफ्तारी भर नहीं है। यह उस बड़ी सामाजिक चुनौती की ओर भी संकेत करता है जिससे देश के अनेक शहर जूझ रहे हैं। नशे का फैलता जाल केवल अपराध नहीं बढ़ाता बल्कि परिवारों को तोड़ता है, युवाओं की ऊर्जा को नष्ट करता है, शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करता है और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करता है। यदि पुलिस के आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला इस बात का गंभीर उदाहरण बन सकता है कि किस प्रकार एक आवासीय इलाके में कथित रूप से ऐसा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है जो युवाओं को नशे की ओर धकेलने का खतरा पैदा करता है। लहेरियासराय थाना कांड संख्या 297/26 दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब बरामद नकदी, मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और कथित सप्लाई चेन की जांच कर रही है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या यह केवल एक व्यक्ति तक सीमित मामला है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है.... क्या बरामद नकदी वास्तव में अवैध कारोबार की कमाई है। क्या अन्य लोग भी जांच के दायरे में आएंगे? क्या शहर में ऐसे और ठिकाने मौजूद हैं। इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होंगे। फिलहाल इतना तय है कि नाका नंबर-06 की शांत दिखाई देने वाली गलियों से निकली इस कार्रवाई ने दरभंगा को एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक चुनौती है। पुलिस की इस कार्रवाई ने एक गंभीर चेतावनी भी दी है कि यदि कहीं भी युवाओं के भविष्य को कथित तौर पर नशे के अंधकार में धकेलने की कोशिश होगी, तो कानून की निगाहें वहां तक पहुंच सकती हैं।
