रामबाग की ऐतिहासिक धरती पर फिर गूँजी शास्त्रीय नृत्य की गंभीर पदचाप, सृष्टि फाउंडेशन के प्रयास से ओडिसी नृत्य कार्यशाला का भव्य शुभारंभ, कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय, ओडिशा से पधारे गुरु संचिकांत प्रधान सहित कई कला संरक्षकों की उपस्थिति में जली दीपशिखा, अगले सप्ताह दर्जनों कलाकारों की विशाल प्रस्तुति की घोषणा....रामबाग से उठी सांस्कृतिक चेतना की पुकार ने शहर को फिर याद दिलाया अपनी परंपरा, अपनी पहचान और अपनी विरासत को बचाने की अनिवार्य जिम्मेदारी.....

दरभंगा शहर के ऐतिहासिक रामबाग परिसर में शनिवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहाँ वातावरण में केवल शब्द नहीं, बल्कि संस्कृति की सुगंध घुली हुई थी। वर्षों से राजदरभंगा की सांस्कृतिक स्मृतियों को सँजोए हुए रामबाग एक बार फिर कला-साधना का केंद्र बन गया, जब सृष्टि फाउंडेशन के तत्वावधान में दरभंगा नृत्य उत्सव के अंतर्गत ओडिसी नृत्य की विशेष कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ.... पढ़े पूरी खबर....

रामबाग की ऐतिहासिक धरती पर फिर गूँजी शास्त्रीय नृत्य की गंभीर पदचाप, सृष्टि फाउंडेशन के प्रयास से ओडिसी नृत्य कार्यशाला का भव्य शुभारंभ, कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय, ओडिशा से पधारे गुरु संचिकांत प्रधान सहित कई कला संरक्षकों की उपस्थिति में जली दीपशिखा, अगले सप्ताह दर्जनों कलाकारों की विशाल प्रस्तुति की घोषणा....रामबाग से उठी सांस्कृतिक चेतना की पुकार ने शहर को फिर याद दिलाया अपनी परंपरा, अपनी पहचान और अपनी विरासत को बचाने की अनिवार्य जिम्मेदारी.....
रामबाग की सांस्कृतिक धरती पर फिर गूँजी नृत्य की पावन पदचाप....सृष्टि फाउंडेशन के प्रयास से दरभंगा नृत्य उत्सव में ओडिसी नृत्य कार्यशाला का आरंभ, रामबाग बना कला साधना का जीवंत मंच....

दरभंगा, 29 मार्च 2026 : दरभंगा शहर के ऐतिहासिक रामबाग परिसर में शनिवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहाँ वातावरण में केवल शब्द नहीं, बल्कि संस्कृति की सुगंध घुली हुई थी। वर्षों से राजदरभंगा की सांस्कृतिक स्मृतियों को सँजोए हुए रामबाग एक बार फिर कला-साधना का केंद्र बन गया, जब सृष्टि फाउंडेशन के तत्वावधान में दरभंगा नृत्य उत्सव के अंतर्गत ओडिसी नृत्य की विशेष कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ हुआ।

रामबाग की वही पावन भूमि, जिसने कभी राज दरभंगा के सांस्कृतिक वैभव को देखा था, रविवार को फिर से कलाकारों की ऊर्जा और ताल से जीवंत दिखाई दी। सृष्टि फाउंडेशन के सभागार में आयोजित इस उद्घाटन समारोह में कला, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय, ओडिशा से विशेष रूप से पधारे ओडिसी नृत्य के ख्यात गुरु संचिकांत प्रधान, कला संरक्षक दिलीप जाजोदिया तथा सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक गुरु जयप्रकाश पाठक ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला की औपचारिक शुरुआत की। दीप की लौ के साथ जैसे रामबाग की सांस्कृतिक चेतना भी आलोकित हो उठी।

उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की चेतना और संवेदना को सशक्त बनाने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और समाज में सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण ओडिसी नृत्य के गुरु संचिकांत प्रधान ने उपस्थित विद्यार्थियों और कलाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि शास्त्रीय नृत्य केवल अभ्यास नहीं, बल्कि एक साधना है। उन्होंने बताया कि आने वाले सप्ताह में संस्कृत विश्वविद्यालय के परिसर में एक भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में बच्चे और युवा कलाकार शास्त्रीय तथा लोक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियाँ देंगे।

उन्होंने कहा कि दरभंगा जैसी सांस्कृतिक धरती पर इस प्रकार की कार्यशाला आयोजित होना अपने आप में अत्यंत सुखद अनुभव है। यहाँ के बच्चों और युवाओं में कला के प्रति जो उत्साह दिखाई दे रहा है, वह भविष्य में एक नई सांस्कृतिक ऊर्जा का संकेत देता है। इस अवसर पर कला प्रेमी दिलीप जाजोदिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दरभंगा की पहचान केवल इतिहास और शिक्षा से ही नहीं, बल्कि इसकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि रामबाग जैसे ऐतिहासिक स्थल पर इस प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित होना इस क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना को और अधिक मजबूत बनाता है।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कला की परंपरा को जीवित रखने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के कंधों पर है। यदि युवा आगे आएँ और कला को अपनाएँ, तो दरभंगा की सांस्कृतिक धरोहर आने वाले समय में और भी सशक्त रूप में सामने आएगी। कार्यक्रम के दौरान सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक गुरु जयप्रकाश पाठक ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि दरभंगा की सांस्कृतिक विरासत को पुनः जीवंत करना है। उन्होंने कहा कि रामबाग की भूमि पर कला और संस्कृति की जो परंपरा कभी थी, उसे फिर से सशक्त करने का प्रयास सृष्टि फाउंडेशन लगातार कर रहा है।

उन्होंने बताया कि इस कार्यशाला में भाग लेने वाले छात्र-छात्राओं को ओडिसी नृत्य की बारीकियों से परिचित कराया जाएगा। साथ ही उन्हें मंच प्रस्तुति के लिए भी तैयार किया जाएगा ताकि वे अपने कला कौशल को बड़े मंच पर प्रस्तुत कर सकें। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने भी सृष्टि फाउंडेशन की पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल कलाकारों को मंच देते हैं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करते हैं।

रामबाग परिसर में आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ और कला प्रेमी मौजूद रहे। नृत्य की मुद्राओं और ताल के बीच बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। उनके चेहरे पर कला सीखने की जिज्ञासा और मंच पर प्रस्तुति देने का आत्मविश्वास स्पष्ट दिखाई दे रहा था। इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यदि प्रयास ईमानदार हो, तो सांस्कृतिक परंपराएँ कभी समाप्त नहीं होतीं। वे समय-समय पर नए रूप में सामने आती रहती हैं। दरभंगा के ऐतिहासिक रामबाग में आयोजित यह नृत्य कार्यशाला इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर सामने आई है, जिसने शहर के कलाकारों और युवाओं के भीतर नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया है।