पढ़िए पूरी रिपोर्ट- दरभंगा की धरती पर आस्था का महाकुंभ, अहल्या स्थान में 14वें अहल्या गौतम महोत्सव का भव्य आयोजन; जानिए कब होगा कार्यक्रम, कौन होंगे अतिथि और क्या है तीन दिनों का पूरा शेड्यूल.....

दरभंगा जिले की पावन धरती, जहां मिथिला की संस्कृति सांस लेती है, एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षणों की साक्षी बनने जा रही है। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के तत्वावधान में 14वां अहल्या गौतम महोत्सव का भव्य आयोजन 09, 10 और 11 जनवरी 2026 को अहल्या स्थान, नगर पंचायत-कमतौल, प्रखंड-जाले, जिला-दरभंगा में किया जा रहा है। यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी उस कथा को जीवंत करने का प्रयास है, जिसने नारी सम्मान, तपस्या और मोक्ष की अवधारणा को भारतीय संस्कृति में अमर बना दिया. पढ़े पूरी रिपोर्ट.......

पढ़िए पूरी रिपोर्ट- दरभंगा की धरती पर आस्था का महाकुंभ, अहल्या स्थान में 14वें अहल्या गौतम महोत्सव का भव्य आयोजन; जानिए कब होगा कार्यक्रम, कौन होंगे अतिथि और क्या है तीन दिनों का पूरा शेड्यूल.....
पढ़िए पूरी रिपोर्ट- दरभंगा की धरती पर आस्था का महाकुंभ, अहल्या स्थान में 14वें अहल्या गौतम महोत्सव का भव्य आयोजन; जानिए कब होगा कार्यक्रम, कौन होंगे अतिथि और क्या है तीन दिनों का पूरा शेड्यूल.....

दरभंगा जिले की पावन धरती, जहां मिथिला की संस्कृति सांस लेती है, एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षणों की साक्षी बनने जा रही है। बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के तत्वावधान में 14वां अहल्या गौतम महोत्सव का भव्य आयोजन 09, 10 और 11 जनवरी 2026 को अहल्या स्थान, नगर पंचायत-कमतौल, प्रखंड-जाले, जिला-दरभंगा में किया जा रहा है। यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी उस कथा को जीवंत करने का प्रयास है, जिसने नारी सम्मान, तपस्या और मोक्ष की अवधारणा को भारतीय संस्कृति में अमर बना दिया।

अहल्या प्रसंग को जीवंत करने का प्रयास: इस महोत्सव का उद्देश्य महज मनोरंजन नहीं, बल्कि लाखों वर्ष पूर्व घटित अहल्या-उद्धार प्रसंग को जनमानस तक जीवंत रूप में पहुंचाना है। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि कैसे ऋषि गौतम की पत्नी अहल्या ने अपने तप और धैर्य से मोक्ष प्राप्त किया और प्रभु श्रीराम के चरण स्पर्श से शिला से नारी बनीं। अहल्या स्थान पर गौतम कुंड की पवित्रता, वहां की कला यात्रा और सांस्कृतिक विरासत इस महोत्सव का मूल केंद्र होगी ।

राज्य स्तरीय कलाकारों की प्रस्तुति: महोत्सव के तीनों दिन राज्य स्तरीय ख्यातिप्राप्त कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। लोक कला, शास्त्रीय संगीत, भजन, नृत्य और मिथिला की परंपरागत सांस्कृतिक छटा दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराएगी। आयोजकों का दावा है कि यह आयोजन मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पटल पर और मजबूती देगा।

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कौन होंगे मुख्य अतिथि: महोत्सव के तीनों दिनों में अलग-अलग मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी: 09 जनवरी 2026 (शुक्रवार) मुख्य अतिथि: अरुण शंकर प्रसाद, मंत्री, पर्यटन विभाग, बिहार सरकार

10 जनवरी 2026 (शनिवार)

मुख्य अतिथि: मदन सहनी, मंत्री, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार

11 जनवरी 2026 (रविवार)

मुख्य अतिथि: संजय सरावगी, विधायक, 83-दरभंगा, इसके अलावा दरभंगा जिले के सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, नगर निकाय प्रतिनिधि और कई विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे ।

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कार्यक्रम का विस्तृत विवरण: 09 जनवरी 2026 (शुक्रवार) सुबह 09 बजे – अहल्या पूजा, सुबह 10 बजे भव्य कला शोभा यात्रा, दिन 03 से 04 बजे– बजरंग म्यूजिकल ग्रुप की प्रस्तुति, शाम 04 बजे – अतिथियों का आगमन, शाम 04 से 04:55 – अतिथियों का उद्घाटन, शाम 04:55 से 05:15 – विविध मिथिला के रसमंजन, रात्रि 05:15 से 09:00 – कुंज बिहारी मिश्र, अमर आनंद एवं अन्य कलाकारों की प्रस्तुति, 10 जनवरी 2026 (शनिवार) दोपहर 03 से 04 बजे– बजरंग म्यूजिकल ग्रुप की प्रस्तुति, शाम 04 से 05 बजे– अतिथियों का आगमन, शाम 04 से 05 बजे– अतिथियों का उद्घाटन, शाम 05 से रात्रि 09 बजे – कुमार सत्यम, रामबाबू झा एवं अन्य कलाकारों की प्रस्तुति, 11 जनवरी 2026 (रविवार)दिन 10 बजे– प्रतिभा सम्मान समारोह, दिन 03 से 04 बजे – बजरंग म्यूजिकल ग्रुप की प्रस्तुति, शाम 04 बजे – कलाकारों का आगमन, शाम 04 से 05 बजे– अतिथियों का उद्घाटन, शाम 05 से 05:30– अहल्या आरती (काशी के पंडितों द्वारा) रात्रि 05:30 से 09:00– जाली मुजरी, माधव राय एवं अन्य कलाकारों की प्रस्तुति।

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जिला प्रशासन की सीधी निगरानी: इस पूरे आयोजन का संचालन जिला प्रशासन, दरभंगा के संरक्षण में किया जा रहा है। आमंत्रण-पत्र के अनुसार जिला पदाधिकारी कोशल कुमार (भा.प्र.से.) द्वारा सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता से इस ऐतिहासिक अवसर पर उपस्थित रहने का आग्रह किया गया है।

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मिथिला की अस्मिता का उत्सव: अहल्या गौतम महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मिथिला की अस्मिता, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा और अहल्या स्थान को एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।