10 साल पुराने चुनावी मामले में अचानक क्यों गूंजा कोर्ट परिसर? सांसद पप्पू यादव की पेशी के बाद बढ़ा सस्पेंस, अब 10 जुलाई को क्या होने वाला है, किस मोड़ पर पहुंचा आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला और क्यों टिकी है सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर... जानिए पूरी रिपोर्ट।

बिहार की राजनीति में अक्सर ऐसे घटनाक्रम सामने आते हैं, जो वर्षों पुराने मामलों को एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा करते हैं। शुक्रवार को दरभंगा स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राकेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय पहुंचे। उनके साथ वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे चंद्रकांत सिंह भी अदालत में उपस्थित हुए।यह मामला लगभग एक दशक पुराना है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब भी विचाराधीन है. पढ़े पूरी रिपोर्ट...

10 साल पुराने चुनावी मामले में अचानक क्यों गूंजा कोर्ट परिसर? सांसद पप्पू यादव की पेशी के बाद बढ़ा सस्पेंस, अब 10 जुलाई को क्या होने वाला है, किस मोड़ पर पहुंचा आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला और क्यों टिकी है सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर... जानिए पूरी रिपोर्ट।
10 साल पुराने चुनावी मामले में अचानक क्यों गूंजा कोर्ट परिसर? सांसद पप्पू यादव की पेशी के बाद बढ़ा सस्पेंस, अब 10 जुलाई को क्या होने वाला है, किस मोड़ पर पहुंचा आदर्श आचार संहिता उल्लंघन का मामला और क्यों टिकी है सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई पर... जानिए पूरी रिपोर्ट।

दरभंगा। बिहार की राजनीति में अक्सर ऐसे घटनाक्रम सामने आते हैं, जो वर्षों पुराने मामलों को एक बार फिर सुर्खियों में ला खड़ा करते हैं। शुक्रवार को दरभंगा स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में ऐसा ही एक दृश्य देखने को मिला, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राकेश रंजन उर्फ पप्पू यादव अपने अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय पहुंचे। उनके साथ वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रहे चंद्रकांत सिंह भी अदालत में उपस्थित हुए।यह मामला लगभग एक दशक पुराना है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब भी विचाराधीन है। अदालत में दोनों की सशरीर उपस्थिति के बाद एक बार फिर इस प्रकरण की चर्चा राजनीतिक और कानूनी गलियारों में तेज हो गई है।

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क्या है पूरा मामला: यह मामला वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा आम चुनाव से जुड़ा है। आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित और स्वीकृत समय सीमा समाप्त होने के बावजूद हेलीकॉप्टर उतारा गया। इसके साथ ही बिना सक्षम अनुमति के दरभंगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में तत्कालीन प्रत्याशी चंद्रकांत सिंह के समर्थन में चुनावी सभा आयोजित की गई। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार के दौरान हेलीकॉप्टर की लैंडिंग, जनसभा और प्रचार कार्यक्रम के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। आरोप है कि इन नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई की।

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केवटी थाना में दर्ज हुई थी प्राथमिकी: घटना के बाद केवटी थाना कांड संख्या 124/15 दर्ज किया गया। प्राथमिकी में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन सहित संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद जांच और न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई, जो अब भी जारी है। शुक्रवार को दरभंगा के एमपी-एमएलए कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सांसद पप्पू यादव और चंद्रकांत सिंह पीठासीन पदाधिकारी पुष्पम किशोर की अदालत में सशरीर उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपनी बहस पूरी कर ली। अभियोजन ने उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों और अन्य तथ्यों के आधार पर अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा। इसके बाद अदालत ने बचाव पक्ष को अपनी दलीलें प्रस्तुत करने का अवसर देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 10 जुलाई निर्धारित की।

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अब 10 जुलाई को क्या होगा: अगली तारीख इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उस दिन बचाव पक्ष अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखेगा। बचाव पक्ष अभियोजन के आरोपों पर अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा और उपलब्ध साक्ष्यों की कानूनी व्याख्या करेगा। इसके बाद न्यायालय आगे की प्रक्रिया तय करेगा। हालांकि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मामले में अंतिम निर्णय कब आएगा। सांसद पप्पू यादव के न्यायालय पहुंचने की सूचना मिलते ही अदालत परिसर में राजनीतिक कार्यकर्ताओं, अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों की गतिविधियां बढ़ गईं। सुरक्षा व्यवस्था भी सामान्य से अधिक सतर्क दिखाई दी। सुनवाई पूरी होने के बाद पप्पू यादव अपने अधिवक्ताओं के साथ न्यायालय परिसर से रवाना हो गए।आदर्श आचार संहिता चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और समान अवसर वाला बनाए रखने के लिए लागू की जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार नियमों का उल्लंघन कर अनुचित लाभ प्राप्त न कर सके। चुनाव प्रचार, जनसभा, हेलीकॉप्टर के उपयोग, सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन के संबंध में निर्वाचन आयोग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करता है। इनका उल्लंघन होने पर संबंधित प्राधिकारियों द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजर: करीब दस वर्ष पुराने इस मामले में अब न्यायिक प्रक्रिया अंतिम चरणों की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। अभियोजन पक्ष अपनी दलील पूरी कर चुका है और अब बचाव पक्ष की बहस बाकी है। ऐसे में 10 जुलाई की सुनवाई को इस मामले का अहम पड़ाव माना जा रहा है।फिलहाल अदालत ने किसी भी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। मामले की सुनवाई जारी है और अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों, कानूनी दलीलों और लागू कानूनों के आधार पर ही लिया जाएगा। अब राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों की निगाहें भी 10 जुलाई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब बचाव पक्ष अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेगा और इस चर्चित चुनावी मामले की सुनवाई एक नए चरण में प्रवेश करेगी।