लाल ईंटों की ऐतिहासिक प्राचीरों के बीच ज्ञान का महायज्ञ, रामबाग में 11वें वर्ष भी अखंड जला सरस्वती साधना का दीप..... फाउंडेशन ऑफ मैथमेटिक्स में भवेश कुमार चौधरी के नेतृत्व में शिक्षा, शालीनता और संस्कार का भव्य उत्सव....
लाल ईंटों से बनी ऊँची, इतिहास को अपने भीतर समेटे रामबाग की प्राचीरें जब साक्षी बनती हैं, तो दृश्य साधारण नहीं रहता.....वह दृश्य इतिहास, परंपरा और भविष्य के निर्माण का बन जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य सोमवार को रामबाग परिसर में देखने को मिला, जहाँ फाउंडेशन ऑफ मैथमेटिक्स के तत्वावधान में सरस्वती पूजा का भव्य, गरिमामय और भावपूर्ण आयोजन किया गया. पढ़े पूरी खबर......
दरभंगा। लाल ईंटों से बनी ऊँची, इतिहास को अपने भीतर समेटे रामबाग की प्राचीरें जब साक्षी बनती हैं, तो दृश्य साधारण नहीं रहता.....वह दृश्य इतिहास, परंपरा और भविष्य के निर्माण का बन जाता है। कुछ ऐसा ही दृश्य सोमवार को रामबाग परिसर में देखने को मिला, जहाँ फाउंडेशन ऑफ मैथमेटिक्स के तत्वावधान में सरस्वती पूजा का भव्य, गरिमामय और भावपूर्ण आयोजन किया गया।

यह कोई एक दिन का आयोजन भर नहीं था, बल्कि 2017 से निरंतर चल रही उस शिक्षा-साधना की जीवंत झलक थी, जिसके केंद्र में हैं संस्थान के निदेशक भवेश कुमार चौधरी....... एक ऐसे शिक्षक, जिनकी पहचान केवल गणित पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कार गढ़ने, अनुशासन सिखाने और जीवन की गणना समझाने तक फैली हुई है।

11 वर्षों से ज्ञान की अखंड ज्योति: रामबाग की उसी मिट्टी में, जहाँ कभी इतिहास की गूंज थी, आज अंकों, सूत्रों और तर्कों की साधना हो रही है। फाउंडेशन ऑफ मैथमेटिक्स ने इस वर्ष अपने 11वें वर्ष में प्रवेश किया और उसी के साथ माँ सरस्वती की पूजा को एक शैक्षणिक उत्सव का रूप दिया। दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्र, छोटे-छोटे सपनों को आँखों में बसाए, यहाँ केवल कोचिंग लेने नहीं आते...... वे यहाँ अनुशासन, शालीनता और लक्ष्य की दिशा सीखते हैं। यही कारण है कि जैसे संस्थान के निदेशक भवेश कुमार चौधरी स्वयं अत्यंत शालीन, सौम्य और मर्यादित हैं, वैसी ही झलक उनके विद्यार्थियों के आचरण में भी दिखाई देती है।

दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुआ ज्ञानोत्सव: सरस्वती पूजा के अवसर पर संस्थान परिसर को रंगीन झालरों, पुष्प-सज्जा और सांस्कृतिक आभा से सुसज्जित किया गया। माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष जब दीप प्रज्वलित हुआ, तो वातावरण केवल प्रकाश से नहीं, बल्कि श्रद्धा और संस्कार की ऊर्जा से भर उठा। दीप प्रज्वलन का सौभाग्य प्राप्त हुआ...... डॉ. बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’, महासचिव, विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगा, डॉ. मनोहर कुमार पाठक, सचिव, सृष्टि फाउंडेशन, रामबाग, बालेन्दु झा ‘बालाजी’, अध्यक्ष, दरभंगा भाजपा युवा मोर्चा, एवं संस्थान के निदेशक भवेश कुमार चौधरी...... इन सभी गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को बौद्धिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की।

जहाँ गणित भी संस्कार सिखाता है: कभी रामबाग स्थित सृष्टि डांस एकेडमी के एक मंज़िल पर शुरू हुआ यह कोचिंग संस्थान, आज पिछले पाँच वर्षों से स्वतंत्र परिसर में संचालित हो रहा है। यह स्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संयम, समयबद्धता और समर्पण की पाठशाला बन चुका है। यहाँ गणित के सवाल हल होते हैं, लेकिन साथ-साथ जीवन के समीकरण भी समझाए जाते हैं। शायद यही वजह है कि फाउंडेशन ऑफ मैथमेटिक्स को केवल एक कोचिंग नहीं, बल्कि रामबाग की शैक्षणिक पहचान माना जाने लगा है।

सरस्वती पूजा नहीं, एक सांस्कृतिक संकल्प: पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं थी, बल्कि शिक्षा को उत्सव मानने की परंपरा का जीवंत उदाहरण थी। माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष झुके सिर, दीपों की लौ, बच्चों की चमकती आँखें और शिक्षकों की संतुलित मुस्कान..... इन सबने मिलकर यह संदेश दिया कि जब शिक्षा में श्रद्धा जुड़ती है, तब समाज का भविष्य उज्ज्वल होता है।

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रामबाग की मिट्टी में अंकुरित हो रहा भविष्य: रामबाग की लाल ईंटों के बीच, माँ सरस्वती की कृपा और शिक्षकों की तपस्या से, फाउंडेशन ऑफ मैथमेटिक्स आज न केवल छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि उन्हें जीवन की बड़ी गणनाओं के लिए भी सक्षम बना रहा है।यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए एक संदेश है..... जहाँ शिक्षा शालीन हो, शिक्षक समर्पित हों और विद्यार्थी संस्कारित हों, वहाँ सरस्वती स्वयं विराजमान होती हैं।
