अगर आपके भी दोस्त हैं तो इस खबर को अनदेखा मत कीजिए दरभंगा में नए साल के जश्न के पीछे छिपी वह डरावनी कहानी, जहाँ जाम उठाने वाले हाथों ने ही गला घोंट दिया… पूरी भयावह रिपोर्ट पढ़िए.....

दरभंगा की ठंडी रातों ने बहुत कुछ देखा है, लेकिन 1 जनवरी की वह रात शहर के इतिहास में एक ऐसी काली इबारत बनकर दर्ज हो गई, जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है। नए साल के जश्न की खुशबू अभी हवा में घुली ही थी कि उसी अंधेरे में दो नौजवानों की सांसें छीन ली गईं, और दोस्ती का नाम लेकर बैठे लोग जल्लाद बन गए। यह कोई सामान्य हत्या नहीं थी। यह विश्वास की हत्या, दोस्ती का कत्ल, और इंसानियत को ज़िंदा दफन करने की साजिश थी. पढ़े पूरी कहानी.....

अगर आपके भी दोस्त हैं तो इस खबर को अनदेखा मत कीजिए दरभंगा में नए साल के जश्न के पीछे छिपी वह डरावनी कहानी, जहाँ जाम उठाने वाले हाथों ने ही गला घोंट दिया… पूरी भयावह रिपोर्ट पढ़िए.....
अगर आपके भी दोस्त हैं तो इस खबर को अनदेखा मत कीजिए दरभंगा में नए साल के जश्न के पीछे छिपी वह डरावनी कहानी, जहाँ जाम उठाने वाले हाथों ने ही गला घोंट दिया… पूरी भयावह रिपोर्ट पढ़िए.....

दरभंगा की ठंडी रातों ने बहुत कुछ देखा है, लेकिन 1 जनवरी की वह रात शहर के इतिहास में एक ऐसी काली इबारत बनकर दर्ज हो गई, जिसे याद कर आज भी रूह कांप जाती है। नए साल के जश्न की खुशबू अभी हवा में घुली ही थी कि उसी अंधेरे में दो नौजवानों की सांसें छीन ली गईं, और दोस्ती का नाम लेकर बैठे लोग जल्लाद बन गए। यह कोई सामान्य हत्या नहीं थी। यह विश्वास की हत्या, दोस्ती का कत्ल, और इंसानियत को ज़िंदा दफन करने की साजिश थी।

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दो दोस्त, एक रात और मौत का बुलावा: मन्ना महतो और बादल कुमार। दो नाम, दो चेहरे, और दो परिवारों की दुनिया। 1 जनवरी की दोपहर बादल कुमार ने अपनी मां से बात की थी। आवाज़ में कोई डर नहीं, कोई आशंका नहीं। उसने कहा था मां, मन्ना के साथ भैरवपट्टी जा रहा हूं… दोस्तों के साथ नया साल मनाकर लौट आऊंगा। मां ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि यह उसके इकलौते बेटे की आखिरी आवाज़ है। शाम ढली, रात बढ़ी। फोन किया गया बादल ने कहा, आज देर हो जाएगी… ठंड ज्यादा है, हो सके तो आज लौट आएंगे, नहीं तो सुबह। मां-बाप निश्चिंत हो गए। लेकिन रात 12 बजे के बाद, फोन की घंटी बजती रही… और फिर स्विच ऑफ।

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रिंग तो हो रही थी, पर ज़िंदगी जवाब नहीं दे रही थी: 2 जनवरी की सुबह। फोन लग रहा था, लेकिन कोई उठा नहीं रहा था। बहन रो रही थी भैया फोन नहीं उठा रहे… पापा घबरा गए हैं। परिजनों ने तलाश शुरू की। खबर मिली बादल, मन्ना और कुछ अन्य दोस्त भैरवपट्टी में पार्टी कर रहे थे। इधर चिंता बढ़ती गई, उधर अंधेरे में साजिशें पनप चुकी थीं।

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एक बाइक… और बढ़ता हुआ खौफ: खोजबीन के दौरान आमस–दरभंगा एक्सप्रेसवे निर्माण स्थल के पास, बीएनपी-13 के समीप बादल की बाइक गिरी मिली।बाइक की हालत देख कर दिल दहल उठा। आसपास खेत, जंगल, सन्नाटा… पर बादल नहीं था। यहीं से यह मामला गुमशुदगी नहीं, खूनी रहस्य बन चुका था। इसी दौरान छोटू कुमार और ऋतिक कुमार की ओर से लगातार धमकी भरे फोन आने लगे ज्यादा खोजबीन करोगे तो मारपीट होगी। धमकियां… और कुछ ही देर बाद

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पहला शव: गेहूं के खेत में पड़ी दोस्ती की लाश: 3 जनवरी। बहादुरपुर थाना क्षेत्र। बीएमपी के पास एक्सप्रेसवे किनारे गेहूं के खेत में मन्ना महतो का शव मिला। शरीर पर जख्म, चेहरा पहचान से बाहर। खेत में पड़ा वह शव जैसे चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा था दोस्ती के नाम पर मुझे मार डाला गया। पूरा इलाका सन्न रह गया।

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दूसरा शव: ज़मीन के भीतर दफन की गई सच्चाई: आज जो हुआ, वह और भी भयावह था। सदर थाना क्षेत्र के भेलूचक गांव के आम के बगीचे में पुलिस ने जमीन खुदवाई। कुछ फीट नीचे बादल कुमार का शव। हाथ-पैर बंधे हुए। ऊपर से मिट्टी डालकर ज़िंदा इंसान को मिटाने की कोशिश। यह सिर्फ हत्या नहीं थी, यह सबूत मिटाने की क्रूर साजिश थी।

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इकलौता बेटा… अब घर सूना है: बादल अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। दो बहनें हैं। अब घर में बेटे की हंसी नहीं, उसकी आवाज़ नहीं, सिर्फ़ सिसकियां हैं। चचेरे भाई गुड्डू कुमार की आवाज़ भर्रा गई अगर कोई विवाद था तो बताया जा सकता था… मारा-पीटा जा सकता था…लेकिन किसी की जान लेना? हमारे मां-बाप अब किसके सहारे जिएंगे?

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आठ दोस्त… आठ हत्यारे: सदर एसडीपीओ राजीव कुमार ने खुलासा किया प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पार्टी के दौरान विवाद बढ़ा। इसी विवाद में आठ दोस्तों ने मिलकर दोनों युवकों की हत्या कर दी। मुख्य आरोपी अनिल कुमार का बेटा छोटू कुमार, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। उसी की निशानदेही पर बादल का शव जमीन से बाहर निकाला गया। पुलिस के अनुसार किसी भारी वस्तु से हमला और गला दबाकर हत्या की आशंका हालांकि अंतिम सच पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच से सामने आएगा। एफएसएल और डॉग स्क्वायड की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। हर मिट्टी के कण से सच निचोड़ने की कोशिश जारी है।

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पास-पड़ोस के लोग ही बने जल्लाद: इस हत्याकांड की सबसे डरावनी सच्चाई सभी आरोपी आपस में परिचित हैं सभी के घर आसपास ही हैं मतलब जिस गली में साथ खेले, उसी गली में खून बहाया गया। शराब तस्करी से जुड़े विवाद की भी आशंका है, जिस पर पुलिस ने पूरी तरह इनकार नहीं किया है। दो शव। एक खेत में पड़ा। दूसरा मिट्टी में दबा। नया साल खुशियां नहीं, लाशें लेकर आया। दरभंगा आज पूछ रहा है क्या दोस्ती इतनी सस्ती हो गई है? क्या जश्न अब हत्या की वजह बनेंगे? और कब तक युवा, शराब और गुस्से में एक-दूसरे की कब्र खोदते रहेंगे? फिलहाल पुलिस की छापेमारी जारी है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है। लेकिन सवाल वही है दो परिवारों के उजड़े आंगन कौन लौटाएगा?