मैट्रिक की दहलीज पर बुझा एक चिराग: दरभंगा के मुर्तुजापुर में कुएं से मिले 16 वर्षीय वरुण पासवान के शव ने खड़े किए सवाल हत्या की आशंका, पुलिस की भूमिका पर उठी उंगलियां और मां की चीखों में डूबा एक पूरा गांव....

नववर्ष की दस्तक से ठीक पहले जिस घर में किताबों की सरसराहट, परीक्षा की तैयारी और भविष्य के सपनों की हल्की-सी चमक थी, आज उसी आंगन में मातम पसरा है। दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत मुर्तुजापुर गांव में रविवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे मिथिला अंचल को भीतर तक झकझोर कर रख दिया। गांव के एक कुएं से 16 वर्षीय किशोर वरुण पासवान का शव बरामद हुआ वही वरुण, जो कुछ ही महीनों बाद मैट्रिक की परीक्षा देने वाला था, और जिसे उसके माता-पिता एक बेहतर भविष्य की उम्मीद में हर दिन काम पर जाते थे. पढ़े पूरी खबर.......

मैट्रिक की दहलीज पर बुझा एक चिराग: दरभंगा के मुर्तुजापुर में कुएं से मिले 16 वर्षीय वरुण पासवान के शव ने खड़े किए सवाल हत्या की आशंका, पुलिस की भूमिका पर उठी उंगलियां और मां की चीखों में डूबा एक पूरा गांव....
मैट्रिक की दहलीज पर बुझा एक चिराग: दरभंगा के मुर्तुजापुर में कुएं से मिले 16 वर्षीय वरुण पासवान के शव ने खड़े किए सवाल हत्या की आशंका, पुलिस की भूमिका पर उठी उंगलियां और मां की चीखों में डूबा एक पूरा गांव....

दरभंगा (बिहार)। नववर्ष की दस्तक से ठीक पहले जिस घर में किताबों की सरसराहट, परीक्षा की तैयारी और भविष्य के सपनों की हल्की-सी चमक थी, आज उसी आंगन में मातम पसरा है। दरभंगा जिले के बहेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत मुर्तुजापुर गांव में रविवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे मिथिला अंचल को भीतर तक झकझोर कर रख दिया। गांव के एक कुएं से 16 वर्षीय किशोर वरुण पासवान का शव बरामद हुआ वही वरुण, जो कुछ ही महीनों बाद मैट्रिक की परीक्षा देने वाला था, और जिसे उसके माता-पिता एक बेहतर भविष्य की उम्मीद में हर दिन काम पर जाते थे।

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कुएं से निकला शव, गांव में उतरा सन्नाटा: रविवार की सुबह जैसे ही यह सूचना फैली कि गांव के कुएं से एक किशोर का शव मिला है, देखते-देखते वहां लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस की मौजूदगी में शव को बाहर निकाला गया। मृतक की पहचान गांव के शंभू पासवान के पुत्र वरुण पासवान के रूप में हुई। शव को देखते ही गांव की गलियों में सन्नाटा पसर गया कोई विश्वास नहीं कर पा रहा था कि कल तक हंसता-बोलता, स्कूल जाने की तैयारी करने वाला किशोर आज निर्जीव देह में तब्दील हो चुका है। कुएं के ऊपर लोहे की ग्रिल लगी हुई है, हालांकि किनारे लगभग ढाई फीट की जगह खुली बताई जा रही है। यह कुआं वरुण के घर से महज तीन सौ फीट की दूरी पर स्थित है। यही तथ्य ग्रामीणों और परिजनों के मन में कई सवाल खड़े कर रहा है क्या यह महज एक दुर्घटना थी, या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है?

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30 दिसंबर की रात से लापता, 31 को प्राथमिकी, फिर भी… परिजनों के अनुसार वरुण 30 दिसंबर की रात से ही लापता था। जब काफी खोजबीन के बावजूद उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो उसके पिता ने 31 दिसंबर को बहेड़ा थाने में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई।प्राथमिकी में यह भी दर्ज था कि वरुण इस वर्ष मैट्रिक की परीक्षा देने वाला था और पढ़ाई को लेकर गंभीर था।परिजनों का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते गंभीरता से खोजबीन की जाती, तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।इसी बीच, पुलिस किसी नतीजे तक पहुंचती उससे पहले ही वरुण का शव कुएं से बरामद हो गया।

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हत्या की आशंका, परिवार का फूटा आक्रोश: शव मिलने के बाद परिजनों ने सीधे-सीधे हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि वरुण को मारकर शव को कुएं में ठिकाने लगाया गया है। परिवार और ग्रामीणों का सवाल है ग्रिल लगे कुएं में एक किशोर का यूं गिरना कितना स्वाभाविक है? घर के इतने पास स्थित कुएं तक वरुण कैसे पहुंचा, और किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी?अगर यह दुर्घटना नहीं, तो आखिर वह कौन-सी वजह थी, जिसने एक 16 वर्षीय बच्चे की जान ले ली? गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कोई इसे आपसी रंजिश से जोड़ रहा है, तो कोई इसे सोची-समझी साजिश मान रहा है। हालांकि सच्चाई क्या है, यह अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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एफएसएल और डॉग स्क्वायड मौके पर, लेकिन जवाब अब भी अधूरे: घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम पहुंची और साक्ष्य एकत्रित किए। डॉग स्क्वायड की टीम ने भी खोजी कुत्ते की मदद से सुराग तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी। सूचना मिलने पर ग्रामीण एसपी आलोक और बेनीपुर एसडीपीओ वासुकीनाथ झा भी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने आसपास के लोगों से पूछताछ की और पीड़ित परिवार से घटना की विस्तृत जानकारी ली। थानाध्यक्ष हरिद्वार शर्मा को सभी पहलुओं से जांच करने का निर्देश दिया गया है।

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पोस्टमार्टम के बाद भी नहीं थम रहा दर्द: पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल हर एंगल से जांच की जा रही है। लेकिन, कानून की यह प्रक्रिया उस मां के आंसू नहीं पोंछ पा रही, जिसने अपना बेटा खो दिया। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही वरुण का शव घर पहुंचा, मां रीता देवी दहाड़ मारकर रो पड़ीं। वह बार-बार अपने बेटे के निर्जीव शरीर से लिपटकर बेहोश हो जा रही थीं। बड़ी बहनें पूजा कुमारी और रूपा कुमारी, और छोटा भाई सूरज कुमार सबकी आंखों में एक ही सवाल था: “भैया अब वापस क्यों नहीं आएंगे?”

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गरीबी, मजदूरी और टूटा हुआ भविष्य: वरुण अपने माता-पिता के चार बच्चों में तीसरे नंबर पर था। उसके पिता गांव में मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। वरुण भी उन्हीं उम्मीदों का प्रतीक था एक ऐसा बच्चा, जो पढ़-लिखकर परिवार की हालत बदलना चाहता था। लेकिन, उसकी मौत ने न सिर्फ एक परिवार का सपना तोड़ा है, बल्कि समाज और व्यवस्था के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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सवाल जो अब जवाब मांगते हैं: इस घटना ने कई ऐसे सवाल छोड़ दिए हैं, जिनका जवाब केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट या एक केस डायरी से नहीं मिल सकता क्या गुमशुदगी की सूचना के बाद पुलिस की तत्परता पर्याप्त थी? क्या ग्रामीण इलाकों में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्था पूरी तरह संवेदनशील है? और सबसे बड़ा सवाल क्या वरुण को इंसाफ मिल पाएगा?

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एक मौत, जो सिर्फ आंकड़ा नहीं है: वरुण पासवान की मौत कोई सामान्य घटना नहीं है। यह उस व्यवस्था पर एक करारा सवाल है, जहां एक गरीब मजदूर का बेटा लापता होता है और समय रहते उसे बचाया नहीं जा पाता। यह रिपोर्ट सिर्फ एक शव मिलने की कहानी नहीं, बल्कि उस टूटे हुए भविष्य, बिखरे हुए सपनों और मां की कभी न थमने वाली सिसकियों की दास्तान है। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं क्योंकि अगर इस मौत के पीछे साजिश है, तो दोषियों को सजा मिलना न सिर्फ वरुण के परिवार, बल्कि पूरे समाज के भरोसे के लिए जरूरी है। वरुण अब लौटकर नहीं आएगा, लेकिन सच सामने आना चाहिए ताकि किसी और घर का चिराग यूं अंधेरे में न बुझे।