शाम ढलते ही जब सड़कें शिकारगाह बन गईं: कोआ गाछी की सुनसान राह पर 7:15 बजे कानून को ठेंगा दिखाते लुटेरों ने बाइक–मोबाइल–नकदी लूटकर दहशत फैलाई, खौफ से जमी जनता की सांसें, सवालों के घेरे में कानून-व्यवस्था, और पुलिस कार्रवाई के बीच इस भयावह क्राइम स्टोरी का हर सच पढ़िए। आशिष की कलम से.....
मिथिला की धरती, जो कभी शांति, संस्कार और सादगी के लिए जानी जाती थी, आज अपराध की काली छाया में सिसकती नज़र आ रही है। रात के अंधेरे में सड़कें अब सिर्फ़ रास्ता नहीं रहीं, बल्कि डर, सन्नाटा और अचानक मौत या लूट का न्योता बनती जा रही हैं।मनीगाछी थाना क्षेत्र अंतर्गत कोआ गाछी के पास हुई लूट की ताज़ा वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। यह घटना सिर्फ़ एक लूट नहीं, बल्कि कानून को खुली चुनौती, आम आदमी की सुरक्षा पर सीधा हमला और समाज के सीने में खंजर घोंपने जैसी है. पढ़े पूरी खबर......
दरभंगा। मिथिला की धरती, जो कभी शांति, संस्कार और सादगी के लिए जानी जाती थी, आज अपराध की काली छाया में सिसकती नज़र आ रही है। रात के अंधेरे में सड़कें अब सिर्फ़ रास्ता नहीं रहीं, बल्कि डर, सन्नाटा और अचानक मौत या लूट का न्योता बनती जा रही हैं।मनीगाछी थाना क्षेत्र अंतर्गत कोआ गाछी के पास हुई लूट की ताज़ा वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। यह घटना सिर्फ़ एक लूट नहीं, बल्कि कानून को खुली चुनौती, आम आदमी की सुरक्षा पर सीधा हमला और समाज के सीने में खंजर घोंपने जैसी है।

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दिनांक 18 जनवरी 2026, समय लगभग रात 7:15 बजे। सड़क पर अंधेरा उतर चुका था। कटमा से बधिया की ओर जाने वाली सुनसान सड़क, कोआ गाछी के पास अचानक अपराधियों की हिंसक हिम्मत का गवाह बन गई। अज्ञात अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से एक व्यक्ति को निशाना बनाया। स्टनर मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन और नकद रुपये..... सब कुछ पल भर में लूट लिया गया। सड़क पर रह गया तो सिर्फ़ खौफ, थरथराता बदन और यह सवाल.....अब कौन सुरक्षित है?

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घटना की सूचना मिलते ही मनीगाछी थाना में हड़कंप मच गया। थानाध्यक्ष को जैसे ही खबर मिली, पुलिस टीम बिना देर किए घटनास्थल पर पहुंची। सायरन की आवाज़, टॉर्च की रोशनी, और चारों तरफ़ फैला सन्नाटा.....जांच शुरू हो चुकी थी। घटनास्थल को सुरक्षित कर बारीकी से छानबीन की गई। पीड़ित के बयान ने इस लूट की भयावहता को और उजागर कर दिया। पीड़ित विजय कुमार, पिता ढोढाई सिंह, निवासी ग्राम नारायणपुर, थाना सकतेपुर, जिला दरभंगा...... जब पूर्वा जाने के क्रम में थे, तभी घात लगाए बैठे अपराधियों ने हमला कर दिया। यह कोई आकस्मिक वारदात नहीं थी, बल्कि पहले से रची गई साजिश थी। इसी आधार पर मनीगाछी थाना कांड संख्या 13/26, दिनांक 19.01.2026, धारा 309(4) BNS के तहत मामला दर्ज किया गया।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक, दरभंगा के निर्देश पर पुलिस महकमे ने पूरी ताकत झोंक दी। बेनीपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष SIT टीम गठित की गई। तकनीकी अनुसंधान, मोबाइल लोकेशन, मानवीय खुफिया तंत्र..... हर हथियार को इस्तेमाल में लाया गया। रातें जागकर, सुराग जोड़कर, पुलिस अपराधियों की सांसों तक पहुंच गई। और फिर हुआ खुलासा… तकनीकी जांच और सटीक रणनीति के आधार पर अजय कुमार मुखिया, उम्र लगभग 22 वर्ष, पिता रामफल मुखिया, निवासी ग्राम बधिया, थाना मनीगाछी, जिला दरभंगा को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया। एक ऐसा नाम, जो अब इलाके में डर की पहचान बन चुका था। इसके साथ ही इस संगठित अपराध में शामिल चार विधि विरुद्ध किशोरों को भी पुलिस ने निरुद्ध कर लिया।

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गिरफ्तारी के बाद जो सामने आया, वह और भी डरावना था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने लूट की गई दो मोटरसाइकिलें बरामद कीं: वादी की लूटी गई मोटरसाइकिल BR37AL1741, एक पैशन प्रो मोटरसाइकिल, जिस पर अंकित रजिस्ट्रेशन नंबर BR32C9631, एक अन्य संदिग्ध मोटरसाइकिल...... यह बरामदगी इस बात का सबूत थी कि यह गिरोह सिर्फ़ एक वारदात तक सीमित नहीं था, बल्कि इलाके में अपराध की जड़ें गहरी करने की फिराक में था।

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इस पूरे अभियान में जिस तरह पुलिस टीम ने तालमेल, साहस और सतर्कता दिखाई, वह काबिल-ए-तारीफ है। छापामारी दल में शामिल थे: पु0अ0नि0 मनोज कुमार, थानाध्यक्ष सदर, पु0अ0नि0 अमृत साह, तकनीकी शाखा प्रभारी, दरभंगा, पु0अ0नि0 रंजीत कुमार, थानाध्यक्ष मनीगाछी, पु0अ0नि0 राखी कुमारी, पु0अ0नि0 सुनील कुमार, पु0अ0नि0 मनीष कुमार, स0अ0नि0 राजेश कुमार, स0अ0नि0 संजय कुमार, पी0टी0सी0 899 रामबाबू राय, सिपाही अनमोल कुमार, सिपाही राहुल कुमार, सिपाही आदित्य कुमार, मनीगाछी थाना की सशस्त्र बल.... लेकिन सवाल अब भी ज़िंदा है क्या एक गिरफ्तारी से डर खत्म हो जाएगा? क्या चार किशोरों का अपराध की दुनिया में उतरना समाज के लिए चेतावनी नहीं है? क्या हमारी सड़कें अब भी सुरक्षित हैं?

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कोआ गाछी की यह घटना सिर्फ़ एक केस फाइल नहीं, बल्कि उस भयावह सच्चाई का आईना है, जिसमें आम आदमी हर शाम घर से निकलते वक्त दुआ करता है कि सही-सलामत लौट आए। दरभंगा की रातें अब नींद नहीं देतीं, बल्कि हर मोड़ पर डर खड़ा करती हैं। पुलिस की कार्रवाई ने फिलहाल अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन इस वारदात ने यह साफ कर दिया है कि अपराध का अंधेरा अभी पूरी तरह छंटा नहीं है। अगर समय रहते सख्ती, सतर्कता और सामाजिक जिम्मेदारी नहीं बढ़ी, तो यह दहशत और गहरी हो सकती है। दरभंगा की सड़कों पर अब भी एक सवाल गूंज रहा है। अगला शिकार कौन?
