बड़ी पड़ताल। पंडासराय रेलवे गुमटी पर आखिर क्या हुआ? पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी ने दर्ज कराई गंभीर प्राथमिकी, सहयोगी पर जानलेवा हमले और कथित अपहरण जैसे आरोपों से मचा बवाल, अब पूरे मामले पर टिकी हैं सबकी निगाहें... आखिर उस दिन घटनास्थल पर क्या-क्या हुआ? जानिए एक-एक पल की पूरी कहानी।
बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़ी एक पूर्व जनप्रतिनिधि और उनके साथ चल रहे लोगों के साथ दिनदहाड़े इस तरह की घटना होने का आरोप लगाया जाता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का स्तर क्या होगा। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी द्वारा लहेरियासराय थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, 5 जून 2026 की दोपहर लगभग ढाई बजे वह जिला परिषद सदस्य मोहम्मद सुभान के साथ एक निजी कार्य से निकली थीं। उनके साथ चालक संतोष यादव तथा हबीबुल्लाह हाशमी भी मौजूद थे. पढ़े पूरी रिपोर्ट.....
दरभंगा। विशेष संवाददाता। बिहार के दरभंगा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि सार्वजनिक जीवन से जुड़ी एक पूर्व जनप्रतिनिधि और उनके साथ चल रहे लोगों के साथ दिनदहाड़े इस तरह की घटना होने का आरोप लगाया जाता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का स्तर क्या होगा। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी द्वारा लहेरियासराय थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, 5 जून 2026 की दोपहर लगभग ढाई बजे वह जिला परिषद सदस्य मोहम्मद सुभान के साथ एक निजी कार्य से निकली थीं। उनके साथ चालक संतोष यादव तथा हबीबुल्लाह हाशमी भी मौजूद थे। आवेदन के अनुसार सभी लोग स्कॉर्पियो वाहन से आगे बढ़ रहे थे। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पंडासराय स्थित रेलवे गुमटी के समीप उनकी गाड़ी को एक मोटरसाइकिल और दूसरी स्कॉर्पियो वाहन द्वारा ओवरटेक कर रोक दिया गया। इसके बाद कई लोग वाहन से उतरकर कथित रूप से गाली-गलौज करने लगे।

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लोहे की रॉड से हमले का आरोप: आवेदन के अनुसार, जब हबीबुल्लाह हाशमी ने कथित रूप से गाली देने से मना किया, तब उन पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया। आरोप है कि वार सीधे उनके सिर पर किया गया जिससे उनका सिर फट गया और वह रक्तरंजित होकर जमीन पर गिर पड़े। यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है, तो यह केवल साधारण मारपीट नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक हिंसा का मामला माना जा सकता है। सार्वजनिक स्थल पर इस प्रकार का कथित हमला स्थानीय लोगों में भय का वातावरण उत्पन्न करने वाला है।

पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष ने लगाए गंभीर आरोप: रेणु देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने बीच-बचाव करने का प्रयास किया तो उनके साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने जातिसूचक अपमानजनक शब्द कहे जाने तथा गले से लगभग दस ग्राम वजनी सोने की चेन छीन लेने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के अधीन है, लेकिन यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं तो मामला सामान्य मारपीट से कहीं अधिक गंभीर स्वरूप धारण कर सकता है। घटना का सबसे सनसनीखेज पहलू वह आरोप है जिसमें कहा गया है कि जिला परिषद सदस्य मोहम्मद सुभान को कथित रूप से जबरन वाहन में बैठाकर अपने साथ ले जाया गया। आवेदन में दावा किया गया है कि घटना के बाद अफरा-तफरी के बीच मोहम्मद सुभान को दूसरी गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। बाद में बहादुरपुर थाना पुलिस की मदद से उन्हें बरामद किए जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।यदि जांच में इस कथित बंधक बनाने की घटना की पुष्टि होती है तो यह कानून-व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर संकेत माना जाएगा।

थानों के अधिकार क्षेत्र पर उठा सवाल: आवेदन के अनुसार पीड़ित पक्ष पहले बहादुरपुर थाना पहुंचा। वहां पुलिस ने कथित रूप से यह कहते हुए मामला दर्ज करने से इनकार किया कि घटना लहेरियासराय थाना क्षेत्र की है। इसके बाद पीड़ित पक्ष लहेरियासराय थाना पहुंचा, जहां आवेदन स्वीकार किया गया और मामले की जांच शुरू होने की बात सामने आई। यह घटनाक्रम पुलिस व्यवस्था में अधिकार क्षेत्र को लेकर उत्पन्न होने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को भी उजागर करता है। गंभीर आरोपों वाले मामलों में यदि पीड़ित को एक थाना से दूसरे थाना भेजा जाता है तो इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी उत्पन्न होती है। आवेदन में शंभु पासवान, शत्रुघ्न पासवान, विरासत पासवान उर्फ नानू, सीता देवी, दुर्गेश झा सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों पर विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। यह उल्लेख करना आवश्यक है कि ये सभी आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन में लगाए गए हैं तथा इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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पुलिस की भूमिका पर सबकी नजर: लहेरियासराय थाना में मामला दर्ज होने के बाद अब पूरे प्रकरण की जांच पुलिस के जिम्मे है। जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि घटनास्थल के साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष और वर्तमान जिला परिषद सदस्य से जुड़े इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी राजनीतिक दल की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला केवल एक एफआईआर या आवेदन तक सीमित नहीं है। यह उस व्यवस्था की परीक्षा भी है जहां नागरिक यह उम्मीद करता है कि किसी भी गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने वालों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने तक सभी आरोप न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। इसलिए किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना अवश्य है कि इस घटना ने दरभंगा की कानून-व्यवस्था, पुलिस की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। अब पूरे जिले की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उपलब्ध साक्ष्य यह तय करेंगे कि आवेदन में लगाए गए आरोप किस सीमा तक प्रमाणित होते हैं और कानून का पहिया किस ओर घूमता है।
