आसमान से बरपी मौत की दस्तक, महादेव के धाम पर गिरी विनाशकारी आकाशीय बिजली! चंद सेकेंड की देरी होती तो बिछ जाती लाशें, 25 श्रद्धालुओं की थम गईं सांसें, 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक जलेश्वर नाथ महादेव मंदिर का गुंबद चकनाचूर, हायाघाट के होरलपट्टी में टला भयावह महाविनाश… आखिर कैसे बची दर्जनों जिंदगियां? पढ़िए इस सनसनीखेज विशेष रिपोर्ट में।
सोमवार की सुबह दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के होरलपट्टी गांव में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने कुछ क्षणों के लिए पूरे इलाके की धड़कनें बढ़ा दीं। आसमान में अचानक काले बादल घिर आए, तेज गर्जना हुई और देखते ही देखते एक भीषण आकाशीय बिजली सीधे 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक जलेश्वर नाथ महादेव मंदिर के गुंबद पर आ गिरी। बिजली का प्रहार इतना तेज था कि मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया और विस्फोट जैसी आवाज से पूरा गांव दहल उठा. पढ़े पूरी रिपोर्ट....
दरभंगा। सोमवार की सुबह दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के होरलपट्टी गांव में वह दृश्य देखने को मिला, जिसने कुछ क्षणों के लिए पूरे इलाके की धड़कनें बढ़ा दीं। आसमान में अचानक काले बादल घिर आए, तेज गर्जना हुई और देखते ही देखते एक भीषण आकाशीय बिजली सीधे 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक जलेश्वर नाथ महादेव मंदिर के गुंबद पर आ गिरी। बिजली का प्रहार इतना तेज था कि मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो गया और विस्फोट जैसी आवाज से पूरा गांव दहल उठा।

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उस समय मंदिर के गर्भगृह और परिसर में लगभग 25 श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना में लीन थे। किसी को यह अंदाजा तक नहीं था कि अगले ही पल आसमान से ऐसा प्रचंड प्रहार होने वाला है, जो कुछ सेकेंड इधर-उधर होता तो एक बड़ी जनहानि हो सकती थी। बिजली गिरते ही मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। तेज धमाके से लोग सहम उठे और कुछ देर तक किसी को समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली गिरने की आवाज इतनी भयावह थी कि आसपास के घरों तक उसकी गूंज सुनाई दी। ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और मंदिर की ओर दौड़ पड़े। जब लोगों ने देखा कि मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हो चुका है, तो हर किसी के चेहरे पर चिंता और भय साफ दिखाई दे रहा था।

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राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि मंदिर के भीतर मौजूद सभी श्रद्धालु सुरक्षित रहे। किसी के घायल न होने से लोगों ने इसे भगवान शिव की कृपा बताया। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि आकाशीय बिजली अत्यंत घातक प्राकृतिक आपदा होती है और इससे हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। जलेश्वर नाथ महादेव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 150 वर्ष पूर्व दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की पत्नी महारानी लक्ष्मेश्वरी देवी ने कराया था। वर्षों से यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

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घटना के बाद मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन से मांग की है कि क्षतिग्रस्त गुंबद की तत्काल तकनीकी जांच कराकर मरम्मत कराई जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका न रहे। उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि मानसून के दौरान आकाशीय बिजली अत्यंत गंभीर खतरा बन सकती है। मौसम खराब होने, तेज गर्जना या बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों और ऊंचे ढांचों से दूरी बनाना जीवनरक्षक साबित हो सकता है। सोमवार की सुबह होरलपट्टी में जो हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। एक पल के लिए ऐसा लगा मानो आसमान से आई यह विनाशकारी चमक किसी बड़े हादसे का संकेत बन जाएगी। लेकिन सौभाग्य से इस बार केवल मंदिर का गुंबद क्षतिग्रस्त हुआ और श्रद्धालुओं की जान सुरक्षित रही। यही इस भयावह घटना का सबसे बड़ा सुकून देने वाला पक्ष है।
