नया साल मनाने निकले थे, मौत के जाल में फँसा दिए गए दरभंगा की वह भयावह रात जब दोस्तों ने पहले पार्टी में बुलाया, फिर बेरहमी से मार डाला, एक शव खेत में फेंका गया, दूसरा ज़मीन के नीचे दफन कर दिया गया, पुलिस की बड़ी कार्रवाई से उजागर हो रही खून की साजिश.....

नया साल… जिसे उम्मीदों, खुशियों और नई शुरुआत का प्रतीक कहा जाता है उसी नए साल की पार्टी दरभंगा में दो घरों के लिए कभी न खत्म होने वाला मातम बन गई। अब इस खौफनाक डबल मर्डर की कहानी में एक और परत खुली है। दरभंगा पुलिस ने इस निर्मम हत्याकांड में दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है, जबकि छह कातिल अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।यह सिर्फ गिरफ्तारी की खबर नहीं है यह दोस्ती के नाम पर रची गई साजिश, शराब के धंधे में डूबी इंसानियत, और मिट्टी में दफन की गई दो ज़िंदगियों की दूसरी चीख है. पढ़े पूरी खबर......

नया साल मनाने निकले थे, मौत के जाल में फँसा दिए गए दरभंगा की वह भयावह रात जब दोस्तों ने पहले पार्टी में बुलाया, फिर बेरहमी से मार डाला, एक शव खेत में फेंका गया, दूसरा ज़मीन के नीचे दफन कर दिया गया, पुलिस की बड़ी कार्रवाई से उजागर हो रही खून की साजिश.....
नया साल मनाने निकले थे, मौत के जाल में फँसा दिए गए दरभंगा की वह भयावह रात जब दोस्तों ने पहले पार्टी में बुलाया, फिर बेरहमी से मार डाला, एक शव खेत में फेंका गया, दूसरा ज़मीन के नीचे दफन कर दिया गया, पुलिस की बड़ी कार्रवाई से उजागर हो रही खून की साजिश.....

दरभंगा। नया साल… जिसे उम्मीदों, खुशियों और नई शुरुआत का प्रतीक कहा जाता है उसी नए साल की पार्टी दरभंगा में दो घरों के लिए कभी न खत्म होने वाला मातम बन गई। अब इस खौफनाक डबल मर्डर की कहानी में एक और परत खुली है। दरभंगा पुलिस ने इस निर्मम हत्याकांड में दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है, जबकि छह कातिल अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।यह सिर्फ गिरफ्तारी की खबर नहीं है यह दोस्ती के नाम पर रची गई साजिश, शराब के धंधे में डूबी इंसानियत, और मिट्टी में दफन की गई दो ज़िंदगियों की दूसरी चीख है।

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भैरोपट्टी का छोटू… और अब नवरत्न भी गिरफ्त में: सदर एसडीपीओ राजीव कुमार ने इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि बहादुरपुर थाना क्षेत्र के भैरोपट्टी निवासी छोटू कुमार यादव को पहले गिरफ्तार किया गया था। उसी की निशानदेही पर मिल्कीचक बाजितपुर निवासी नवरत्न कुमार महतो को भी पुलिस ने दबोच लिया है। पुलिस के अनुसार यह हत्या कोई अचानक हुआ झगड़ा नहीं थी बल्कि शराब कारोबार के लेन-देन से उपजा जहर, जो धीरे-धीरे खूनी साजिश में बदल गया।

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नववर्ष की पार्टी… जो मौत का न्योता थी: इस कहानी की जड़ में है नववर्ष की वह पार्टी, जिसे जानबूझकर मौत का जाल बनाया गया। कबीरचक बेहट निवासी विनोद मंडल के पुत्र बादल कुमार (21) और बेला याकूब निवासी रितिक शर्मा के बीच पहले से विवाद चल रहा था। इसी विवाद की आग में रितिक ने छोटू को अपने साथ मिलाया, और फिर बादल को नववर्ष की पार्टी में बुलाया गया। बादल को क्या पता था कि जिस पार्टी का न्योता मिला है, वह उसकी ज़िंदगी का आखिरी बुलावा है।

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दो दोस्त साथ गए… दोनों को मार डाला गया: बादल उस पार्टी में अकेला नहीं गया था। उसके साथ था कबीरचक निवासी लक्ष्मी महतो का बेटा चुन्नू महतो उर्फ मन्ना (22) दो दोस्त… एक साथ हँसते हुए निकले… और दोनों को एक ही रात मौत के हवाले कर दिया गया।

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पहले बादल… फिर चुन्नू: एक-एक कर उतारी गई ज़िंदगी: पुलिस के मुताबिक रितिक और उसके आठ दोस्तों ने मिलकर पहले बादल कुमार की बेरहमी से हत्या की, और उसके बाद चुन्नू महतो को भी मौत के घाट उतार दिया। यह कोई गुस्से में किया गया हमला नहीं था यह सोच-समझकर की गई निर्ममता थी। हत्या के बाद जो किया गया, वह इंसानियत को शर्मसार करने वाला है।बादल कुमार का शव घटनास्थल से करीब आधा किलोमीटर दूर एक बगीचे में गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर छुपा दिया गया। चुन्नू महतो का शव बहादुरपुर थाना क्षेत्र के पोखरसामा गांव निर्माणाधीन आमस सिक्स लेन सड़क के किनारे सरसों की फसल लगे खेत में फेंक दिया गया। जैसे एक लाश को मिट्टी ने निगल लिया, और दूसरी को खेतों की खामोशी।

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पहले एक शव… फिर खुला पूरा राज: सबसे पहले चुन्नू का शव बरामद हुआ। इलाके में सनसनी फैल गई। इसके बाद पुलिस ने छोटू को गिरफ्तार किया। पूछताछ हुई और फिर उस जगह की ओर इशारा हुआ जहाँ बादल को ज़मीन में दफन कर दिया गया था। जब मिट्टी खोदी गई तो सिर्फ एक शव नहीं निकला, दो परिवारों की टूट चुकी उम्मीदें बाहर आईं। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने कई थानों की टीम उतारी। सदर थानाध्यक्ष मनोज कुमार, बहादुरपुर थानाध्यक्ष प्रसुनजय कुमार, पतोर और सोनकी थानाध्यक्ष, सभी मिलकर लगातार छापेमारी कर रहे हैं।एसडीपीओ ने साफ कहा है शेष छह आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

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दो घर उजड़ चुके… छह अब भी खुलेआम: आज एक मां अपने इकलौते बेटे की तस्वीर से बात कर रही है, एक परिवार अपने जवान बेटे की लाश का इंतजार नहीं, इंसाफ का इंतजार कर रहा है। और उधर छह आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। यह सवाल अब सिर्फ पुलिस से नहीं समाज से भी है। कब तक शराब, लालच और दोस्ती के नाम पर खून बहता रहेगा? कब तक नए साल की खुशियां लाशों में बदलती रहेंगी? दरभंगा आज खामोश है लेकिन यह खामोशी बहुत कुछ कह रही है।पुलिस की अगली कार्रवाई पर पूरे जिले की नजर टिकी है।