पढ़िए पूरा हिसाब कौन गया, कौन आया और क्यों हिली कुर्सी! बहादुरपुर थाना कांड में लापरवाही पर पु०अ०नि० गौतम कुमार निलंबित, प्रभार छीना गया; 24 घंटे में पु०अ०नि० वशिष्ठ कापर बने नए फेकल थानाध्यक्ष… दरभंगा पुलिस का कड़ा संदेश: अब हर फाइल बोलेगी, हर चूक पर कार्रवाई होगी.....
यह महज़ एक निलंबन नहीं है। यह एक ऐसा प्रशासनिक संकेत है, जिसने दरभंगा जिले के हर थाने, हर प्रभारी और हर वर्दीधारी को चुपचाप सतर्क कर दिया है। बहादुरपुर थाना कांड संख्या 96/25 से उपजा यह घटनाक्रम अब दो आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के ज़रिये सामने आया है और इन दोनों आदेशों को जोड़कर देखें, तो साफ़ हो जाता है कि दरभंगा पुलिस अब “लापरवाही” शब्द को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. पढ़े पूरी खबर........
दरभंगा। यह महज़ एक निलंबन नहीं है। यह एक ऐसा प्रशासनिक संकेत है, जिसने दरभंगा जिले के हर थाने, हर प्रभारी और हर वर्दीधारी को चुपचाप सतर्क कर दिया है। बहादुरपुर थाना कांड संख्या 96/25 से उपजा यह घटनाक्रम अब दो आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों के ज़रिये सामने आया है और इन दोनों आदेशों को जोड़कर देखें, तो साफ़ हो जाता है कि दरभंगा पुलिस अब “लापरवाही” शब्द को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

पहला आदेश: लापरवाही पड़ी भारी, थाना प्रभारी का प्रभार संभाल रहे अधिकारी निलंबित: दिनांक 05.01.2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दरभंगा पुलिस ने स्पष्ट किया कि बहादुरपुर थाना कांड संख्या 96/25 में अनुसंधान एवं पर्यवेक्षण में लापरवाही बढ़ने के आरोप सामने आए। इस पूरे मामले की जांच मिथिला क्षेत्र दरभंगा की पुलिस-उप महानिरीक्षक स्वप्ना गौतम मेश्राम के स्तर से कराई गई। जांच में तथ्य सामने आने के बाद, बहादुरपुर थाने में पदस्थापित पु०अ०नि० गौतम कुमार, जो उस अवधि में थाना प्रभारी का प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, दरभंगा होगा। इस आदेश के साथ ही यह साफ हो गया कि अब न थाना, न फील्ड, न आदेश देने की शक्ति। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई… यहीं से पुलिस महकमे में बेचैनी और डर का माहौल बनने लगा। क्योंकि यह कार्रवाई सिर्फ़ एक नाम तक सीमित नहीं थी यह जवाबदेही तय करने की शुरुआत थी।

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दूसरा आदेश: खाली कुर्सी नहीं छोड़ी गई, 24 घंटे में नया फेकल थानाध्यक्ष तैनात: निलंबन के ठीक अगले दिन, दिनांक 06.01.2026 को दरभंगा पुलिस की ओर से एक और प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। इसमें लिखा गया कि कर्तव्यहित में तत्काल प्रभाव से दरभंगा जिले के एक पुलिस पदाधिकारी को कॉलम-4 में अंकित प्रतिष्ठान में पदस्थापित किया जाता है। तालिका के अनुसार: पुलिस पदाधिकारी: पु०अ०नि० वशिष्ठ कापर, वर्तमान पदस्थापन: सिमरी थाना, नव पदस्थापन: फेकल (कार्यवाहक) थानाध्यक्ष यानी, बहादुरपुर थाना को एक दिन के लिए भी नेतृत्वविहीन नहीं छोड़ा गया।

इन दोनों प्रेस विज्ञप्तियों को एक साथ पढ़ने पर तस्वीर बिल्कुल साफ हो जाती है लापरवाही सामने आई DIG स्तर पर जांच हुई, थाना प्रभारी का प्रभार संभाल रहे अधिकारी निलंबित हुए, तुरंत नया फेकल थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया..... यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि अब कार्रवाई सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित नहीं है बल्कि तुरंत और दिखने वाली है। यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि पहले प्रेस विज्ञप्ति के पीडीएफ में फेकल थानाध्यक्ष का जिक्र कार्रवाई के रूप में नहीं, बल्कि प्रभार की स्थिति स्पष्ट करने के लिए था। दूसरे पीडीएफ में स्पष्ट रूप से नया फेकल थानाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया है। यानी अब कोई यह नहीं कह सकता कि थाने का जिम्मा किसके पास है? प्रभार को लेकर स्थिति अस्पष्ट है?

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क्योंकि यह संदेश बेहद सख्त है केस लंबित रहा, पर्यवेक्षण ढीला पड़ा, या प्रभार को हल्के में लिया तो पहले कुर्सी जाएगी, फिर विभागीय कार्रवाई चलेगी।सार्वजनिक प्रेस विज्ञप्ति, DIG स्तर की जांच, और 24 घंटे में प्रशासनिक बदलाव यह सब बताता है कि अब हर फाइल देखी जा रही है। दरभंगा के हर थाने के लिए चेतावनी, बहादुरपुर थाना अब केवल एक थाना नहीं, बल्कि एक उदाहरण बन चुका है। यह उदाहरण हर उस अधिकारी के लिए है जो सोचता है कि प्रभार अस्थायी है जो मानता है कि लापरवाही चल जाएगी जो फाइलों को समय पर नहीं देखता। दो आदेश, दो तारीखें, लेकिन संदेश एक कर्तव्य में चूक = कार्रवाई तय। दरभंगा पुलिस ने साफ कर दिया है कि अब सवाल नहीं, अब बहाने नहीं, अब सिर्फ़ जिम्मेदारी चलेगी।
