कड़ाके की ठंड में सेवा का सवाल: श्यामा मंदिर न्यास समिति से अविलंब कंबल वितरण की मांग, नहीं हुई कार्रवाई.... तो उग्र आंदोलन की चेतावनी....

उत्तर बिहार समेत पूरे मिथिला अंचल में पड़ रही भीषण ठंड ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान में लगातार गिरावट, सर्द हवाएं और कोहरे की मार से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग हैं, जो सुदूर देहातों में झोपड़ियों, खुले आकाश या सीमित संसाधनों के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे समय में सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है. पढ़े पूरी खबर......

कड़ाके की ठंड में सेवा का सवाल: श्यामा मंदिर न्यास समिति से अविलंब कंबल वितरण की मांग, नहीं हुई कार्रवाई.... तो उग्र आंदोलन की चेतावनी....
कड़ाके की ठंड में सेवा का सवाल: श्यामा मंदिर न्यास समिति से अविलंब कंबल वितरण की मांग, नहीं हुई कार्रवाई.... तो उग्र आंदोलन की चेतावनी....

दरभंगा। उत्तर बिहार समेत पूरे मिथिला अंचल में पड़ रही भीषण ठंड ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। तापमान में लगातार गिरावट, सर्द हवाएं और कोहरे की मार से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग हैं, जो सुदूर देहातों में झोपड़ियों, खुले आकाश या सीमित संसाधनों के बीच जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे समय में सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

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इसी कड़ी में मैथिली लोक संस्कृति मंच के महासचिव डॉ. उदय शंकर मिश्र ने माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति, दरभंगा से कड़ाके की ठंड को देखते हुए अविलंब मानक कंबलों के वितरण एवं अलाव की व्यवस्था की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ई-मेल के माध्यम से पत्र भेजकर गंभीर हस्तक्षेप की अपील की है।

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सेवा प्रकल्प की अवधारणा मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता का परिणाम: डॉ. उदय शंकर मिश्र ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि न्यास समितियों के गठन के मूल में सेवा, सहयोग और आपदा के समय जनकल्याण की भावना निहित है। यह अवधारणा स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच का परिचायक है। धार्मिक न्यासों में भक्तों द्वारा दी गई श्रद्धा राशि का उपयोग केवल भवन या संरचना तक सीमित न रहकर मानवीय सेवा कार्यों में होना चाहिए यही इसकी मूल भावना है।

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15 लाख की प्रावधानित राशि का अब तक नहीं हुआ उपयोग: डॉ. मिश्र ने बताया कि माँ श्यामा भक्त परिवार सहित अन्य सामाजिक संस्थाओं की मांग पर विगत वर्ष न्यास समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि बाढ़, अग्निकांड, कड़ाके की ठंड जैसी आपदाओं में मानक कंबल वितरण, अलाव की व्यवस्था एवं अन्य राहत कार्यों के लिए आपदा मद में 15 लाख रुपये की राशि प्रावधानित की जाएगी। इसके बावजूद, इस वर्ष भीषण ठंड के बीच अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि जिस राशि का उद्देश्य जनसेवा है, उसका समय पर उपयोग न होना, न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि आम गरीबों के प्रति संवेदनहीनता भी उजागर करता है।

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सात दिनों की चेतावनी, नहीं तो उग्र आंदोलन: डॉ. उदय शंकर मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर न्यास समिति द्वारा अपने ही निर्णय के आलोक में आपदा मद से कंबल वितरण और अलाव की व्यवस्था नहीं की जाती है, तो मैथिली लोक संस्कृति मंच सहित कई सामाजिक संगठन उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और गरीबों के जीवन की रक्षा के लिए होगा।

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न्यास समिति के सदस्य ने भी मानी मांग की जायज़ता: इस संबंध में पूछे जाने पर माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति के न्यासी सदस्य डॉ. संतोष कुमार पासवान ने स्वीकार किया कि न्यास समिति की बैठक में आपदा मद में 15 लाख रुपये देने पर सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई थी। इतना ही नहीं, प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत राशि वृद्धि का भी प्रावधान तय किया गया था। डॉ. पासवान ने भी इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा दुरूह ठंड में सुदूर देहात के जरूरतमंदों के बीच मानक कंबल का अविलंब वितरण अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।

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धार्मिक न्यास पर्षद का स्पष्ट निर्देश: न्यास समिति के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद, पटना के माननीय अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन भी समय-समय पर यह स्पष्ट करते रहे हैं कि न्यास समितियों में जमा करोड़ों रुपये की श्रद्धा राशि का सदुपयोग सेवा प्रकल्पों और भक्तजनों की सुविधा विस्तार में ही किया जाना चाहिए। प्रो. नंदन लगातार न्यास समितियों को निर्देश देते रहे हैं कि वे समाज में जाकर, समाज की सहभागिता के साथ सेवा कार्यों को प्राथमिकता दें, ताकि धार्मिक संस्थाएँ समाज के लिए बोझ नहीं, बल्कि सहारा बनें।

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जिलाधिकारी को भी भेजी गई पत्र की प्रति: गौरतलब है कि डॉ. उदय शंकर मिश्र ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र की एक प्रति दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार को भी प्रेषित की है, ताकि जिला प्रशासन स्तर पर भी इस गंभीर विषय पर संज्ञान लिया जा सके। सवाल अब सिर्फ कागजों और बैठकों का नहीं है, सवाल उन गरीब, बुजुर्ग, महिलाओं और बच्चों का है जो कड़ाके की ठंड में रातें काट रहे हैं। माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति से जुड़े इस सेवा प्रकल्प पर अब पूरे मिथिला की नजर टिकी है क्या सेवा की भावना समय पर ज़मीन पर उतरेगी, या फिर आंदोलन की चिंगारी सुलगेगी?