दरभंगा में सच बोलना और दिखाना बना सबसे बड़ा अपराध! बुलडोजर की कार्रवाई के बीच पत्रकारों को कवरेज से रोका गया, कैमरा और मोबाइल छीनने की कोशिश, धक्का-मुक्की और सार्वजनिक अपमान से मचा हड़कंप, प्रशासनिक दबाव और शक्ति के दुरुपयोग का संगीन मामला पहुंचा प्रमंडलीय आयुक्त तक, जांच के आदेश से हिला पूरा तंत्र.....

नगर निगम की कार्रवाई के दौरान पत्रकारों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और खबर संकलन में बाधा के मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मामले की गूंज सीधे प्रमंडलीय स्तर तक पहुंची, जहां प्रमंडलीय आयुक्त ने पूरे घटनाक्रम को संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश जारी किए हैं। यह मामला अब केवल एक दिन की घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और मीडिया के संबंधों को लेकर बड़े सवाल खड़े करता नजर आ रहा है. पढ़े पूरी खबर......

दरभंगा में सच बोलना और दिखाना बना सबसे बड़ा अपराध! बुलडोजर की कार्रवाई के बीच पत्रकारों को कवरेज से रोका गया, कैमरा और मोबाइल छीनने की कोशिश, धक्का-मुक्की और सार्वजनिक अपमान से मचा हड़कंप, प्रशासनिक दबाव और शक्ति के दुरुपयोग का संगीन मामला पहुंचा प्रमंडलीय आयुक्त तक, जांच के आदेश से हिला पूरा तंत्र.....
दरभंगा में सच बोलना और दिखाना बना सबसे बड़ा अपराध! बुलडोजर की कार्रवाई के बीच पत्रकारों को कवरेज से रोका गया, कैमरा और मोबाइल छीनने की कोशिश, धक्का-मुक्की और सार्वजनिक अपमान से मचा हड़कंप, प्रशासनिक दबाव और शक्ति के दुरुपयोग का संगीन मामला पहुंचा प्रमंडलीय आयुक्त तक, जांच के आदेश से हिला पूरा तंत्र.....

दरभंगा। नगर निगम की कार्रवाई के दौरान पत्रकारों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और खबर संकलन में बाधा के मामले ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। मामले की गूंज सीधे प्रमंडलीय स्तर तक पहुंची, जहां प्रमंडलीय आयुक्त ने पूरे घटनाक्रम को संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश जारी किए हैं। यह मामला अब केवल एक दिन की घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और मीडिया के संबंधों को लेकर बड़े सवाल खड़े करता नजर आ रहा है।

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दरअसल, रविवार को लहेरियासराय थाना क्षेत्र के बीके रोड स्थित नगर निगम की चार दुकानों को न्यायालय के आदेश के आलोक में खाली कराने की कार्रवाई की जा रही थी। नगर निगम प्रशासन और पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई। इसी दौरान मौके पर पहुंचे पत्रकार जब कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे, तभी स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

पत्रकारों का आरोप है कि मौके पर मौजूद नगर निगम के उपनगर आयुक्त ने खबर संकलन कर रहे पत्रकारों पर आपत्ति जताई और पहले मौखिक रूप से रोका गया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ती चली गई। पत्रकारों के अनुसार, न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, बल्कि धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी और स्पष्ट रूप से कहा गया कि वे इस कार्रवाई को कवर नहीं कर सकते। आरोप है कि कैमरा बंद कराने और छीनने का प्रयास भी किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।

इस घटना के बाद पत्रकार समुदाय में भारी रोष फैल गया। इसे व्यक्तिगत व्यवहार का मामला मानने के बजाय, पत्रकारों ने इसे प्रेस के कामकाज में सीधे हस्तक्षेप और दबाव की कोशिश के रूप में देखा। इसी के विरोध में सोमवार को जिले के विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े सैकड़ों पत्रकार एकजुट हुए और संगठित रूप से पैदल मार्च करते हुए प्रमंडलीय आयुक्त के कार्यालय पहुंचे।

पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रमंडलीय आयुक्त से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी दी और लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन में उपनगर आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल में शामिल पत्रकारों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि खबर दिखाने और सवाल पूछने पर इस तरह का व्यवहार किया जाएगा, तो यह पत्रकारिता के बुनियादी अधिकारों का हनन होगा।

प्रमंडलीय आयुक्त ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और मौके पर ही प्रमंडल स्तर से जांच कराने का भरोसा दिया। उन्होंने अपने सचिव को तत्काल जांच टीम गठित करने का निर्देश दिया, ताकि पूरे प्रकरण की तथ्यों के आधार पर पड़ताल हो सके। आयुक्त ने यह भी कहा कि उपलब्ध वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल की परिस्थितियों के आधार पर जांच की जाएगी।

इस दौरान प्रशासनिक संवेदनशीलता का एक अलग पक्ष भी देखने को मिला। आयुक्त के निर्देश पर कार्यालय के बाहर मौजूद पत्रकारों को बैठक कक्ष में बैठने की व्यवस्था कराई गई तथा उन्हें पेयजल और चाय उपलब्ध कराई गई। इसके बाद प्रमंडलीय आयुक्त स्वयं बैठक कक्ष में पहुंचे और पत्रकारों से संवाद करते हुए उनकी बातों को सुना।

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आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस कथित मामले या अनियमितता से जुड़ी खबर को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ, उसकी भी अलग से जांच कराई जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर तथ्यों को दबाने या प्रभावित करने की आशंका न रहे। बैठक के दौरान पत्रकारों ने अपनी अन्य व्यावसायिक समस्याओं और प्रशासनिक स्तर पर आने वाली कठिनाइयों को भी रखा, जिस पर आयुक्त ने आवश्यक पहल का आश्वासन दिया।

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इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रेस क्लब सहित जिले के विभिन्न मीडिया बैनरों से जुड़े बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। मामला अब केवल एक अधिकारी और पत्रकारों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल बन गया है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पत्रकारों को अपने कर्तव्य निर्वहन से रोका जा सकता है।

फिलहाल, प्रमंडलीय आयुक्त के निर्देश पर शुरू हुई जांच से पत्रकार समुदाय को निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद जगी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और दोष तय होने पर प्रशासन किस स्तर तक कार्रवाई करता है।