प्रशासनिक गढ़ में खुलेआम कत्ल, अपराधियों का खूनी ऐलान! थाने–कोर्ट–एसएसपी–डीएम ऑफिस के साये में पीएचईडी कर्मी की निर्मम हत्या, सड़क पर फैला ताजा खून और सवालों के कटघरे में कानून.... क्या दरभंगा बन चुका है मौत का नया ठिकाना?
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है। यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के मुंह पर पड़ा एक जोरदार तमाचा है। यह उस सुरक्षा व्यवस्था पर उठी उंगली है, जो कागजों में तो मजबूत दिखती है, लेकिन ज़मीन पर खून में फिसलती नजर आती है। लहेरियासराय थाना क्षेत्र के स्वीट होम चौक के पास बुधवार की सुबह जो मंजर सामने आया, उसने पूरे दरभंगा को झकझोर कर रख दिया। सड़क किनारे खून से लथपथ शव, गले और शरीर पर चाकू से गोदने के निशान, और आसपास पसरा सन्नाटा व दहशत यह सब उस जगह पर, जहां से थाना चंद कदम, दरभंगा कोर्ट कुछ ही दूरी, एसएसपी कार्यालय सामने, और जिलाधिकारी कौशल कुमार का कार्यालय बिल्कुल पास है. पढ़े पूरी खबर......
दरभंगा… यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं है। यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के मुंह पर पड़ा एक जोरदार तमाचा है। यह उस सुरक्षा व्यवस्था पर उठी उंगली है, जो कागजों में तो मजबूत दिखती है, लेकिन ज़मीन पर खून में फिसलती नजर आती है। लहेरियासराय थाना क्षेत्र के स्वीट होम चौक के पास बुधवार की सुबह जो मंजर सामने आया, उसने पूरे दरभंगा को झकझोर कर रख दिया। सड़क किनारे खून से लथपथ शव, गले और शरीर पर चाकू से गोदने के निशान, और आसपास पसरा सन्नाटा व दहशत यह सब उस जगह पर, जहां से थाना चंद कदम, दरभंगा कोर्ट कुछ ही दूरी, एसएसपी कार्यालय सामने, और जिलाधिकारी कौशल कुमार का कार्यालय बिल्कुल पास है। सवाल सीधा है अगर यहां हत्या हो सकती है, तो शहर में कहां नहीं?

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पीएचईडी कर्मी पवन प्रसाद : एक जिंदगी, कई जिम्मेदारियां, और बेरहम अंत: इस खौफनाक हत्या का शिकार बने हैं पीएचईडी विभाग में चतुर्थ वर्गीय कर्मी पवन प्रसाद (45)। बहेड़ी थाना क्षेत्र के सुसारी गांव निवासी, स्वर्गीय उमेश प्रसाद के पुत्र पवन जो 2010 में अनुकंपा पर नौकरी पाने के बाद विभागीय लैब में कार्यरत थे। सरकारी नौकरी… लेकिन वेतन इतना नहीं कि जिंदगी आराम से चल सके। इसी मजबूरी में पवन पार्ट टाइम ई-रिक्शा चलाते थे। दिन विभाग में पसीना, रात सड़कों पर संघर्ष यही उनकी दिनचर्या थी। और शायद वही संघर्ष उनकी मौत का कारण बन गया।

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सुबह की वह खौफनाक तस्वीर: बुधवार की सुबह, जब शहर जाग रहा था, स्वीट होम चौक के पास लोगों की नजर सड़क किनारे पड़े एक शव पर पड़ी। पास जाकर देखा गया तो शरीर खून से सना था, चाकू के कई वार, और बगल में खड़ा ई-रिक्शा। खून इतना ताजा था कि यह साफ संकेत दे रहा था वारदात कुछ ही घंटे पहले, संभवतः सुबह चार–पांच बजे के बीच हुई है। कुछ ही देर में खबर आग की तरह फैली। भीड़ जुटी। डर, आक्रोश और सन्नाटे का अजीब मिश्रण पूरे इलाके में फैल गया।

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पांच घंटे तक “अज्ञात”, फिर टूटा परिवार पर कहर: सबसे पीड़ादायक पहलू यह रहा कि शव मिलने के करीब पांच घंटे बाद उसकी पहचान हो सकी। शुरुआत में पुलिस ने उसे एक अज्ञात ई-रिक्शा चालक मानकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी। बाद में जब स्वजन पहुंचे, तब जाकर खुलासा हुआ कि यह कोई आम ड्राइवर नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी पवन प्रसाद हैं। उस पल कागजों पर दर्ज नाम बदला, लेकिन एक परिवार की दुनिया उजड़ चुकी थी।

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परिवार, रिश्ते और अकेलापन: पवन प्रसाद की जिंदगी भी आसान नहीं थी। उनकी पत्नी, मां और दो बच्चे दिल्ली में रहते हैं। 2017 में पवन ने दूसरे समुदाय की तीन बच्चों की मां से शादी की थी। हाल ही में उनसे एक पुत्री का जन्म हुआ था। कुछ दिनों से उनकी दूसरी पत्नी अपने बच्चों के साथ जाले थाना क्षेत्र के डोघरा गांव (मायके) में रह रही थी। मंगलवार की रात पवन ने अपनी पत्नी को फोन कर बताया था- मैं ई-रिक्शा चलाने जा रहा हूं… शायद वही फोन आखिरी बातचीत थी। उसके बाद न घर वापसी, न आवाज, सिर्फ लाश।

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इतनी सुरक्षित जगह पर हत्या : सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल: यह घटना सिर्फ लहेरियासराय थाना क्षेत्र की नहीं है। यह पूरे जिला प्रशासन की परीक्षा है। सोचिए थाने से चंद दूरी, दरभंगा कोर्ट पास, एसएसपी कार्यालय सामने, डीएम कार्यालय बगल में... फिर भी खुलेआम चाकू से गोदकर हत्या, और हत्यारा फरार! क्या गश्ती सिर्फ कागजों में होती है? क्या अपराधियों को अब कानून का डर खत्म हो चुका है?

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पुलिस की जांच, लेकिन जनता का भरोसा डगमगाया: पुलिस फिलहाल लूट, और आपसी रंजिश के एंगल से जांच कर रही है। आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं, एफएसएल टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं। सदर एसडीपीओ राजीव कुमार का कहना है शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। जांच जारी है। जल्द ही सब स्पष्ट हो जाएगा। लेकिन दरभंगा की जनता पूछ रही है कब तक ‘जल्द’ का इंतजार?

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अब सवाल एसएसपी से है… लगातार 15 दिनों से कहीं लाश, कहीं हत्या, कहीं सनसनी। अब यह मामला सिर्फ एक एफआईआर नहीं, बल्कि कड़ा रुख अपनाने की जरूरत का संकेत है। क्या एसएसपी साहब को अब सख्त एक्शन लेना पड़ेगा? क्या अपराधियों के लिए डर का माहौल बनेगा? या फिर पवन प्रसाद की मौत भी फाइलों में दबकर रह जाएगी? दरभंगा आज सवाल पूछ रहा है जब प्रशासनिक गढ़ में खून बह सकता है, तो आम आदमी कितना सुरक्षित है? इस हत्याकांड से जुड़े हर अपडेट, पुलिस की अगली कार्रवाई और सच की पूरी परतें हम लगातार सामने लाते रहेंगे।
