बिहार के गांवों में आने वाला है सबसे बड़ा बदलाव! अब हर पंचायत बनेगी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, पक्के मकानों से लेकर कारोबार तक वसूला जाएगा टैक्स, बदलेंगी पंचायतों की सीमाएं, नए वार्ड होंगे अस्तित्व में... और परिसीमन पूरा होने के बाद ही होगा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव

बिहार की ग्रामीण व्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से गांवों की प्रशासनिक, आर्थिक और राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदलती हुई दिखाई दे रही है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए हालिया फैसलों ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में ग्राम पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने वाली संस्थाएं नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही पंचायतों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन भी किया जाएगा, जिसके बाद ही राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आयोजित होंगे. पढ़े पूरी खबर.....

बिहार के गांवों में आने वाला है सबसे बड़ा बदलाव! अब हर पंचायत बनेगी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, पक्के मकानों से लेकर कारोबार तक वसूला जाएगा टैक्स, बदलेंगी पंचायतों की सीमाएं, नए वार्ड होंगे अस्तित्व में... और परिसीमन पूरा होने के बाद ही होगा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव
बिहार के गांवों में आने वाला है सबसे बड़ा बदलाव! अब हर पंचायत बनेगी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, पक्के मकानों से लेकर कारोबार तक वसूला जाएगा टैक्स, बदलेंगी पंचायतों की सीमाएं, नए वार्ड होंगे अस्तित्व में... और परिसीमन पूरा होने के बाद ही होगा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव

पटना/विशेष रिपोर्ट। मिथिला जन जन की आवाज समाचार: बिहार की ग्रामीण व्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से गांवों की प्रशासनिक, आर्थिक और राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदलती हुई दिखाई दे रही है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए हालिया फैसलों ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि आने वाले वर्षों में ग्राम पंचायतें केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने वाली संस्थाएं नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही पंचायतों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन भी किया जाएगा, जिसके बाद ही राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आयोजित होंगे।

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, लेकिन जिन दो फैसलों ने सबसे अधिक चर्चा बटोरी, वे हैं ग्राम पंचायतों को कर एवं शुल्क वसूलने का अधिकार तथा वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार पर पंचायतों के परिसीमन की स्वीकृति। इन दोनों निर्णयों का सीधा असर बिहार के करोड़ों ग्रामीण नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पंचायत व्यवस्था पर पड़ने वाला है।

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अब गांवों में भी होगी टैक्स व्यवस्था, पंचायतें बनेंगी आर्थिक रूप से मजबूत: बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 में वर्षों पहले ग्राम पंचायतों को कर लगाने का प्रावधान तो किया गया था, लेकिन उसके अनुरूप नियमावली कभी तैयार नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप पंचायतों के पास आय का कोई सशक्त स्रोत विकसित नहीं हो पाया और अधिकांश पंचायतें विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार की आर्थिक सहायता पर निर्भर रहीं। अब राज्य सरकार ने पहली बार "ग्राम पंचायत कर, दर एवं शुल्क नियमावली-2026" को मंजूरी देकर इस लंबे इंतजार का अंत कर दिया है। इसके लागू होने के बाद ग्राम पंचायतें निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर अपने क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कर और सेवा शुल्क वसूल सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतें पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ इन प्रावधानों को लागू करती हैं, तो गांवों में सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सफाई, सार्वजनिक भवन, सामुदायिक सुविधाओं और स्थानीय विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे।

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किन-किन मदों में वसूला जाएगा शुल्क: नई नियमावली के अनुसार ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्र में कई प्रकार के स्थानीय कर एवं शुल्क वसूल सकेंगी। इनमें प्रमुख रूप से मकान अथवा भवन पर होल्डिंग टैक्स, पंचायत क्षेत्र में संचालित व्यापार, व्यवसाय एवं उद्योग पर शुल्क, पंचायत द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के बदले सेवा शुल्क तथा नियमावली में निर्धारित अन्य स्थानीय शुल्क शामिल होंगे। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार पक्के मकानों पर प्रतिवर्ष लगभग 100 रुपये का कर तथा सफाई शुल्क अलग से लिया जाएगा। वहीं पेट्रोल पंप, ईंट-भट्ठा और सिनेमा हॉल जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से पांच-पांच हजार रुपये तक का शुल्क निर्धारित किए जाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे पंचायतों की अपनी आय (Own Source Revenue) में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और विकास योजनाओं के लिए उन्हें बार-बार राज्य सरकार की ओर नहीं देखना पड़ेगा।

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अब बदलेगा गांवों का नक्शा, नए वार्ड और नई पंचायतों का रास्ता साफ: मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया दूसरा बड़ा निर्णय पंचायत परिसीमन को लेकर है। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान कई गांवों का एक पंचायत से दूसरी पंचायत में स्थानांतरण संभव है। कुछ पंचायतों का क्षेत्रफल बढ़ सकता है तो कुछ का घट भी सकता है। कई स्थानों पर नए वार्ड बनाए जाने की संभावना है, जबकि कुछ वार्डों का पुनर्गठन भी होगा।परिसीमन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ती आबादी के अनुरूप प्रत्येक क्षेत्र को समान प्रतिनिधित्व मिले और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक संतुलित एवं प्रभावी बन सके।

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परिसीमन पूरा होने के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव: सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव परिसीमन की पूरी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ही कराए जाएंगे। इसका अर्थ है कि पहले पंचायतों की नई सीमाएं तय होंगी, वार्डों का पुनर्गठन होगा, मतदाता क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा और उसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि परिसीमन के बाद अनेक पंचायतों में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों के क्षेत्र बदल सकते हैं, जबकि नए क्षेत्रों में नए नेतृत्व के उभरने की संभावनाएं भी बढ़ जाएंगी।

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वाहन मालिकों पर भी बढ़ा टैक्स का बोझ: मंत्रिमंडल ने मोटर वाहन कर में भी संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत दोपहिया वाहनों पर एक प्रतिशत अतिरिक्त एकमुश्त मोटर वाहन कर लगाया जाएगा। तिपहिया वाहनों पर अतिरिक्त कर निर्धारित किया गया है, जबकि व्यावसायिक वाहनों के व्यापार कर में भी उल्लेखनीय वृद्धि का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि वर्षों से कर संरचना में व्यापक संशोधन नहीं हुआ था, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नई दरें लागू की जा रही हैं।

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राजगीर और रोहतास-कैमूर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तैयारी: मंत्रिमंडल की बैठक में राजगीर तथा रोहतास-कैमूर क्षेत्र में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी गई है। अब इन क्षेत्रों में पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद भविष्य में नए हवाई अड्डों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों को आर्थिक अधिकार देना केवल कर वसूली का निर्णय नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार भी है। यदि पंचायतें अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता सुनिश्चित करती हैं, तो गांवों में विकास योजनाओं की गति पहले से कहीं अधिक तेज हो सकती है।

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दूसरी ओर, परिसीमन की प्रक्रिया ग्रामीण राजनीति का पूरा भूगोल बदल सकती है। नई पंचायतें, नए वार्ड, बदली हुई सीमाएं और नए चुनावी समीकरण आने वाले पंचायत चुनाव को पहले की तुलना में कहीं अधिक रोचक और चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। बिहार सरकार के इन निर्णयों ने यह संकेत दे दिया है कि राज्य की पंचायत व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश करने जा रही है। आर्थिक आत्मनिर्भरता, प्रशासनिक पुनर्गठन, नए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था और स्थानीय विकास की नई संभावनाएं ये सभी बदलाव आने वाले समय में गांवों की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करेंगे। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह होगा कि पंचायतों को मिले नए अधिकारों का उपयोग कितनी पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित के साथ किया जाता है। आने वाले महीनों में परिसीमन की प्रक्रिया और उसके बाद होने वाले पंचायत चुनाव बिहार की ग्रामीण राजनीति और विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।