माँ श्यामा मंदिर में कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, बाहरी हस्तक्षेप और मनमानी के आरोपों से मचा बवाल! अब दरभंगा के एक वार्ड पार्षद की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल! न्यास समिति के कामकाज में कथित दखल, सीडीआर जांच की मांग तक पहुँचा मामला, 14 सूत्रीय मांगों के साथ सड़क पर उतरे श्रद्धालु और समाजसेवी; आखिर कौन हैं वह वार्ड पार्षद जिनका नाम प्रेस विज्ञप्ति में सामने आया? क्या है पूरा विवाद, किन-किन आरोपों ने बढ़ाई हलचल, और क्यों उच्चस्तरीय जांच की उठ रही है मांग? पढ़िए पूरी विशेष रिपोर्ट।

मिथिलांचल की सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक माने जाने वाले माँ श्यामा मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर वर्षों से उठते रहे असंतोष ने बुधवार को एक संगठित जनस्वर का रूप ले लिया। माँ श्यामा न्याय मंच के तत्वावधान में मंदिर परिसर के बाहरी प्रवेश द्वार पर आयोजित एकदिवसीय धरना के माध्यम से आंदोलनकारियों ने मंदिर प्रशासन, न्यास समिति की कार्यप्रणाली तथा परिसर में व्याप्त कथित कुव्यवस्था, वित्तीय अनियमितताओं और श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। आंदोलन के उपरांत जिला प्रशासन को 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए मंच ने पंद्रह दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई की मांग की है. पढ़े पूरी रिपोर्ट....

माँ श्यामा मंदिर में कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, बाहरी हस्तक्षेप और मनमानी के आरोपों से मचा बवाल! अब दरभंगा के एक वार्ड पार्षद की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल! न्यास समिति के कामकाज में कथित दखल, सीडीआर जांच की मांग तक पहुँचा मामला, 14 सूत्रीय मांगों के साथ सड़क पर उतरे श्रद्धालु और समाजसेवी; आखिर कौन हैं वह वार्ड पार्षद जिनका नाम प्रेस विज्ञप्ति में सामने आया? क्या है पूरा विवाद, किन-किन आरोपों ने बढ़ाई हलचल, और क्यों उच्चस्तरीय जांच की उठ रही है मांग? पढ़िए पूरी विशेष रिपोर्ट।
माँ श्यामा मंदिर में कुव्यवस्था, भ्रष्टाचार, बाहरी हस्तक्षेप और मनमानी के आरोपों से मचा बवाल! अब दरभंगा के एक वार्ड पार्षद की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल! न्यास समिति के कामकाज में कथित दखल, सीडीआर जांच की मांग तक पहुँचा मामला, 14 सूत्रीय मांगों के साथ सड़क पर उतरे श्रद्धालु और समाजसेवी; आखिर कौन हैं वह वार्ड पार्षद जिनका नाम प्रेस विज्ञप्ति में सामने आया? क्या है पूरा विवाद, किन-किन आरोपों ने बढ़ाई हलचल, और क्यों उच्चस्तरीय जांच की उठ रही है मांग?

दरभंगा। मिथिलांचल की सांस्कृतिक चेतना, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक माने जाने वाले माँ श्यामा मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर वर्षों से उठते रहे असंतोष ने बुधवार को एक संगठित जनस्वर का रूप ले लिया। माँ श्यामा न्याय मंच के तत्वावधान में मंदिर परिसर के बाहरी प्रवेश द्वार पर आयोजित एकदिवसीय धरना के माध्यम से आंदोलनकारियों ने मंदिर प्रशासन, न्यास समिति की कार्यप्रणाली तथा परिसर में व्याप्त कथित कुव्यवस्था, वित्तीय अनियमितताओं और श्रद्धालुओं की मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। आंदोलन के उपरांत जिला प्रशासन को 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए मंच ने पंद्रह दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई की मांग की है।

धरना की अध्यक्षता कर रहीं समाजसेवी प्रियंका झा ने मीडिया को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति के प्रभारी प्रबंधक एवं अध्यक्ष की कार्यशैली के कारण मंदिर परिसर में प्रशासनिक अनुशासन शिथिल हो गया है तथा व्यवस्थागत अव्यवस्था चरम पर पहुँच चुकी है। उनका दावा था कि निर्णय संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं, बल्कि बाहरी हस्तक्षेप और प्रभाव के आधार पर लिए जा रहे हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव सीधे श्रद्धालुओं और मंदिर व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नवाह महोत्सव के उपरांत मंदिर परिसर स्थित साड़ी गोदाम में हुई भीषण अग्निकांड की घटना आज तक जांच की प्रतीक्षा कर रही है। उनके अनुसार, यदि धार्मिक संस्थान में घटित ऐसी गंभीर घटना का भी समयबद्ध एवं निष्पक्ष परीक्षण नहीं हो, तो प्रशासनिक उत्तरदायित्व पर स्वाभाविक रूप से प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।

धरना के दौरान एक अन्य प्रमुख मुद्दा श्यामा-जानकी विवाह भवन को लेकर भी उठाया गया। प्रियंका झा का आरोप था कि राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा की तत्कालीन विधान परिषद निधि से श्रद्धालुओं की सुविधा के उद्देश्य से निर्मित यह भवन अपनी मूल अवधारणा से भटक चुका है। उनके अनुसार वर्तमान में भवन का उपयोग श्यामा थाली, श्यामा भोग के रसोईघर तथा बोतलबंद पानी के भंडारण के लिए किया जा रहा है, जबकि इसकी मूल उपयोगिता विवाह भवन के रूप में थी। उन्होंने भवन का जीर्णोद्धार कर पूर्व स्वरूप में पुनर्स्थापित करने तथा श्रद्धालुओं के लिए पुनः उपलब्ध कराने की मांग की। धरना में उपस्थित युवा छात्र नेता दीपक झा ने भी मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर न्यास समिति के कार्यालयी कार्यों में बाहरी व्यक्तियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता प्रभावित हो रही है। उन्होंने विशेष रूप से वार्ड पार्षद नवीन सिन्हा का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वे न्यास समिति में किसी विधिक अथवा प्रशासनिक दायित्व पर नहीं होने के बावजूद बैठकों में उपस्थित रहते हैं तथा कार्यालयी कार्यों एवं कर्मचारियों के कार्य संचालन में हस्तक्षेप करते हैं। उन्होंने इस कथित भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

दीपक झा ने आगे मांग रखी कि वार्ड पार्षद नवीन सिन्हा, प्रभारी प्रबंधक तथा अध्यक्ष के पिछले छह माह के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की सक्षम एजेंसी से जांच कर उसे सार्वजनिक किया जाए, ताकि उनके अनुसार पूरे प्रकरण की वास्तविकता सामने आ सके। यह मांग आंदोलनकारियों द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में भी दर्ज है। समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में संबंधित पक्ष की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी। धरना में उपस्थित मिथिला स्टूडेंट्स यूनियन के प्रतिनिधि अविनाश भारद्वाज ने कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल की व्यवस्था को लेकर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता अथवा प्रशासनिक कुप्रबंधन जैसे आरोप सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो यह केवल एक संस्था का नहीं, बल्कि संपूर्ण सामाजिक विश्वास का विषय बन जाता है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

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धरना स्थल पर बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र प्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे। इनमें प्रो. फूल बाबू टेकटरिया, रौशन कुमार झा, उज्जवल कुमार, दीपक झा, विभूति झा अमन, गिरिश झा, कुणाल पांडे, विद्याभूषण, अभिषेक झा, दिनेश गंगानी, सुनील कुमार झा, राधवेंद्र झा जवाहर, विनोदानंद झा, दिलीप झा, अशोक सिंह, क्रांति सिंह, बिट्टू झा, राधारमण झा, मुरारी चौधरी, मनीष झा, राजू मंडल, गणेश मंडल, उपेन्द्र शर्मा, पूर्व पार्षद रौशन झा, समाजसेवी संटू झा सहित अनेक लोग शामिल रहे। धरना के उपरांत न्याय मंच ने जिला प्रशासन को 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। मांगपत्र में वर्तमान न्यास समिति के कार्यकाल में हुए कथित वित्तीय लेन-देन एवं बिना निविदा कराए गए निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच, पिछले पाँच वर्षों का आय-व्यय सार्वजनिक करने, साड़ी गोदाम अग्निकांड की न्यायिक जांच, वर्तमान प्रभारी प्रबंधक को हटाने, वर्तमान न्यास समिति के पुनर्गठन, लंबित नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने, श्यामा-जानकी विवाह भवन का पुनरुद्धार, परिसर में पर्याप्त वॉटर कूलर एवं आधुनिक शौचालयों का निर्माण, कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप समयबद्ध वेतन, पुजारियों के कार्यों में पारदर्शी रोस्टर व्यवस्था, सम्पूर्ण परिसर में सीसीटीवी निगरानी, वाहन सुरक्षा की व्यवस्था तथा धार्मिक आयोजनों में निविदा आधारित पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने जैसी मांगें शामिल हैं।

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मांगपत्र की प्रतियां न्यास समिति के अध्यक्ष, सचिव सह जिलाधिकारी तथा अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपते हुए आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित पंद्रह दिनों के भीतर मांगों पर ठोस प्रशासनिक पहल नहीं की गई, तो आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। प्रेस विज्ञप्ति में यह दावा भी किया गया है कि प्रभारी प्रबंधक की कार्यशैली एवं व्यवहार से असंतुष्ट होकर न्यास समिति के कई पदाधिकारी एवं न्यासी सदस्य भी उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए अध्यक्ष एवं सचिव सह जिलाधिकारी को लिखित आवेदन दे चुके हैं। आपको बता दे कि समाचार लिखे जाने तक प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों एवं उठाई गई मांगों पर माँ श्यामा मंदिर न्यास समिति, उसके अध्यक्ष, प्रभारी प्रबंधक, वार्ड पार्षद नवीन सिन्हा अथवा जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी। संबंधित पक्ष का उत्तर प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।