भारत मंडपम की गरिमामयी दीर्घा में गूँजी राज दरभंगा की सांस्कृतिक ध्वनि: महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संपूर्ण वाङ्मय के ऐतिहासिक लोकार्पण में कुमार कपिलेश्वर सिंह को विशिष्ट आमंत्रण, मिथिला की बौद्धिक परंपरा को मिला राष्ट्रीय प्रणाम.....

मिथिला की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक चेतना एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर सशक्त स्वर के साथ उपस्थित होने जा रही है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के विचारों, लेखन और वैचारिक विरासत को समर्पित महामना मालवीय मिशन द्वारा आयोजित एक अत्यंत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में राज दरभंगा के प्रतिनिधि कुमार कपिलेश्वर सिंह को ससम्मान आमंत्रित किया गया है. पढ़े पूरी खबर......

भारत मंडपम की गरिमामयी दीर्घा में गूँजी राज दरभंगा की सांस्कृतिक ध्वनि: महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संपूर्ण वाङ्मय के ऐतिहासिक लोकार्पण में कुमार कपिलेश्वर सिंह को विशिष्ट आमंत्रण, मिथिला की बौद्धिक परंपरा को मिला राष्ट्रीय प्रणाम.....
भारत मंडपम की गरिमामयी दीर्घा में गूँजी राज दरभंगा की सांस्कृतिक ध्वनि: महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संपूर्ण वाङ्मय के ऐतिहासिक लोकार्पण में कुमार कपिलेश्वर सिंह को विशिष्ट आमंत्रण, मिथिला की बौद्धिक परंपरा को मिला राष्ट्रीय प्रणाम.....

दरभंगा / नई दिल्ली। मिथिला की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक चेतना एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर सशक्त स्वर के साथ उपस्थित होने जा रही है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के विचारों, लेखन और वैचारिक विरासत को समर्पित महामना मालवीय मिशन द्वारा आयोजित एक अत्यंत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समारोह में राज दरभंगा के प्रतिनिधि कुमार कपिलेश्वर सिंह को ससम्मान आमंत्रित किया गया है। यह आमंत्रण न केवल एक विशिष्ट व्यक्ति के प्रति सम्मान है, बल्कि मिथिला की उस गौरवशाली परंपरा की राष्ट्रीय स्वीकृति भी है, जिसने सदैव शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन को अपना आधार बनाया।

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महामना मालवीय मिशन, नई दिल्ली द्वारा जारी आधिकारिक हिंदी एवं अंग्रेज़ी आमंत्रण पत्र (फोटो) के अनुसार, 25 दिसंबर 2025 (गुरुवार) को भारत मंडपम, नई दिल्ली के ऑडिटोरियम–1 में आयोजित होने वाले पंडित मदन मोहन मालवीय सम्पूर्ण वाङ्मय (अंतिम श्रृंखला, 12 खंड) के लोकार्पण समारोह में देश की शीर्ष संवैधानिक, राजनीतिक और बौद्धिक हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है।

उपराष्ट्रपति करेंगे वाङ्मय का लोकार्पण: आमंत्रण पत्र के अनुसार, इस ऐतिहासिक समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में देश के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन की उपस्थिति प्रस्तावित है, जिनके कर-कमलों से महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संपूर्ण वाङ्मय की अंतिम श्रृंखला (12 खंड) राष्ट्र को समर्पित की जाएगी। यह वाङ्मय महामना मालवीय के दुर्लभ लेखों, भाषणों, पत्राचार और वैचारिक योगदान का प्रामाणिक संकलन है, जिसे भारतीय शिक्षा, सामाजिक सुधार और स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक धरोहर के रूप में देखा जा रहा है। उल्लेखनीय है कि महामना वाङ्मय की प्रथम श्रृंखला (11 खंड) का लोकार्पण पूर्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा चुका है, जबकि अब अंतिम श्रृंखला का लोकार्पण उपराष्ट्रपति के हाथों होना इस आयोजन की ऐतिहासिक महत्ता को और बढ़ाता है।

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केंद्रीय मंत्री, सांसद और राष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुख होंगे शामिल: महामना मालवीय मिशन के आमंत्रण पत्र में जिन विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति का उल्लेख है, उनमें प्रमुख रूप से श्री अर्जुन राम मेघवाल, माननीय केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर, माननीय सांसद, लोकसभा अध्यक्ष संसदीय स्थायी समिति (कोयला, खान एवं इस्पात) इन दोनों राष्ट्रीय नेताओं की सहभागिता इस आयोजन को नीति, संसद और वैचारिक विमर्श तीनों स्तरों पर विशेष महत्व प्रदान करती है।

कला, संस्कृति और प्रकाशन जगत की गरिमामयी उपस्थिति: इसके अतिरिक्त समारोह में जिन विशिष्ट गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है, उनमें श्री राम बहादुर राय, पद्म भूषण सम्मानित अध्यक्ष इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) श्री भूपेंद्र कैन्थोला, प्रमुख महानिदेशक, प्रकाशन विभाग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार। इन नामों की उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह समारोह केवल एक पुस्तक लोकार्पण नहीं, बल्कि भारतीय बौद्धिक परंपरा, कला, संस्कृति और वैचारिक धरोहर के समन्वित उत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

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राज दरभंगा और महामना मालवीय का ऐतिहासिक संदर्भ: महामना मालवीय मिशन ने अपने आमंत्रण पत्र में राज दरभंगा और महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के बीच रहे ऐतिहासिक, वैचारिक और सांस्कृतिक संबंधों की ओर भी संकेत किया है। शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और भारतीयता के जिन मूल्यों को महामना मालवीय ने जीवन भर साधा, वही मूल्य मिथिला और राज दरभंगा की परंपरा में भी प्रतिबिंबित होते रहे हैं। इसी वैचारिक साम्य के कारण कुमार कपिलेश्वर सिंह को इस राष्ट्रीय आयोजन में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

कुमार कपिलेश्वर सिंह की प्रतिक्रिया: जब “मिथिला जन-जन की आवाज” के प्रधान संपादक ने इस आमंत्रण को लेकर कुमार कपिलेश्वर सिंह से प्रतिक्रिया जानी, तो उनके शब्दों में विनम्रता और परंपरा-बोध स्पष्ट झलकता दिखा। उन्होंने कहा यह आमंत्रण किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि मिथिला की उस परंपरा का सम्मान है, जिसने सदैव शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रचिंतन को सर्वोपरि रखा है। महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे युगद्रष्टा के विचारों से जुड़ना स्वयं में एक सौभाग्य है। राज दरभंगा का दायित्व रहा है कि वह ऐसे राष्ट्रीय वैचारिक आयोजनों में सहभागी बनकर अपनी सांस्कृतिक जिम्मेदारी का निर्वहन करे। उन्होंने आगे कहा कि यह समारोह केवल औपचारिक लोकार्पण नहीं, बल्कि भारतीय चेतना के मूल स्तंभों को पुनः स्मरण करने का अवसर है।

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परंपरा जहाँ सम्मान अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व है: कुमार कपिलेश्वर सिंह के वक्तव्य में न आत्मप्रशंसा थी, न कोई आडंबर बल्कि उस राजपरंपरा की स्पष्ट झलक थी, जहाँ सम्मान को अधिकार नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व माना जाता है। यही वह मूल्य है, जिसने राज दरभंगा को केवल एक ऐतिहासिक सत्ता नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और वैचारिक नेतृत्व का स्थायी स्तंभ बनाए रखा है। निस्संदेह, महामना मालवीय मिशन के इस राष्ट्रीय आयोजन में राज दरभंगा की सहभागिता मिथिला की सांस्कृतिक गरिमा को और अधिक सुदृढ़ करेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह संदेश छोड़ेगी कि विरासत वही सार्थक है, जो राष्ट्र और समाज के काम आए।