"बिहार की पुकार, निवेश का संसार, संजय सरावगी के संकल्प से सूरत में गूँजा प्रगति का स्वर"
बिहार वह धरती जो गंगा की लहरों से सींची गई और बुद्ध की ज्ञान-ज्योति से प्रकाशित हुई, आज प्रगति के नव स्वर्णयुग में कदम रख रही है। इस क्रांति के शिल्पकार, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री, ओजस्वी व दूरदृष्टि के धनी श्री संजय सरावगी, ने सूरत के मंच से एक ऐसी कथा बुनी कि उद्योगपतियों के मन में बिहार के प्रति आकर्षण का सूरज उदित हो उठा. पढ़े पुरी खबर........

बिहार:- वह धरती जो गंगा की लहरों से सींची गई और बुद्ध की ज्ञान-ज्योति से प्रकाशित हुई, आज प्रगति के नव स्वर्णयुग में कदम रख रही है। इस क्रांति के शिल्पकार, बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री, ओजस्वी व दूरदृष्टि के धनी श्री संजय सरावगी, ने सूरत के मंच से एक ऐसी कथा बुनी कि उद्योगपतियों के मन में बिहार के प्रति आकर्षण का सूरज उदित हो उठा। फेडरेशन ऑफ़ सूरत ट्रेड एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन (FOSTA) की बैठक में उनकी वाणी ने न केवल आंकड़ों का जादू बिखेरा, बल्कि बिहार के स्वप्निल भविष्य का चित्र भी उकेरा।
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FOSTA, जो 60,000 से अधिक व्यापारियों का विशाल समुदाय है, इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। संगठन के अध्यक्ष श्री कैलाश जी हकीम की अगुवाई में आयोजित इस सभा में सूरत के उद्योगपतियों ने बिहार में निवेश का संकल्प लिया और शीघ्र वहाँ पधारने का वचन दिया। यह अवसर बिहार फाऊंडेशन के गुजरात चैप्टर द्वारा "बिहार स्थापना दिवस" के 113वें पर्व पर सजाया गया था, जहाँ श्री सरावगी की प्रेरणा ने हर हृदय को झंकृत कर दिया।
श्री संजय सरावगी, जिनका व्यक्तित्व व्यापारिक सूझ और राजनैतिक संकल्प का अनुपम संगम है, ने बिहार की नवीन गाथा को इस तरह प्रस्तुत किया कि वह कानों में मधुर संगीत-सा गूँज उठा। उन्होंने कहा, "आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और यशस्वी मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की डबल इंजन सरकार ने बिहार को प्रगति का आकाश दिया है। प्रति व्यक्ति आय 7,914 रुपये से उछलकर 66,828 रुपये तक पहुँची, और बजट 23,895 करोड़ से बढ़कर 3,18,000 करोड़ का विशाल स्वरूप ले चुका है।"
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उनके शब्दों में बिहार का नवचित्र जीवंत हो उठा: "यहाँ अब विद्युत की ज्योति 24 घंटे जलती है, कानून का शासन अडिग है, और कुशल श्रम का अथाह सागर निवेशकों का इंतजार कर रहा है। पर्यटन के लिए 25 करोड़ की सब्सिडी, फिल्म निर्माण हेतु 4 करोड़ की सहायता, और फूड प्रोसेसिंग व कपड़ा उद्योग के लिए अनंत संभावनाएँ—बिहार आपके स्वप्नों का स्वागत कर रहा है।"
श्री सरावगी, जो बिहार के विकास के प्रखर सेनानी और व्यापारी वर्ग के प्रेरणास्रोत हैं, ने उद्योगपतियों से आह्वान किया, "बिहार अब वह भूमि है जहाँ विकास दर 14.5% के साथ देश में द्वितीय स्थान पर चमक रही है। हमारी सरकार आपके लिए संकल्पबद्ध है—आइए, इस नवोदय में सहभागी बनें।" उनकी यह पुकार सूरत की गलियों से उठी और उद्योगपतियों के हृदय में बस गई। जवाब में, व्यापारियों ने बिहार की ओर कदम बढ़ाने का वादा किया।
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बिहार, जो कभी इतिहास की सुनहरी स्याही से लिखा गया, आज श्री संजय सरावगी जैसे कृतनिष्ठ नेतृत्व के बल पर भविष्य का स्वर्णाक्षर बन रहा है। यह बैठक एक संवाद से कहीं अधिक थी—यह बिहार के पुनर्जन्म का वह शंखनाद था, जो देश के कोने-कोने तक गूँजेगा। सूरत से बिहार तक का यह सफर अब केवल समय की बात है!