नाबालिग से दुष्कर्म के सनसनीखेज आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में बंद कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर की जमानत याचिका पर फैसला टला, आंशिक सुनवाई के बाद पाक्सो की विशेष अदालत ने बचाव और पीड़िता पक्ष से विधिगत बिंदुओं पर मांगा स्पष्ट जवाब; चार फरवरी को होगी अगली सुनवाई, जबकि नामजद गुरु मौनी बाबा अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर...
दरभंगा की फिज़ा इन दिनों डर और बेचैनी से भरी है। भक्ति, कथा और प्रवचन की आड़ में छिपे कथित अपराध की परतें जब खुलीं, तो समाज की आत्मा तक कांप उठी। नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में बंद कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर की जमानत याचिका पर फिलहाल अदालत ने विराम लगा दिया है. पढ़े पूरी खबर........
दरभंगा की फिज़ा इन दिनों डर और बेचैनी से भरी है। भक्ति, कथा और प्रवचन की आड़ में छिपे कथित अपराध की परतें जब खुलीं, तो समाज की आत्मा तक कांप उठी। नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर आरोप में न्यायिक अभिरक्षा में बंद कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर की जमानत याचिका पर फिलहाल अदालत ने विराम लगा दिया है। शनिवार को आंशिक सुनवाई के बाद पाक्सो की विशेष न्यायाधीश प्रतिमा परिहार ने जमानत पर अगली सुनवाई के लिए चार फरवरी की तारीख तय की..... और साथ ही कानून के ऐसे सवाल खड़े कर दिए, जिनके जवाब अब दोनों पक्षों को देने होंगे।

Advertisement
अदालत कक्ष में माहौल भारी था। शब्द कम थे, लेकिन उनके पीछे छिपी आशंकाएं गहरी। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कुछ अहम विधिगत बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब तलब किया है..... बचाव पक्ष से भी और पीड़िता पक्ष से भी। इन बिंदुओं पर बहस और स्पष्टता के बाद ही तय होगा कि आरोपी को राहत मिलेगी या कानून का शिकंजा और कसता जाएगा।

Advertisement
यह मामला महिला थानाकांड संख्या 182/25 से जुड़ा है। बिरौल थाना क्षेत्र के पड़री निवासी, चर्चित कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर और उसके गुरु रामउदित दास उर्फ मौनी बाबा..... दोनों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पीड़िता की मां ने अपनी नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म का गंभीर आरोप श्रवण दास पर लगाया है। आरोपों की भयावहता ने न सिर्फ परिवार को तोड़ा है, बल्कि पूरे इलाके को सन्न कर दिया है।

Advertisement
मामले में महिला थाना पुलिस ने श्रवण दास को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। लेकिन इस कहानी का दूसरा स्याह अध्याय अभी खुला है...... नामजद दूसरे आरोपी और कथावाचक के गुरु रामउदित दास उर्फ मौनी बाबा अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है, मगर फरारी का साया अब भी कानून को चुनौती दे रहा है।

Advertisement
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने कई सवाल छोड़ दिए हैं..... क्या आस्था की आड़ में अपराध ने पनाह ली? क्या भरोसे का गला घोंटा गया? और क्या न्याय समय पर पीड़िता की दस्तक सुन पाएगा? चार फरवरी की तारीख अब सिर्फ एक अदालती दिन नहीं, बल्कि इंसाफ की अग्निपरीक्षा बन चुकी है। उस दिन तय होगा कि जेल की सलाखों के पीछे बैठा आरोपी राहत की सांस लेगा या कानून की कठोरता और गहराई तक जाएगी। फिलहाल, शहर में डर है, परिवारों में चिंता है और समाज में बेचैनी। अदालत के फैसले से पहले हर निगाह उसी एक सवाल पर टिकी है.....क्या नाबालिग की खामोश चीखों को न्याय की आवाज़ मिलेगी?
