दरभंगा से उठी सफलता की ऐसी गूंज कि पूरे बिहार में होने लगी चर्चा, साधना भारती ने कॉर्पोरेट दुनिया से प्रशासनिक सेवा तक का सुनहरा सफर तय कर रचा नया इतिहास, स्मृति भारद्वाज ने कम उम्र में हासिल किया बड़ा मुकाम, अभय कुमार ने भी मेहनत और प्रतिभा से जीता प्रतिष्ठित पद, आखिर कैसे श्रम विभाग के इन तीन योद्धाओं ने 70वीं बीपीएससी में लिख दी गौरव, संघर्ष और सफलता की स्वर्णिम गाथा? जानिए इस विशेष और प्रेरणादायक रिपोर्ट में...
कभी-कभी किसी परीक्षा का परिणाम केवल अंक, रैंक और नियुक्ति पत्रों तक सीमित नहीं रहता। कुछ परिणाम ऐसे होते हैं जो पूरे समाज की उम्मीदों को नया आकाश दे देते हैं, युवाओं की आंखों में नए सपने जगा देते हैं और यह विश्वास पैदा करते हैं कि कठिन परिश्रम, संघर्ष और दृढ़ संकल्प के सामने कोई मंजिल असंभव नहीं होती। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा का परिणाम दरभंगा प्रमंडल के लिए कुछ ऐसा ही संदेश लेकर आया है। यह केवल तीन अधिकारियों की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संकल्प, तपस्या और कर्मनिष्ठा का प्रतिफल है जिसने मिथिला की धरती को एक बार फिर गौरवान्वित कर दिया है। दरभंगा प्रमंडल में कार्यरत तीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने बीपीएससी की कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे अटल हों तो कोई भी ऊंचाई दूर नहीं होती. पढ़े पूरी रिपोर्ट.....
दरभंगा। कभी-कभी किसी परीक्षा का परिणाम केवल अंक, रैंक और नियुक्ति पत्रों तक सीमित नहीं रहता। कुछ परिणाम ऐसे होते हैं जो पूरे समाज की उम्मीदों को नया आकाश दे देते हैं, युवाओं की आंखों में नए सपने जगा देते हैं और यह विश्वास पैदा करते हैं कि कठिन परिश्रम, संघर्ष और दृढ़ संकल्प के सामने कोई मंजिल असंभव नहीं होती। 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) परीक्षा का परिणाम दरभंगा प्रमंडल के लिए कुछ ऐसा ही संदेश लेकर आया है। यह केवल तीन अधिकारियों की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संकल्प, तपस्या और कर्मनिष्ठा का प्रतिफल है जिसने मिथिला की धरती को एक बार फिर गौरवान्वित कर दिया है। दरभंगा प्रमंडल में कार्यरत तीन श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों ने बीपीएससी की कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर यह साबित कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे अटल हों तो कोई भी ऊंचाई दूर नहीं होती। इन तीन नामों में सबसे अधिक चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है साधना भारती। एक ऐसा नाम जो आज हजारों युवाओं के लिए संघर्ष, प्रतिभा और सफलता का पर्याय बन चुका है।

जब सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनीं प्रशासनिक सेवा की नई पहचान: मधुबनी जिले के लदनिया प्रखंड के खाजेडीह गांव से निकलकर बिहार प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने की साधना भारती की यात्रा किसी प्रेरणादायक उपन्यास से कम नहीं लगती। बोकारो की शैक्षणिक गलियों से शुरू हुआ उनका सफर भुवनेश्वर के तकनीकी संस्थानों तक पहुंचा। बी.टेक. की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी एक्सेचर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपनी पहचान बनाई। लेकिन कुछ लोग केवल नौकरी करने के लिए पैदा नहीं होते, वे समाज को दिशा देने के लिए जन्म लेते हैं। कॉर्पोरेट दुनिया की चमक-दमक के बीच भी साधना भारती के भीतर समाज के लिए कुछ बड़ा करने की बेचैनी जीवित रही। यही बेचैनी उन्हें प्रशासनिक सेवा की ओर खींच लाई। 67वीं बीपीएससी के माध्यम से श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बनने के बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी। जिम्मेदारियों के साथ संघर्ष जारी रखा और अंततः 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 530वीं रैंक प्राप्त कर राज्य कर सहायक आयुक्त के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होकर इतिहास रच दिया। आज उनकी सफलता यह संदेश दे रही है कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।

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साधना की सफलता में दिख रही है हजारों बेटियों की उम्मीद: मिथिला की बेटियां सदियों से अपनी प्रतिभा का परिचय देती रही हैं, लेकिन हर नई सफलता समाज को नई ऊर्जा प्रदान करती है। साधना भारती का चयन केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह उन हजारों ग्रामीण बेटियों की जीत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं। यह सफलता उस सोच को भी चुनौती देती है जो कभी बेटियों की उड़ान को सीमित करने की कोशिश करती थी। आज खाजेडीह गांव की गलियों से लेकर दरभंगा और पूरे मिथिला क्षेत्र तक साधना भारती का नाम गर्व और सम्मान के साथ लिया जा रहा है।

23 वर्ष की उम्र में कमाल, स्मृति भारद्वाज बनीं वरीय उप समाहर्त्ता: अलीनगर में पदस्थापित श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी स्मृति भारद्वाज ने भी अपनी प्रतिभा का ऐसा परिचय दिया है जिसने युवाओं को चकित कर दिया है। सिर्फ 23 वर्ष की आयु में 69वीं बीपीएससी के माध्यम से श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बनीं स्मृति ने एक बार फिर अपनी क्षमता का लोहा मनवाया है। 70वीं बीपीएससी में 160वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने बिहार प्रशासनिक सेवा में वरीय उप समाहर्त्ता का पद हासिल किया है। समस्तीपुर के गोही गांव से निकलकर इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि प्राप्त करना किसी असाधारण सफलता से कम नहीं माना जा सकता। उनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती।

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आईआईटी से प्रशासनिक सेवा तक, अभय कुमार ने भी बढ़ाया गौरव: बासोपट्टी में पदस्थापित श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अभय कुमार ने भी अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया है। आईआईटी पटना से बी.टेक. की शिक्षा प्राप्त करने वाले अभय कुमार का चयन गृह (कारा) विभाग में प्रोबेशन पदाधिकारी के रूप में हुआ है। शिवहर की धरती से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचने वाले अभय कुमार की सफलता यह बताती है कि तकनीकी शिक्षा और प्रशासनिक दक्षता का अद्भुत संगम किस प्रकार समाज को नई दिशा दे सकता है।दरभंगा प्रमंडल के श्रम विभाग के लिए यह उपलब्धि किसी उत्सव से कम नहीं है। ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है जब एक ही प्रमंडल में कार्यरत तीन अधिकारी एक साथ बीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त करें और विभिन्न राजपत्रित पदों पर चयनित हों। उप श्रम आयुक्त राकेश रंजन द्वारा व्यक्त प्रसन्नता स्वाभाविक है, क्योंकि यह सफलता पूरे विभाग की कार्यसंस्कृति, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण को भी प्रतिबिंबित करती है। आज जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों युवा परिणामों को लेकर चिंतित रहते हैं, तब साधना भारती, स्मृति भारद्वाज और अभय कुमार की सफलता उन्हें यह संदेश दे रही है कि असफलता अंतिम सत्य नहीं होती। सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो गिरकर भी उठते हैं, थककर भी चलते हैं और संघर्षों के बीच अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखते हैं।

मिथिला की धरती को नमन: मिथिला सदियों से विद्या, ज्ञान और प्रतिभा की भूमि रही है। यह वही धरती है जहां विद्वानों ने इतिहास रचा, जहां शिक्षा ने संस्कृति को जन्म दिया और जहां संघर्ष ने सफलता का मार्ग प्रशस्त किया। आज साधना भारती, स्मृति भारद्वाज और अभय कुमार की सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मिथिला की मिट्टी में प्रतिभा का वह बीज मौजूद है जो अवसर मिलने पर पूरे देश को अपनी सुगंध से महका सकता है। इन तीनों अधिकारियों की उपलब्धि केवल उनके परिवारों की खुशी नहीं है, बल्कि यह पूरे दरभंगा प्रमंडल, पूरे मिथिलांचल और बिहार के लिए गर्व का विषय है।उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दीपक बनेगी, जो वर्षों तक युवाओं के सपनों को रोशन करती रहेगी।
