दरभंगा में बायोमेट्रिक सत्यापन में पकड़ा गया फर्जी BPSC शिक्षक और उसके सहयोगी, मास्टरमाइंड के पास से पकड़ा गया तीन लाख रुपया

बीपीएससी द्वारा आयोजित शिक्षक परीक्षा में सफलता के बाद, शिक्षा विभाग के आदेश पर दरभंगा जिला में 3 जनवरी से चयनित विद्यालय अध्यापक का बायोमेट्रिक सत्यापन चल रहा है। उसी क्रम में दिनांक 10 जनवरी को बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत चयनित विद्यालय अध्यापक के बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया। जिसमें एक फर्जी शिक्षक पकड़ा गया है. पढ़े पूरी खबर....

दरभंगा में बायोमेट्रिक सत्यापन में पकड़ा गया फर्जी BPSC शिक्षक और उसके सहयोगी, मास्टरमाइंड के पास से पकड़ा गया तीन लाख रुपया
दरभंगा में बायोमेट्रिक सत्यापन में पकड़ा गया फर्जी BPSC शिक्षक और उसके सहयोगी, मास्टरमाइंड के पास से पकड़ा गया तीन लाख रुपया

दरभंगा - बीपीएससी द्वारा आयोजित शिक्षक परीक्षा में सफलता के बाद, शिक्षा विभाग के आदेश पर दरभंगा जिला में 3 जनवरी से चयनित विद्यालय अध्यापक का बायोमेट्रिक सत्यापन चल रहा है। उसी क्रम में दिनांक 10 जनवरी को बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत चयनित विद्यालय अध्यापक के बायोमेट्रिक सत्यापन किया गया। जिसमें एक फर्जी शिक्षक पकड़ा गया है। जिसके बाद मौके पर तैनात प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी शिवशंकर कुमार ने लहेरियासराय थाना को लिखित आवेदन देते हुए पुलिस के हवाले कर दिया हैं। बताते चले कि शिक्षक देवेन्द्र कुमार महतो मध्य विद्यालय खरारी, बालक, बहेड़ी में अध्यापक के रूप में योगदान एवं कार्यरत थे।

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प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी शिवशंकर कुमार ने आवेदन के माध्यम से बताया है कि बहेड़ी प्रखंड अंतर्गत चयनित विद्यालय अध्यापक के बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान फर्जी विद्यालय अध्यापक देवेन्द्र कुमार महतो पकड़ा गया है। आधार संख्या - 621103530364, BPSC ROLL क्रमांक - 221192, टीचर आई०डी० - BPDAR2317107691 का बायोमेट्रिक का मिलान नहीं हुआ और ना ही फोटो का मिलान हुआ। पूछताछ के क्रम में अभ्यर्थी ने स्वीकार किया की उनके साथ आये एक अन्य व्यक्ति जिनका नाम नविन कुमार है। वो फर्जी अध्यापक देवेन्द्र कुमार महतो के जगह पर परीक्षा में बैठे थे।

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वही उन्होंने अपने आवेदन में कहा है कि जिसे नवीन कुमार ने भी लिखित रूप से स्वीकार किया है की वो देवेन्द्र कुमार, पिता रामवतार महतो के जगह पर परीक्षा में बैठे थे। बायोमेट्रिक सत्यापन के क्रम में यह भी पाया गया की नवीन कुमार ही परीक्षा में बैठे थे, उनका फोटो का भी मिलान हो गया है। साथ ही प्रधानध्यापक के द्वारा भी यह स्वीकार किया गया है की बायोमेट्रिक मिलान के दौरान जिस व्यक्ति का फोटो का मिलान हुआ है वह व्यक्ति विद्यालय में कार्यरत नहीं था। साथ ही फर्जी शिक्षक एवं उनके सहयोगी के पास से तीन लाख उनचालीस हजार रुपये पाया गया है।