गांव की गलियों से उठी मेहनत की आवाज, इंटर आर्ट्स में 477 अंक के साथ बिहार में तीसरा स्थान.... बरुआरा की बेटी निशु कुमारी ने दरभंगा को दिलाया गर्व का सबसे चमकदार क्षण.....
कभी-कभी परीक्षा का परिणाम केवल अंकों की घोषणा नहीं होता, बल्कि वह संघर्ष, विश्वास और सपनों की जीत की कहानी बन जाता है। ऐसा ही एक गौरवपूर्ण क्षण इस बार बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम के साथ सामने आया, जब दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के बरुआरा गांव की छात्रा निशु कुमारी ने कला संकाय में 477 अंक (95.40 प्रतिशत) प्राप्त कर पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल किया। इतना ही नहीं, उन्होंने पूरे दरभंगा जिले में पहला स्थान प्राप्त कर अपने गांव, प्रखंड और जिले को गर्व से भर दिया. पढ़े पूरी खबर.....
दरभंगा। कभी-कभी परीक्षा का परिणाम केवल अंकों की घोषणा नहीं होता, बल्कि वह संघर्ष, विश्वास और सपनों की जीत की कहानी बन जाता है। ऐसा ही एक गौरवपूर्ण क्षण इस बार बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के परिणाम के साथ सामने आया, जब दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड के बरुआरा गांव की छात्रा निशु कुमारी ने कला संकाय में 477 अंक (95.40 प्रतिशत) प्राप्त कर पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल किया। इतना ही नहीं, उन्होंने पूरे दरभंगा जिले में पहला स्थान प्राप्त कर अपने गांव, प्रखंड और जिले को गर्व से भर दिया।

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सोमवार को जैसे ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने परिणाम घोषित किया, वैसे ही बरुआरा गांव में मानो उत्साह का माहौल बन गया। खबर धीरे-धीरे पूरे इलाके में फैलती गई और देखते ही देखते लोगों का जमावड़ा निशु के घर के बाहर लगने लगा। हर कोई उस बेटी को देखने और बधाई देने पहुंच रहा था जिसने सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई कर इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की। यदि इस सफलता को क्रिकेट की भाषा में समझें तो कहा जा सकता है कि निशु कुमारी ने शिक्षा के मैदान में ऐसा शॉट लगाया कि गेंद सीधे राज्य स्तर के स्कोरबोर्ड पर जा गिरी। मेहनत, अनुशासन और धैर्य की पारी खेलते हुए उन्होंने पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि गांव की मिट्टी में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती।

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निशु की इस उपलब्धि के पीछे एक साधारण लेकिन मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि है। उनकी मां रूबी कुमारी आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं और बच्चों की देखभाल व शिक्षा से जुड़ा काम करती हैं, जबकि उनके पिता सुवेश तिवारी खेती-बाड़ी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने शिक्षा को कभी पीछे नहीं रहने दिया। यही कारण है कि आज उनकी बेटी ने पूरे राज्य में पहचान बनाई है। निशु ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी तरह गांव में रहकर की। गांव का शांत माहौल, परिवार का विश्वास और शिक्षकों का मार्गदर्शन उनकी तैयारी का सबसे मजबूत आधार बना। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनके पूरे परिवार का आशीर्वाद है। विशेष रूप से उनके नाना रमेश ठाकुर, नानी नूतन देवी और मामा रमण ठाकुर ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया।

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यदि इस उपलब्धि को क्रिकेट कमेंट्री की शैली में कहें तो ऐसा लगता है मानो परिवार ने पिच तैयार की, शिक्षक ने रणनीति बनाई और निशु ने मैदान में उतरकर शानदार पारी खेल दी। परिणाम घोषित होते ही स्कोरबोर्ड पर 477 अंक चमक उठे और पूरा इलाका तालियों से गूंज उठा। निशु की शैक्षणिक यात्रा पहले से ही उल्लेखनीय रही है। वर्ष 2024 में मैट्रिक परीक्षा में भी उन्होंने 477 अंक प्राप्त कर जिला स्तर पर टॉपर का स्थान हासिल किया था। अब इंटरमीडिएट परीक्षा में भी उन्होंने वही अंक लाकर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। लगातार दो बड़ी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन ने उन्हें इलाके के छात्रों के लिए प्रेरणा बना दिया है।

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भविष्य की योजनाओं को लेकर निशु बेहद स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि वह आगे उच्च शिक्षा प्राप्त कर UPSC की तैयारी करना चाहती हैं। साथ ही विज्ञान और प्रशासनिक क्षेत्र में अध्ययन कर देश और समाज के लिए उपयोगी कार्य करना उनका लक्ष्य है। उनका कहना है कि वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रहेंगी। निशु का पैतृक घर मुजफ्फरपुर जिले के औराई प्रखंड के जगतपुर गांव (वार्ड संख्या-4) में है, लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई अपने ननिहाल बरुआरा गांव में रहकर की। नाना-नानी के घर का वातावरण और परिवार का स्नेह उनके लिए पढ़ाई का सबसे बड़ा सहारा बना।

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परिणाम सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी गर्व की भावना साफ दिखाई दी। गांव के वरिष्ठ लोग और युवा छात्र-छात्राएं निशु के घर पहुंचकर उन्हें बधाई देने लगे। इस दौरान गोविंद कुमार झा, अमर कुमार सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे और सभी ने इस उपलब्धि को पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक बताया। आज बरुआरा गांव की गलियों में एक ही नाम गूंज रहा है....निशु कुमारी। यह नाम केवल एक छात्रा का नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक बन गया है जो यह बताता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो छोटे से गांव की बेटी भी राज्य के बड़े मंच पर अपना स्थान बना सकती है।दरभंगा की इस बेटी ने शिक्षा के मैदान में जो पारी खेली है, वह आने वाले वर्षों तक छात्रों को प्रेरित करती रहेगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह प्रतिभाशाली छात्रा आगे अपनी पढ़ाई और लक्ष्य की दिशा में कौन-कौन से नए मुकाम हासिल करती है।
