ब्रेकिंग न्यूज़: बिहार पुलिस में तबादले हेतु सिफारिश पर कठोर कार्रवाई का ऐलान, चरित्र पुस्तिका में अंकन का प्रावधान
बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक अभूतपूर्व और कठोर कदम उठाते हुए अपने समस्त अधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि तबादले अथवा पदस्थापन के लिए बाहरी व्यक्तियों से सिफारिश करवाना अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिनांक 31 मार्च 2025 को मुख्यालय एवं बजट प्रभाग की ओर से जारी एक पत्र में यह चेतावनी दी गई है कि ऐसा कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा. पढ़े पुरी खबर........

पटना: बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक अभूतपूर्व और कठोर कदम उठाते हुए अपने समस्त अधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि तबादले अथवा पदस्थापन के लिए बाहरी व्यक्तियों से सिफारिश करवाना अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दिनांक 31 मार्च 2025 को मुख्यालय एवं बजट प्रभाग की ओर से जारी एक पत्र में यह चेतावनी दी गई है कि ऐसा कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा। इस तरह के प्रकरणों में संलिप्त पुलिसकर्मियों को अपनी सफाई प्रस्तुत करने का अवसर तो दिया जाएगा, किंतु यह घटना उनकी चरित्र पुस्तिका में अमिट रूप से अंकित हो जाएगी, जो उनके सेवाकाल पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
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हाल के दिनों में यह प्रवृत्ति प्रकाश में आई है कि कुछ पुलिसकर्मी बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से अपने तबादले की राह सुगम करने का प्रयास कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यालय ने इसे अनुशासन के मूल्यों के विरुद्ध माना है। इस संदर्भ में सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षकों (आईजी), उपमहानिरीक्षकों (डीआईजी) और जिला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) को अपने अधीनस्थों तक यह संदेश संप्रेषित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
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यह कदम बिहार सरकार की उस नीति का परिणाम है, जो स्थानांतरण और पदस्थापन को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह नीति मंत्रिमंडल सचिवालय एवं समन्वय विभाग के संकल्प संख्या 434, दिनांक 1 मार्च 2007, तथा गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के पत्र संख्या 10136, दिनांक 30 अगस्त 2024 पर आधारित है। इस नीति के अनुपालन में मुख्यालय द्वारा जिलावार एक सूची भी तैयार की जाएगी, जिसमें उन पुलिसकर्मियों के नाम सम्मिलित होंगे, जिन्होंने बाहरी सिफारिश का सहारा लिया। संबंधित जिला एसएसपी को यह दायित्व सौंपा गया है कि वे ऐसे कर्मियों को शस्त्रिका कक्ष में आमंत्रित कर उनका स्पष्टीकरण प्राप्त करें और तत्पश्चात उसे उनकी चरित्र पुस्तिका में विधिवत दर्ज करें।
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यह निर्णय न केवल पुलिस बल में अनुशासन की पुनर्स्थापना का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासन अपने कर्तव्यों के प्रति कितना सजग और संकल्पबद्ध है। यह कदम निस्संदेह पारदर्शिता और नैतिकता के उस उच्च मानदंड को स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा, जिसकी अपेक्षा बिहार पुलिस से की जाती है।