सड़क पर पाठशाला: दरभंगा का एक ऐसा स्कूल जहां सड़क पर पोलोथिन टांगकर पढ़ने को विवश है छात्र, पशु खटाल में बनता है दोपहर का भोजन, वहीं खाते हैं मिड-डे-मील

बिहार सरकार के द्वारा शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए BPSC के द्वारा शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन कर, BPSC चैयरमैन अतुल प्रसाद योग्य शिक्षकों की सूची बनाकर सरकार को दे रही है। ताकि बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई उमंग मिल सके। वही दूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक अपने शख्त अंदाज में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने में दिन-रात एक किए रहते है. पढ़े पूरी खबर......

सड़क पर पाठशाला: दरभंगा का एक ऐसा स्कूल जहां सड़क पर पोलोथिन टांगकर पढ़ने को विवश है छात्र, पशु खटाल में बनता है दोपहर का भोजन, वहीं खाते हैं मिड-डे-मील
सड़क पर पाठशाला: दरभंगा का एक ऐसा स्कूल जहां सड़क पर पोलोथिन टांगकर पढ़ने को विवश है छात्र, पशु खटाल में बनता है दोपहर का भोजन, वहीं खाते हैं मिड-डे-मील

दरभंगा - बिहार सरकार के द्वारा शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए BPSC के द्वारा शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन कर, BPSC चैयरमैन अतुल प्रसाद योग्य शिक्षकों की सूची बनाकर सरकार को दे रही है। ताकि बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को नई उमंग मिल सके। वही दूसरी तरफ शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक अपने शख्त अंदाज में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने में दिन-रात एक किए रहते है। चाहे शिक्षा विभाग के द्वारा छुट्टियों के कटौती हो, या फिर शिक्षको को समय पर स्कूल पहुंचकर स्कूल का संचालन कर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। वही सरकार व उनके मुलाजिम नए शिक्षक भर्ती के बाद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करते थकते नहीं है।वही दूसरी तरफ दरभंगा जिला के किरतपुर प्रखंड की रसियारी पंचायत के सिरसिया गांव स्थित न्यू प्राथमिक विद्यालय की है। जहां बच्चो के स्कूल में पढ़ने के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है। इस विद्यालय के शिक्षक सड़क पर पोलोथिन टांगकर पढ़ाने को विवश है। विद्यालय का भवन और जमीन नही होने के कारण कक्षा 1 से 5 तक कि 174 नामांकित बच्चों की पढ़ाई वर्षों से सड़क पर ही संचालित हो रहा है। जिसमे 98 लड़के और 76 लड़कियां है। जमीन व भवन के अभाव में स्कूल का मिड डे मील पशु खटाल में बनता है। तथा सड़क के दोनों किनारे बच्चे बैठक खुले आसमान के नीचे भोजन करते है। तथा स्कूल के शिक्षिका और छात्राएं खुले में शौच जाने के लिए विवश हैं।

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बिहार लोक सेवा आयोग से चयनित शिक्षक विशाल कुमार बताते है की ऐसी खराब स्थिति को कल्पना नहीं थी। पर अब जो है, जीतना मिला है उसी को सुचारू ढंग से जलने का प्रयास हम लोगों को द्वारा किया जा रहा है। वहीं उन्होंने बताया कि यहां पर रिसोर्स की बहुत कमी है। पर जो मिला है उसी में हमलोगों को पूरा करना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में बच्चो को एक जगह एकत्रित कर बैठना मुश्किल हो जाता है। कई बार बच्चे शौच का बहाना बना कर पीछे से चले जाते है। स्कूल को बेहतरीन बनाने के लिए हमारे स्कूल के प्राचार्य के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है उम्मीद है कि बहुत जल्द स्कूल को भवन और सारी सुख सुविधा उपलब्ध होगी।

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वही पांचवी कक्षा की छात्रा अंजनी कुमारी ने बड़े ही उदास मन से बताया की स्कूल की जमीन नहीं होने के कारण हम लोगों को इस प्रकार की स्थिति में पढ़ाई लिखाई करना पड़ता है स्कूल में भवन हो इसको लेकर हम लोगों ने कई बार शिकायत की है. वही स्कूल के द्वारा दिए जा रहे मिड डे मिल भी हम लोग सड़क के किनारे बैठकर खाते हैं। वही शौच करने की सवाल पर नजर झुका कर कहा की इसके लिए खेतो की ओर खुले में ही जाना पड़ता है।

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वही विद्यालय के प्रधानाध्यापक विद्यानंद प्रसाद ने बताया की स्कूल के सफल संचालन के लिए 5 शिक्षक है। जिसमे से 2 महिला और 3 पुरुष शिक्षक है। जिसमे बिहार लोक सेवा आयोग से चयानित 2 और नियोजन से 3 शिक्षक कार्यरत है। यहां स्कूल को जमीन देने के लिए दाता लगभग 3 साल से तैयार है। लेकिन विभाग की लापरवाही की वजह से अंचलाधिकारी एनओसी नही दे रहे है। यहां के लोगो को कोई समस्या नहीं है। हमलोग ने लिख कर विभाग को दिया है। लेकिन कुछ नही हो पाया है। उन्होंने बताया की शौच के लिए निजी स्तर पर व्यवस्था करने का प्रयास कई बार किया गया। लेकिन नही हो पाने की स्थिति में सभी को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। उन्होंने बताया की व्यस्था सुधार की ओर विभाग अभी तक कुछ नहीं किया गया है।

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बता दे की इस स्कूल की स्थापना 2011 में की गई जिसके बाद 2014 तक इसी स्थिति में स्कूल संचालित होता रहा। जिसके बाद 2018 तक बगल के ही कठार प्राथमिक विद्यालय में विभाग के आदेश पर शिफ्ट कर दिया गया। और पुनः 2018 से विद्यालय इसी स्थिति में संचालित हो रही है। बच्चे अधिकतम व न्यूनतम तापमान में भी बांस व बल्ले पर पॉलीथिन डाल कर सड़क पर दिया गया स्कूल भवन के शक्ल में बोरा पर बैठते हैं और शौच के लिए खुले आसमान के नीचे खेतों में जाना पड़ता है। जिले में कुल 2505 स्कूलों की संख्या है। जिसमे 1418 प्राथमिक स्कूल है। 741 मिडिल स्कूल, 346 हाई स्कूल है। जिसमे 158 भवनहीन और भूमिहीन स्कूल और 9 स्कूल ऐसे है जिन्हे जमीन मिलने के बाद भवन निर्माण की स्वीकृति मिली है।