रामबाग के एक मंच पर ऐसा क्या हुआ… कि तालियों की गूंज में कई आँखें नम हो गईं, शिक्षा के अर्थ पर छिड़ी गहरी बहस, नन्हे कलाकारों ने रच दी अनकही कहानियाँ और अतिथियों के शब्दों ने बदल दी सोच.....‘द फाउंडेशन अकादमी’ के वार्षिकोत्सव की वो परतें, जो मंच से दिखीं भी… और बहुत कुछ चुपचाप छुपा भी रह गया; पूरा सच, भावनाएँ और अनसुनी झलकियाँ जानने के लिए पढ़िए विस्तृत विशेष रिपोर्ट.....

जब शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर जीवन की अनुभूतियों, संस्कारों और रचनात्मकता की धारा बन जाती है, तब विद्यालय एक संस्था नहीं, बल्कि समाज की आत्मा बन जाता है। रामबाग स्थित ‘द फाउंडेशन अकादमी’ में आयोजित वार्षिकोत्सव ने इसी जीवंत शिक्षा-दर्शन को एक बार फिर प्रमाणित किया। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि पूरे वर्ष के शैक्षणिक अनुशासन, सृजनात्मक श्रम, सामूहिक प्रयास और विद्यार्थियों की आत्मिक उन्नति का सार्वजनिक उत्सव बनकर सामने आया. पढ़े पूरी रिपोर्ट......

रामबाग के एक मंच पर ऐसा क्या हुआ… कि तालियों की गूंज में कई आँखें नम हो गईं, शिक्षा के अर्थ पर छिड़ी गहरी बहस, नन्हे कलाकारों ने रच दी अनकही कहानियाँ और अतिथियों के शब्दों ने बदल दी सोच.....‘द फाउंडेशन अकादमी’ के वार्षिकोत्सव की वो परतें, जो मंच से दिखीं भी… और बहुत कुछ चुपचाप छुपा भी रह गया; पूरा सच, भावनाएँ और अनसुनी झलकियाँ जानने के लिए पढ़िए विस्तृत विशेष रिपोर्ट.....
रामबाग के एक मंच पर ऐसा क्या हुआ… कि तालियों की गूंज में कई आँखें नम हो गईं, शिक्षा के अर्थ पर छिड़ी गहरी बहस, नन्हे कलाकारों ने रच दी अनकही कहानियाँ और अतिथियों के शब्दों ने बदल दी सोच.....‘द फाउंडेशन अकादमी’ के वार्षिकोत्सव की वो परतें, जो मंच से दिखीं भी… और बहुत कुछ चुपचाप छुपा भी रह गया; पूरा सच, भावनाएँ और अनसुनी झलकियाँ जानने के लिए पढ़िए विस्तृत विशेष रिपोर्ट.....

दरभंगा (रामबाग)। जब शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर जीवन की अनुभूतियों, संस्कारों और रचनात्मकता की धारा बन जाती है, तब विद्यालय एक संस्था नहीं, बल्कि समाज की आत्मा बन जाता है। रामबाग स्थित ‘द फाउंडेशन अकादमी’ में आयोजित वार्षिकोत्सव ने इसी जीवंत शिक्षा-दर्शन को एक बार फिर प्रमाणित किया। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि पूरे वर्ष के शैक्षणिक अनुशासन, सृजनात्मक श्रम, सामूहिक प्रयास और विद्यार्थियों की आत्मिक उन्नति का सार्वजनिक उत्सव बनकर सामने आया। भव्य सजावट, सुव्यवस्थित आयोजन, प्रेरणादायक वक्तव्य और लगभग 350 छात्र-छात्राओं की विविध प्रस्तुतियों ने समारोह को ऐसा स्वरूप दिया, जिसने उपस्थित अभिभावकों, शिक्षाविदों और समाज के प्रतिनिधियों को यह विश्वास दिलाया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल अंक अर्जित करना नहीं, बल्कि मनुष्य को जीवन के लिए तैयार करना है।

प्रारंभिक दृश्य: अनुशासन, सौंदर्य और उत्सवधर्मिता का संगम: कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश करते ही ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो शिक्षा और संस्कृति का कोई विशाल महोत्सव जीवंत हो उठा हो। रंगीन सजावट, प्रेरणादायक संदेशों से सुसज्जित दीवारें, विद्यार्थियों की कलात्मक कृतियाँ और सुव्यवस्थित बैठने की व्यवस्था इस बात का संकेत दे रही थी कि आयोजन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि विद्यालय परिवार की दीर्घकालिक तैयारी और समर्पण का परिणाम है। अभिभावकों की उत्सुकता, बच्चों के चेहरे पर आत्मविश्वास और शिक्षकों की सतर्कता....ये सभी दृश्य यह दर्शा रहे थे कि यह वार्षिकोत्सव विद्यालय की आत्मा का उत्सव है।

दीप प्रज्वलन: ज्ञान और प्रेरणा का शुभारंभ: समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि साउथ बिहार एवं नालंदा यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार तथा WIT के पूर्व निदेशक डॉ. एम. नेहाल सहित विशिष्ट अतिथियों और विद्यालय की प्राचार्या मंजरी कुमारी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। दीप की लौ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान, जागरूकता और निरंतर प्रगति का प्रतीक बनकर उपस्थित लोगों को प्रेरित कर रही थी। मंच पर उपस्थित अतिथियों में विद्यालय की निदेशिका सुगंधा चौधरी, दरभंगा पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. मदन कुमार मिश्रा, डॉ. रमन जी चौधरी, डीजेपीएस की प्राचार्या शालिनी कुमारी, दरभंगा पब्लिक स्कूल बंगाली टोला लहेरियासराय की प्राचार्या रेखा झा तथा अन्य शिक्षाविदों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और अधिक उन्नत बना दिया।

मुख्य अतिथि का प्रेरणादायक संदेश: शिक्षा का व्यापक अर्थ: डॉ. एम. नेहाल ने अपने संबोधन में शिक्षा को केवल परीक्षा और करियर की दृष्टि से नहीं, बल्कि मानवीय विकास के व्यापक संदर्भ में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ समाज से जुड़ना सीखना चाहिए। उनके अनुसार सच्ची शिक्षा वही है जो मन को खोलती है, सोचने की क्षमता विकसित करती है और व्यक्ति को समाज तथा विश्व से जोड़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे नैतिक मूल्यों को जीवन का आधार बनाएं और जीवन की वास्तविकताओं को समझते हुए अपने व्यक्तित्व का विकास करें। उनके वक्तव्य में अनुभव और संवेदनशीलता का अद्भुत समन्वय था, जिसने उपस्थित सभी लोगों को शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।

प्राचार्या मंजरी कुमारी का संबोधन: अनुशासन और संपूर्ण विकास की दिशा: प्राचार्या मंजरी कुमारी ने अपने संबोधन में विद्यालय की उपलब्धियों और शिक्षण दर्शन को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि विद्यालय का प्रयास केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को समय का मूल्य, नियमितता, पूर्ण उपस्थिति और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की क्षमता सिखाना है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वार्षिकोत्सव केवल मंचीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने और उनकी छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने का अवसर है।

निदेशिका सुगंधा चौधरी की दृष्टि: शिक्षा का बहुआयामी स्वरूप: विद्यालय की निदेशिका सुगंधा चौधरी ने शिक्षा के वास्तविक अर्थ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होती। ऐसे मंच बच्चों के आत्मविश्वास, रचनात्मकता, जिम्मेदारी और आत्म-अनुशासन को विकसित करते हैं। उन्होंने बताया कि यह वर्ष विद्यालय के लिए विशेष रहा है, जिसमें विद्यार्थियों ने शिक्षा, खेल, कला और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग को विद्यालय की सफलता का आधार बताया।

ट्रस्टी डॉ. विशाल गौरव की टिप्पणी: तेज़ी से उभरता शैक्षणिक संस्थान: विद्यालय के ट्रस्टी डॉ. विशाल गौरव ने अपने विचार रखते हुए कहा कि दरभंगा में वर्षों से अनेक विद्यालयों को बढ़ते देखा गया है, किंतु जिस गति और गुणवत्ता के साथ ‘द फाउंडेशन अकादमी’ ने अपनी पहचान बनाई है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने विद्यालय परिवार की मेहनत, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि संस्था का लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का महासंगम: चार विधाओं में प्रतिभा का विस्तार: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लगभग 350 छात्र-छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ रहीं, जिन्हें चार प्रमुख विधाओं.....संगीत, नृत्य, नाटक और सृजनात्मक अभिव्यक्ति....में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया। संगीत कार्यक्रमों ने पूरे वातावरण को मधुरता से भर दिया। वैभव द्वारा प्रस्तुत छठ गीत ने मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत कर दिया। कुशाग्र, मीरा और उनके साथियों द्वारा गाया स्वागत गीत समारोह की आत्मीय शुरुआत बना। वैभव और आराध्या द्वारा प्रस्तुत विद्यापति गीत ने दर्शकों को साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत की अनुभूति कराई। देश के लिए फौजियों के बलिदान पर आधारित नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा पर आधारित नृत्य-नाट्य ने साहस, आत्मबल और देशभक्ति का अद्भुत संदेश दिया। नाटक और सृजनात्मक प्रस्तुतियों में सामाजिक जागरूकता, नैतिकता और समकालीन मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की अभिनय क्षमता और मंचीय आत्मविश्वास ने दर्शकों को प्रभावित किया।

मंच संचालन और आयोजन टीम: विद्यार्थियों की नेतृत्व क्षमता: कार्यक्रम का सफल संचालन छात्रा लिनिशा और नीलाद्रि ने किया, जिन्होंने अपनी स्पष्ट अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास से पूरे आयोजन को सजीव बनाए रखा। संयोजन में कंचन, प्रज्ञा, अंकिता, पायल, विजय और श्रवण सहित शिक्षकों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धन्यवाद ज्ञापन शिक्षिका कंचन शर्मा ने किया, जिसमें उन्होंने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।

अभिभावकों की प्रतिक्रियाएँ: गर्व और भावुकता का मिश्रण: कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों की आँखों में गर्व और भावुकता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। बच्चों की प्रस्तुतियों पर तालियों की गूंज यह दर्शा रही थी कि विद्यालय ने शिक्षा को केवल अकादमिक सीमाओं से बाहर निकालकर जीवन का उत्सव बना दिया है। पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा गया। मंच सज्जा, ध्वनि व्यवस्था और प्रकाश संयोजन अत्यंत प्रभावशाली रहा। विद्यार्थियों और शिक्षकों की संयुक्त टीम ने आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाए रखा। समारोह ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति से जुड़ने का सेतु है। विभिन्न प्रस्तुतियों में पर्यावरण संरक्षण, देशभक्ति, सामाजिक समानता और नैतिक मूल्यों का संदेश स्पष्ट दिखाई दिया।

समापन: प्रेरणा, उत्साह और नए संकल्पों का संदेश: कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रस्तुति और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। वातावरण में संतोष, गर्व और भविष्य की आशा का अद्भुत मिश्रण दिखाई दे रहा था। ‘द फाउंडेशन अकादमी’ का यह वार्षिकोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षा के बहुआयामी स्वरूप का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया.....जहाँ ज्ञान, संस्कृति, अनुशासन और सृजनशीलता का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया। रामबाग की इस शैक्षणिक धरती पर आयोजित यह महोत्सव आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है.....एक ऐसा प्रेरक अध्याय, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि जब शिक्षा में संवेदना, समर्पण और सृजनशीलता का संगम होता है, तब विद्यालय केवल संस्था नहीं, बल्कि समाज की प्रगति का आधार बन जाता है।