डीएमसीएच का दर्दनाक सच: नशामुक्ति केंद्र की करुण पुकार, अस्पताल प्रशासन की गाज कब गिरेगी?

दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (डीएमसीएच) में एक अनपेक्षित तूफान उठ खड़ा हुआ। नशामुक्ति केंद्र की बदहाली और वहां व्याप्त कुव्यवस्था की सच्चाई ने सबको स्तब्ध कर दिया। यह खुलासा उस समय हुआ, जब बुधवार की दोपहर केंद्र के निरीक्षण में वहां की स्थिति दयनीय पाई गई. पढ़े पुरी खबर......

डीएमसीएच का दर्दनाक सच: नशामुक्ति केंद्र की करुण पुकार, अस्पताल प्रशासन की गाज कब गिरेगी?
डीएमसीएच का दर्दनाक सच: नशामुक्ति केंद्र की करुण पुकार, अस्पताल प्रशासन की गाज कब गिरेगी?; फोटो: मिथिला जन जन की आवाज

दरभंगा: दरभंगा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (डीएमसीएच) में एक अनपेक्षित तूफान उठ खड़ा हुआ। नशामुक्ति केंद्र की बदहाली और वहां व्याप्त कुव्यवस्था की सच्चाई ने सबको स्तब्ध कर दिया। यह खुलासा उस समय हुआ, जब बुधवार की दोपहर केंद्र के निरीक्षण में वहां की स्थिति दयनीय पाई गई।

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नशे की जंजीरों से मुक्ति पाने के लिए इलाजरत युवाओं की देखरेख का दायित्व मात्र एक आउटसोर्सिंग वार्ड अटेंडेंट के कंधों पर था। दोपहर ढाई बजे की सैर में न चिकित्सकों का साया दिखा, न नर्सों की छाया पड़ी। खाली कुर्सियां और सूने वार्ड इस बात के मूक साक्षी बने कि यहाँ सेवा की जगह उपेक्षा का राज्य है। यदि किसी मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाए, तो संकट के बादल मंडराने में देर न लगेगी।

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इस दुर्दशा की परतें और गहरी हुईं, जब पता चला कि मरीजों पर नजर रखने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे वर्षों से धूल फांक रहे हैं, उनकी आंखें बंद पड़ी हैं। जीवन रक्षक औषधियों का भंडार भी खाली है; कई दिनों से जरूरी दवाएं गायब हैं, जिसके चलते मरीजों को अपनी जेब ढीली कर बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। मनोरंजन के नाम पर एक टीवी तो चालू है, पर अन्य साधनों की कमी मन को उदास कर देती है। शाम ढलते ही चाय और बिस्किट की छोटी-सी सांत्वना भी इन मरीजों से दूर है, जो उनकी रिकवरी के सफर को और बोझिल बना रही है।

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बता दें कि नशामुक्ति केंद्र में औषधियों के साथ-साथ मरीजों की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने का भार डीएमसीएच प्रबंधन के कंधों पर है। वहीं, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मियों की व्यवस्था का दायित्व सिविल सर्जन कार्यालय निभाता है। रोस्टर चार्ट के अनुसार ड्यूटी निर्धारित होने के बावजूद, बुधवार की दोपहर सभी के गायब रहने का दृश्य मरीजों के स्वास्थ्य के साथ एक क्रूर खिलवाड़ को उजागर करता है। यह लापरवाही न केवल व्यवस्था की खामियों को नंगा करती है, बल्कि उन आशाओं को भी ठेस पहुंचाती है, जो यहाँ मुक्ति की राह तलाशने आए हैं।

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इस बीच, उपाधीक्षक सुरेंद्र कुमार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे शीघ्र ही नशामुक्ति केंद्र का दौरा करेंगे। वहां की कमियों को दूर करने का संकल्प लिया गया है। साथ ही, ड्यूटी से नदारद पाए गए लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिविल सर्जन को पत्र लिखा जाएगा। यह आश्वासन एक उम्मीद की किरण तो जरूर है, पर अब सवाल यह उठता है कि आखिर ड्यूटी से नदारद इन लापरवाहों पर अस्पताल प्रशासन की गाज कब गिरेगी? क्या यह बस कागजी वादों का ढोल पीटने की रस्म होगी, या सचमुच कोई ठोस कदम उठेगा? इस सवाल के जवाब पर जनता की पैनी नज़र टिकी है, ताकि सच का आईना सबके सामने आए और व्यवस्था में जवाबदेही का अलख जगे।

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यह खबर आग की तरह फैली और कर्मचारियों से लेकर मरीजों के परिजनों तक में हड़कंप मच गया। सिविल सर्जन कार्यालय की चुप्पी और प्रशासन की उदासीनता पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नशामुक्ति केंद्र, जो आशा का दीपक जलाने का दावा करता है, वह खुद अंधेरे में डूबा नजर आया। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बदहाली को देखते हुए प्रशासन क्या कदम उठाता है, या यह सवाल भी समय की धूल में दफन हो जाएगा।