उपमुख्यमंत्री के नमन, रामबाग पैलेस के स्मृति-प्रांगण और महारानी कामसुंदरी देवी की निःशब्द उपस्थिति के बीच घटित एक ऐतिहासिक संध्या की दीर्घ आख्यायिका.... पढ़ें रिपोर्ट…
मिथिला की पवित्र धरा पर जब किसी जननायक के चरण पड़ते हैं, तो वह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं रह जाती......वह स्मृतियों, संवेदनाओं और इतिहास के पुनर्पाठ का अवसर बन जाती है। शुक्रवार की देर संध्या, जब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा दरभंगा पहुँचे, तब शहर की हवाओं में केवल स्वागत का शोर नहीं था, बल्कि उस विरासत की गूँज भी थी जिसने सदियों से बिहार और भारत की चेतना को दिशा दी है. पढ़े पूरी खबर......
दरभंगा: मिथिला की पवित्र धरा पर जब किसी जननायक के चरण पड़ते हैं, तो वह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं रह जाती......वह स्मृतियों, संवेदनाओं और इतिहास के पुनर्पाठ का अवसर बन जाती है। शुक्रवार की देर संध्या, जब उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा दरभंगा पहुँचे, तब शहर की हवाओं में केवल स्वागत का शोर नहीं था, बल्कि उस विरासत की गूँज भी थी जिसने सदियों से बिहार और भारत की चेतना को दिशा दी है।

दरभंगा आगमन पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष आदित्य नारायण चौधरी सहित असंख्य कार्यकर्ताओं ने उपमुख्यमंत्री का भव्य और आत्मीय स्वागत किया। पुष्पवर्षा, नारों की अनुगूँज और कार्यकर्ताओं की चमकती आँखों में केवल राजनीतिक उत्साह नहीं, बल्कि मिथिला के प्रति गर्व का भाव स्पष्ट झलक रहा था। यह स्वागत किसी औपचारिकता का निर्वहन नहीं, बल्कि अपने अतीत के प्रति सम्मान और वर्तमान के प्रति आशा का उद्घोष था।

कार्यकर्ताओं से संक्षिप्त संवाद के उपरांत उपमुख्यमंत्री सीधे दरभंगा की ऐतिहासिक स्मृतियों के केन्द्र......कुमार कपिलेश्वर सिंह के आवास......पहुंचे। यह वही आवास है, जहाँ मिथिला की राजसी परंपराएँ आज भी मौन भाषा में इतिहास सुनाती हैं। यहाँ उन्होंने महारानी कामसुंदरी देवी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। जैसे ही उपमुख्यमंत्री ने महारानी के चित्र पर माल्यार्पण किया, वातावरण में एक गहरी शांति उतर आई.......मानो समय स्वयं कुछ क्षणों के लिए ठहर गया हो।

इस अवसर पर कुमार कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह ने उपमुख्यमंत्री का स्वागत किया। यह स्वागत केवल अतिथि-सत्कार नहीं था, बल्कि उस परंपरा का निर्वाह था, जहाँ शोक भी गरिमा और गौरव के साथ व्यक्त किया जाता है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि महारानी का जीवन केवल एक राजपरिवार की स्मृति नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अध्याय है।

अपने उद्बोधन में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दरभंगा महाराज की भूमिका बिहार ही नहीं, पूरे देश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने स्मरण कराया कि शिक्षा, संस्कृति, कला और सामाजिक संरचना के निर्माण में दरभंगा राज का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है। यह कथन केवल इतिहास का पाठ नहीं था, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक गंभीर प्रयास था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की विरासत को विकास के साथ जोड़कर सम्मान देने का कार्य कर रहे हैं। यह विचार केवल नारा नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टि है......जहाँ अतीत को बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की नींव माना जाता है। उपमुख्यमंत्री के शब्दों में वह दृढ़ विश्वास झलक रहा था कि जिस समाज को अपनी विरासत का बोध होता है, वही समाज सतत और समावेशी विकास की ओर अग्रसर होता है।

शनिवार को आयोजित होने वाले भूमि सुधार जन कल्याण संवाद कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह संवाद केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि जन-संवेदना का मंच है। यहाँ वे स्वयं जिले के लोगों की जमीन से जुड़ी समस्याओं को सुनेंगे, समझेंगे और समाधान की दिशा में ठोस पहल करेंगे। कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ पूर्ण कर ली गई हैं, और प्रशासनिक तंत्र को इस प्रकार सजग किया गया है कि प्रत्येक फरियादी की आवाज़ सम्मान के साथ सुनी जाए।

कुमार कपिलेश्वर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि उपमुख्यमंत्री द्वारा उनकी दादी महारानी कामसुंदरी देवी के चित्र पर माल्यार्पण करना उनके परिवार के लिए भावनात्मक क्षण था। उन्होंने बताया कि उपमुख्यमंत्री ने दरभंगा महाराज द्वारा बिहार और देश के लिए किए गए कार्यों की सराहना की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शासन की दृष्टि केवल वर्तमान पर नहीं, बल्कि इतिहास की निरंतरता पर भी टिकी है। इस अवसर पर दरभंगा के इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पुस्तक भी उपमुख्यमंत्री को भेंट की गई......मानो स्मृतियों की थाती को शासन के हाथों सौंप दिया गया हो।

पत्रकारों से बातचीत में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि वे मिथिला की गौरवशाली विरासत को नमन करने आए हैं। उनके शब्दों में भावनात्मक दृढ़ता थी “विरासत ही विकास की नींव है।” उन्होंने कहा कि जिस दिन समाज अपनी विरासत का सम्मान करना सीख लेगा, उस दिन विकास की गति चौगुनी हो जाएगी। यह कथन केवल दार्शनिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रासंगिक है।

दरभंगा महाराज की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि पूरा देश इस योगदान पर गर्व करता है। यह गर्व केवल अतीत की उपलब्धियों पर नहीं, बल्कि उस प्रेरणा पर है जो आने वाली पीढ़ियों को दिशा देती है। मिथिला की भूमि, जहाँ विद्या और विवेक की परंपरा रही है, आज भी उसी ऊर्जा के साथ विकास की नई इबारत लिखने को तत्पर है।

यह पूरा प्रवास दरअसल संवेदना, स्मृति और संकल्प का संगम था। एक ओर शोक की निस्तब्धता थी, तो दूसरी ओर जनकल्याण संवाद का जीवंत संकल्प। उपमुख्यमंत्री का यह दौरा यह संदेश देकर गया कि राजनीति यदि इतिहास से संवाद करे और संवेदना से संचालित हो, तो वह केवल सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के उत्थान का साधन बन जाती है। मिथिला ने इस प्रवास में केवल एक उपमुख्यमंत्री का स्वागत नहीं किया......उसने अपने अतीत को सम्मान, वर्तमान को संवाद और भविष्य को आशा के साथ गले लगाया।
