आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास बुझ गया ‘शिवम चिकन बिरयानी’ चलाने वाले अतीश का चिराग, कौन था अतीश कुमार यादव? कैसे एक टक्कर ने छीन लिया बेटे से पिता और पत्नी से जीवनसाथी.... पूरी दर्दनाक कहानी पढ़िए।

शनिवार की देर रात दरभंगा की सड़कों पर एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक हँसता-खेलता परिवार पल भर में उजाड़ दिया। सड़क पर बेखौफ घूम रहे आवारा पशु से बुलेट की टक्कर ने एक युवा की जिंदगी छीन ली। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए युवक ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी की जंग हार दी। मृतक की पहचान सिमरी थाना क्षेत्र के सिमरी तेलिया पोखर निवासी रामचंद्र यादव के 30 वर्षीय पुत्र अतीश कुमार यादव के रूप में हुई है. पढ़े पूरी खबर.......

आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास बुझ गया ‘शिवम चिकन बिरयानी’ चलाने वाले अतीश का चिराग, कौन था अतीश कुमार यादव? कैसे एक टक्कर ने छीन लिया बेटे से पिता और पत्नी से जीवनसाथी.... पूरी दर्दनाक कहानी पढ़िए।
(बाएं) सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त वही बुलेट बाइक, जिसे पुलिस ने जब्त कर थाना परिसर में रखा है। (दाएं) हादसे में जान गंवाने वाले अतीश कुमार यादव की तस्वीर.... एक मेहनती युवक, जिसकी जिंदगी एक आवारा पशु से टक्कर में असमय थम गई।

दरभंगा। शनिवार की देर रात दरभंगा की सड़कों पर एक ऐसा मंजर सामने आया, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक हँसता-खेलता परिवार पल भर में उजाड़ दिया। सड़क पर बेखौफ घूम रहे आवारा पशु से बुलेट की टक्कर ने एक युवा की जिंदगी छीन ली। इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए युवक ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही जिंदगी की जंग हार दी। मृतक की पहचान सिमरी थाना क्षेत्र के सिमरी तेलिया पोखर निवासी रामचंद्र यादव के 30 वर्षीय पुत्र अतीश कुमार यादव के रूप में हुई है।

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दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, मौत रास्ते में इंतज़ार कर रही थी: परिजनों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, अतीश कुमार यादव कादिराबाद स्थित राम दरबार के पास ‘शिवम चिकन बिरयानी’ नाम से छोटी-सी दुकान चलाते थे। शनिवार की रात करीब 10:30 बजे वह रोज़ की तरह दुकान बंद कर बाइक से घर लौट रहे थे।लेकिन किसे पता था कि यह उनकी आख़िरी यात्रा होगी।जैसे ही उनकी बाइक आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास पहुंची, अचानक सड़क पर घूम रहे एक आवारा पशु से उनकी बुलेट की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि अतीश सड़क पर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

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सड़क पर तड़पता रहा युवक, फिर अस्पताल में थम गई सांसें: हादसे के बाद सड़क पर खून से लथपथ पड़े युवक को देख स्थानीय लोगों का दिल दहल उठा। इंसानियत दिखाते हुए आसपास के लोग दौड़े, बिना देर किए घायल युवक को डीएमसीएच के इमरजेंसी विभाग पहुंचाया गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। डॉक्टरों ने जांच के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया। इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी जिंदगी खत्म हो चुकी थी।

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पोस्टमार्टम हाउस में मातम, घर में कोहराम: रविवार को पुलिस ने डीएमसीएच में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। पोस्टमार्टम हाउस परिसर में मौजूद मृतक के बहनोई राजेश कुमार यादव ने बताया कि अतीश परिवार की रीढ़ था। वह मेहनती था… अपने छोटे से कारोबार से घर चला रहा था… अब सब कुछ खत्म हो गया।

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छह भाई-बहनों में सबसे छोटा, लेकिन परिवार का सबसे बड़ा सहारा: परिजनों के अनुसार, अतीश छह भाई-बहनों में सबसे छोटा था, लेकिन जिम्मेदारियों का बोझ उसी के कंधों पर था। उसकी असमय मौत से उसके इकलौते मासूम बेटे के सिर से पिता का साया उठ गया। पत्नी बेसुध है, बच्चा पिता को ढूंढ रहा है, और घर की दीवारें चुपचाप इस त्रासदी की गवाही दे रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर थी। अब रोज़ी-रोटी, बच्चे की परवरिश और पत्नी के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया है।

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परिजनों की गुहार: मुआवजा नहीं मिला तो बुझ जाएगा चूल्हा: शोकाकुल परिजनों ने सरकार और प्रशासन से मुआवजे की मांग की है, ताकि मृतक के बेटे का भविष्य और पत्नी की जिंदगी किसी तरह संभल सके। यह सिर्फ एक परिवार की मांग नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जो सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं को रोकने में आज तक नाकाम रही है। विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। घायल युवक को डीएमसीएच में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। आवेदन मिलने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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दरभंगा की सड़कों पर घूमते आवारा पशु अब मूक हत्यारे बन चुके हैं। हर दिन कोई न कोई घर उजड़ रहा है, हर रात किसी मां की गोद सूनी हो रही है। प्रशासन की लापरवाही और व्यवस्था की चुप्पी ने एक और जान ले ली। आज अतीश था, कल कोई और हो सकता है।आखिर कब तक आवारा पशु जान लेते रहेंगे? कब जागेगा प्रशासन? कब सुरक्षित होंगी दरभंगा की रातें?जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, तब तक ऐसी दर्दनाक खबरें लिखी जाती रहेंगी… और हर खबर के साथ एक घर हमेशा के लिए उजड़ता रहेगा।