पाग, मखाना और मिथिला की अस्मिता के बीच दरभंगा में गूंजा विकास का शंखनाद… सम्राट चौधरी ने एयरपोर्ट, एम्स और हवाई क्रांति की खोली नई पटकथा, CISF सुरक्षा घेरे में हुआ भव्य स्वागत, तो संजय झा ने छेड़ दी दरभंगा एयरपोर्ट को ‘बाबा विद्यापति अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा’ बनाने की सबसे बड़ी मांग… जानिए आखिर क्यों अब दरभंगा को बिहार की नई उड़ान और मिथिला के बदलते भविष्य का सबसे बड़ा द्वार माना जा रहा है!
मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले Darbhanga ने गुरुवार को एक बार फिर सत्ता, प्रशासन और विकास की बड़ी गतिविधियों को अपने भीतर समेट लिया। सुबह से ही शहर का माहौल राजनीतिक सरगर्मियों, सुरक्षा व्यवस्था और विकास परियोजनाओं की चर्चाओं से गर्म रहा। बिहार सरकार के वरिष्ठ नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने यह साफ संकेत दे दिया कि अब दरभंगा केवल एक ऐतिहासिक शहर भर नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की नई विकास धुरी के रूप में तेजी से उभर रहा है. पढ़े पूरी खबर.....
मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले Darbhanga ने गुरुवार को एक बार फिर सत्ता, प्रशासन और विकास की बड़ी गतिविधियों को अपने भीतर समेट लिया। सुबह से ही शहर का माहौल राजनीतिक सरगर्मियों, सुरक्षा व्यवस्था और विकास परियोजनाओं की चर्चाओं से गर्म रहा। बिहार सरकार के वरिष्ठ नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने यह साफ संकेत दे दिया कि अब दरभंगा केवल एक ऐतिहासिक शहर भर नहीं रह गया है, बल्कि बिहार की नई विकास धुरी के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के दरभंगा आगमन को लेकर एयरपोर्ट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक व्यापक तैयारियां की गई थीं। मिथिला की पारंपरिक संस्कृति के अनुरूप उनका स्वागत पाग, चादर और मखाना की माला से किया गया। इस स्वागत में बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, सांसद गोपाल जी ठाकुर, विधायक मुरारी मोहन झा और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा प्रमुख रूप से मौजूद रहे। मंच पर दिखाई देने वाली यह तस्वीर केवल औपचारिक स्वागत भर नहीं थी, बल्कि मिथिला की राजनीति में बढ़ती सक्रियता और केंद्र-राज्य समन्वय का भी संकेत मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री के दरभंगा पहुंचते ही एयरपोर्ट परिसर पूरी तरह सुरक्षा घेरे में तब्दील दिखाई दिया। हाल ही में दरभंगा एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फाॅर्स यानी CISF को सौंपे जाने के बाद यह पहला बड़ा अवसर था, जब सुरक्षा तंत्र की व्यापक समीक्षा की गई। एयरपोर्ट पर तैनात CISF जवानों ने मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया। जवानों की अनुशासित उपस्थिति और सुरक्षा व्यवस्था ने यह स्पष्ट कर दिया कि दरभंगा एयरपोर्ट अब केवल क्षेत्रीय उड़ानों का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व के एयर नेटवर्क का हिस्सा बन चुका है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने बिहार में हवाई सेवाओं के विस्तार को लेकर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्तमान एयर कनेक्टिविटी राज्य की जनसंख्या और संभावनाओं के मुकाबले अभी काफी सीमित है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बिहार से लगभग 59 लाख लोग हवाई यात्रा करते हैं, लेकिन सरकार की योजना अगले पांच वर्षों के भीतर इस संख्या को चार से पांच करोड़ तक पहुंचाने की है। यह बयान केवल आंकड़ों का खेल नहीं था, बल्कि बिहार की बदलती आर्थिक और सामाजिक तस्वीर का संकेत भी माना जा रहा है। लंबे समय तक पलायन, पिछड़ेपन और कमजोर आधारभूत संरचना की पहचान झेलने वाला बिहार अब एयर कनेक्टिविटी को विकास की नई धुरी बनाने की तैयारी में दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। दरभंगा एयरपोर्ट को इस परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वर्षों पहले तक मिथिला क्षेत्र के लोगों के लिए हवाई यात्रा एक सपना जैसी थी, लेकिन आज दरभंगा से हजारों लोग नियमित उड़ान भर रहे हैं। इससे व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में भी बड़ा बदलाव आया है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री द्वारा दरभंगा को दी गई बड़ी परियोजनाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नया एयरपोर्ट टर्मिनल भवन और एम्स जैसी परियोजनाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि आने वाले समय में पूरे मिथिला क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक दिशा बदलने वाली पहल हैं। उन्होंने कहा कि दरभंगा में एम्स निर्माण से न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा, बल्कि उत्तर बिहार के लाखों लोगों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों की ओर भागना नहीं पड़ेगा।मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नितीश कुमार के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मिथिला क्षेत्र में सड़क नेटवर्क के विस्तार, एयरपोर्ट निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने और आधारभूत संरचना को मजबूत करने में नीतीश कुमार सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनके अनुसार, आज जो विकास दिखाई दे रहा है, उसकी बुनियाद वर्षों पहले रखी गई थी।

कार्यक्रम में बोलते हुए जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने भी दरभंगा एयरपोर्ट को लेकर बड़ी मांग रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को हवाई सेवाओं और एयर नेटवर्क की गहरी समझ है, और यही कारण है कि वे इस क्षेत्र के विकास कार्यों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। संजय झा ने मांग की कि दरभंगा एयरपोर्ट का नाम मिथिला के महान कवि बाबा विद्यापति के नाम पर रखा जाए। साथ ही उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा देने की भी मांग उठाई। संजय झा की इस मांग को कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने गंभीरता से सुना। मिथिला क्षेत्र में लंबे समय से यह आवाज उठती रही है कि दरभंगा एयरपोर्ट को केवल घरेलू उड़ानों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। नेपाल की निकटता, मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और विदेशों में बसे बड़ी संख्या में मिथिलावासियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावना लगातार चर्चा में रही है।

कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक संदेश भी साफ दिखाई दिए। भाजपा और जदयू नेताओं की संयुक्त मौजूदगी ने यह संकेत देने की कोशिश की कि विकास परियोजनाओं को लेकर सत्ता पक्ष एकजुट होकर काम कर रहा है। मंच से बार-बार मिथिला के विकास, रोजगार, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी की बात उठाई गई। हालांकि स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी होती रही कि घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच की दूरी कितनी जल्दी खत्म होगी।दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन को लेकर भी लोगों में खास उत्साह देखा गया। वर्तमान में सीमित संसाधनों और भीड़भाड़ की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में नए टर्मिनल के निर्माण से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं एम्स परियोजना को लेकर भी लोगों की निगाहें सरकार की गति पर टिकी हुई हैं, क्योंकि उत्तर बिहार के स्वास्थ्य ढांचे को लंबे समय से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है।

मिथिला की राजनीति में यह दौरा केवल एक प्रशासनिक समीक्षा नहीं माना जा रहा, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक दिशा और विकास की प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जा रहा है। पाग, मखाना और पारंपरिक सम्मान के बीच आयोजित यह कार्यक्रम विकास, राजनीति और क्षेत्रीय अस्मिता तीनों के संगम का दृश्य प्रस्तुत करता दिखाई दिया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दरभंगा को लेकर किए गए दावे और योजनाएं आने वाले वर्षों में जमीन पर किस गति से उतरती हैं। क्योंकि मिथिला की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि बदलाव की स्पष्ट तस्वीर देखना चाहती है।
