दिल्ली मोड़ स्थित Darbhanga Public School में परिणामों की ऐसी गूंज, जिसने पूरे दरभंगा के शैक्षणिक माहौल को झकझोर दिया..... 100% सफलता के पीछे आखिर कौन हैं वे मेधावी चेहरे, जिनकी अनगिनत जागी रातों, मौन संघर्षों और अंकों के विस्फोट ने शिक्षा-जगत में मचा दी सनसनी; जानिए इस विशेष रिपोर्ट में कैसे इन विद्यार्थियों ने प्रतिभा की चमक से दरभंगा का नाम नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया।
जब किसी शिक्षण संस्थान का परिणाम केवल अंकों का विवरण न रहकर अनुशासन, संस्कार, समर्पण और सतत शैक्षणिक साधना की जीवंत अभिव्यक्ति बन जाए, तब वह उपलब्धि सामान्य नहीं रहती। वह एक परंपरा बन जाती है..... एक ऐसी परंपरा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बनती है। दिल्ली मोड़ के समीप अवस्थित Darbhanga Public School ने एक बार फिर इसी गौरवपूर्ण परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) बारहवीं परीक्षा परिणाम में शत-प्रतिशत सफलता अर्जित कर यह सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम की पूर्ति नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की एक सतत साधना है। विद्यालय के सभी 92 छात्र-छात्राओं ने सफलता प्राप्त कर न केवल संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को पुनः सुदृढ़ किया है, बल्कि दरभंगा सहित सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र के शिक्षा-जगत में गौरव की एक नई रेखा भी खींच दी है. पढ़े पूरी रिपोर्ट....
दरभंगा। जब किसी शिक्षण संस्थान का परिणाम केवल अंकों का विवरण न रहकर अनुशासन, संस्कार, समर्पण और सतत शैक्षणिक साधना की जीवंत अभिव्यक्ति बन जाए, तब वह उपलब्धि सामान्य नहीं रहती। वह एक परंपरा बन जाती है..... एक ऐसी परंपरा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत बनती है। दिल्ली मोड़ के समीप अवस्थित Darbhanga Public School ने एक बार फिर इसी गौरवपूर्ण परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) बारहवीं परीक्षा परिणाम में शत-प्रतिशत सफलता अर्जित कर यह सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम की पूर्ति नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की एक सतत साधना है। विद्यालय के सभी 92 छात्र-छात्राओं ने सफलता प्राप्त कर न केवल संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को पुनः सुदृढ़ किया है, बल्कि दरभंगा सहित सम्पूर्ण मिथिला क्षेत्र के शिक्षा-जगत में गौरव की एक नई रेखा भी खींच दी है। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में उल्लास, आत्मगौरव और भावनात्मक संतोष का ऐसा वातावरण उत्पन्न हुआ, मानो वर्षों की मेहनत एक साथ मुस्कुरा उठी हो।

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एक परिणाम नहीं, बल्कि विश्वास की पुनर्पुष्टि: शिक्षा के क्षेत्र में कुछ संस्थान ऐसे होते हैं, जिनके परिणामों की प्रतीक्षा केवल अभिभावक या विद्यार्थी ही नहीं करते, बल्कि पूरा समाज करता है। कारण यह होता है कि वे संस्थान अपने भीतर केवल पढ़ाई का ढाँचा नहीं, बल्कि एक वैचारिक संस्कृति विकसित करते हैं। Darbhanga Public School आज उसी श्रेणी में स्वयं को स्थापित करता दिखाई दे रहा है। इस वर्ष के परिणाम ने यह प्रमाणित किया है कि विद्यालय की शैक्षणिक संरचना केवल परीक्षा-उन्मुख नहीं, बल्कि विद्यार्थी-केंद्रित है। यहाँ शिक्षा को प्रतिस्पर्धा की अंधी दौड़ नहीं, बल्कि आत्मविकास और बौद्धिक परिपक्वता की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष विद्यालय के परिणाम केवल अच्छे नहीं आते, बल्कि वे एक स्थायी उत्कृष्टता की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।

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विज्ञान संकाय में कृति कुमारी बनीं सफलता का शिखर: इस वर्ष विज्ञान संकाय में विद्यालय की सर्वोच्च उपलब्धि हासिल करने वाली छात्रा रहीं कृति कुमारी, जिन्होंने 93.0 प्रतिशत अंक प्राप्त कर विद्यालय टॉपर बनने का गौरव अर्जित किया। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम छात्राओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखती हैं। कृति के पिता डॉ. राधा कृष्ण झा पेशे से चिकित्सक हैं, जबकि उनकी माता कुमारी मिनाक्षी शिक्षिका हैं। एक ऐसे परिवार से आने वाली कृति ने शिक्षा और अनुशासन को अपने जीवन का आधार बनाया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों तथा नियमित अध्ययन को दिया। कृति का सपना डॉक्टर बनकर समाज सेवा करना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे आगे चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में योगदान देना चाहती हैं। आज जब समाज में चिकित्सा क्षेत्र केवल पेशा नहीं बल्कि मानवता की सबसे महत्वपूर्ण सेवा माना जाता है, तब कृति जैसी प्रतिभाएँ भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं।

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वाणिज्य संकाय में पियुष कुमार का उल्लेखनीय प्रदर्शन: जहाँ विज्ञान संकाय में कृति ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया, वहीं वाणिज्य संकाय में पियूष कुमार ने 90.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सर्वोच्च स्थान हासिल किया। पियुष के पिता चिरंजीव दास व्यवसायी हैं, जबकि उनकी माता ममता देवी गृहिणी हैं। पियुष की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि विद्यार्थी अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट हों, तो वे किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य भविष्य में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई कर प्रबंधन एवं व्यवसाय के क्षेत्र में अपना करियर बनाना है। आज के बदलते आर्थिक और व्यावसायिक परिवेश में ऐसे विद्यार्थियों की आवश्यकता है जो केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि नेतृत्व और प्रबंधन क्षमता से समाज को नई दिशा देने वाले बनें। पियुष की उपलब्धि उसी संभावना की ओर संकेत करती है।

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सौम्य किरण की अद्वितीय उपलब्धि.... जीवविज्ञान में शत-प्रतिशत अंक: इस वर्ष के परिणाम की सबसे विशेष उपलब्धियों में से एक रही छात्र सौम्य किरण की सफलता, जिन्होंने जीवविज्ञान विषय में 100 में 100 अंक प्राप्त कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया। किसी विषय में पूर्णांक प्राप्त करना केवल स्मरणशक्ति का परिणाम नहीं होता, बल्कि उस विषय की गहरी समझ, निरंतर अभ्यास और मानसिक अनुशासन का प्रमाण होता है। सौम्य किरण की यह उपलब्धि आने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

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100 प्रतिशत परिणाम अनुशासन और शिक्षण गुणवत्ता का दर्पण: विद्यालय के प्राचार्य डॉ. एम. के. मिश्रा ने परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों का अनुशासन, निरंतर परिश्रम और शिक्षकों का समर्पित मार्गदर्शन इस सफलता का आधार है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। यही कारण है कि विद्यालय में शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व विकास और सामाजिक चेतना पर भी विशेष बल दिया जाता है। विद्यालय प्रबंधन की ओर से डॉ. विशाल गौरव ने सभी सफल विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिणाम की वास्तविक शक्ति केवल अंकों में नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया में होती है जिसके माध्यम से विद्यार्थी वहाँ तक पहुँचते हैं। विद्यालय का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो भविष्य में केवल सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक भी बनें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भी विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता की यह परंपरा बनाए रखेगा।

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पिछले वर्षों की सफलता से आगे का सफर: यदि पिछले वर्षों के परीक्षा परिणामों पर दृष्टि डाली जाए, तो स्पष्ट होता है कि दरभंगा पब्लिक स्कूल निरंतर प्रगति की राह पर अग्रसर रहा है। विद्यालय ने पिछले वर्षों में भी उत्कृष्ट परिणाम दिए थे, जहाँ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर संस्थान की प्रतिष्ठा को मजबूत किया था। विशेष रूप से हाल ही में घोषित कक्षा 10वीं के परिणाम में भी विद्यालय ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की थी, जहाँ लगभग हर चार में से एक विद्यार्थी ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर विद्यालय की शैक्षणिक क्षमता का परिचय दिया था। उस परिणाम ने पहले ही यह संकेत दे दिया था कि विद्यालय केवल एक बार की उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर उत्कृष्टता की संस्कृति विकसित कर चुका है। अब बारहवीं के परिणाम ने उस विश्वास को और मजबूत कर दिया है। दरभंगा शहर का दिल्ली मोड़ क्षेत्र आज केवल भौगोलिक पहचान तक सीमित नहीं रह गया है। शिक्षा के क्षेत्र में यहाँ से उठती उपलब्धियों ने इसे एक नई पहचान दी है। दरभंगा पब्लिक स्कूल ने अपने शैक्षणिक वातावरण, अनुभवी शिक्षकों और अनुशासित व्यवस्था के माध्यम से यह सिद्ध कर दिया है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। विद्यालय में आधुनिक शिक्षण पद्धति, नियमित मूल्यांकन, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और विद्यार्थियों के मानसिक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि यहाँ के विद्यार्थी केवल अच्छे अंक ही नहीं लाते, बल्कि आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ते हैं।

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अभिभावकों का विश्वास और शिक्षकों का समर्पण: किसी भी विद्यालय की सफलता केवल विद्यार्थियों के प्रयास से संभव नहीं होती। उसके पीछे अभिभावकों का विश्वास और शिक्षकों का अथक परिश्रम भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। इस परिणाम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि जब शिक्षक केवल नौकरी नहीं, बल्कि मिशन की भावना से कार्य करते हैं, तब परिणाम असाधारण होते हैं। विद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया। आज जब शिक्षा का बड़ा हिस्सा केवल अंकों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित होता जा रहा है, ऐसे समय में दरभंगा पब्लिक स्कूल जैसे संस्थान यह संदेश देते हैं कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल परीक्षा पास कराना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण करना है। विद्यालय के परिणामों में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि यहाँ विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और लक्ष्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा दी जाती है। बारहवीं परीक्षा परिणाम 2026 ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि दरभंगा पब्लिक स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी शैक्षणिक परंपरा है जहाँ मेहनत को दिशा मिलती है, सपनों को आकार मिलता है और प्रतिभा को मंच मिलता है। 92 विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत सफलता केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सामूहिक विश्वास की विजय है जिसमें विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन..... सभी समान रूप से सहभागी हैं। यह परिणाम आने वाले वर्षों के लिए केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि एक मानक भी है। और यदि यही समर्पण, अनुशासन और गुणवत्ता बनी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब दरभंगा की यह शैक्षणिक ज्योति राष्ट्रीय शिक्षा-जगत में और भी अधिक प्रखरता के साथ प्रकाशित होगी।
