पघारी से दिल्ली विश्वविद्यालय तक हर्षना कुमारी चौधरी की सशक्त मौजूदगी, शहीद भगत सिंह कॉलेज छात्र संघ चुनाव में केंद्रीय काउंसलर पद पर जीत से दरभंगा का नाम रोशन; राष्ट्रीय स्तर की टेबल टेनिस खिलाड़ी ने छात्र हितों, संवाद और गलत के खिलाफ आवाज को बनाया अपनी नई जिम्मेदारी का आधार

बिहार के दरभंगा जिले के पघारी गांव से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित शहीद भगत सिंह कॉलेज तक पहुंची हर्षना कुमारी चौधरी ने छात्र संघ चुनाव 2026 में केंद्रीय काउंसलर पद पर जीत दर्ज कर अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने न केवल कॉलेज परिसर में उन्हें नई जिम्मेदारी दी है, बल्कि दरभंगा और मिथिलांचल के लिए भी गौरव का अवसर पैदा किया है. पढ़े पूरी खबर....

पघारी से दिल्ली विश्वविद्यालय तक हर्षना कुमारी चौधरी की सशक्त मौजूदगी, शहीद भगत सिंह कॉलेज छात्र संघ चुनाव में केंद्रीय काउंसलर पद पर जीत से दरभंगा का नाम रोशन; राष्ट्रीय स्तर की टेबल टेनिस खिलाड़ी ने छात्र हितों, संवाद और गलत के खिलाफ आवाज को बनाया अपनी नई जिम्मेदारी का आधार
पघारी से दिल्ली विश्वविद्यालय तक हर्षना कुमारी चौधरी की सशक्त मौजूदगी, शहीद भगत सिंह कॉलेज छात्र संघ चुनाव में केंद्रीय काउंसलर पद पर जीत से दरभंगा का नाम रोशन; राष्ट्रीय स्तर की टेबल टेनिस खिलाड़ी ने छात्र हितों, संवाद और गलत के खिलाफ आवाज को बनाया अपनी नई जिम्मेदारी का आधार

नई दिल्ली। बिहार के दरभंगा जिले के पघारी गांव से निकलकर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित शहीद भगत सिंह कॉलेज तक पहुंची हर्षना कुमारी चौधरी ने छात्र संघ चुनाव 2026 में केंद्रीय काउंसलर पद पर जीत दर्ज कर अपनी शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है। उनकी इस सफलता ने न केवल कॉलेज परिसर में उन्हें नई जिम्मेदारी दी है, बल्कि दरभंगा और मिथिलांचल के लिए भी गौरव का अवसर पैदा किया है। हर्षना की पहचान केवल एक छात्र प्रतिनिधि के तौर पर नहीं है। पढ़ाई के साथ खेल के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। वह टेबल टेनिस की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रही हैं। खेल मैदान से लेकर कॉलेज परिसर तक उनकी सक्रियता और विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद ने उन्हें छात्र समुदाय के बीच एक परिचित चेहरा बनाया।

शहीद भगत सिंह कॉलेज में चुनावी प्रक्रिया के दौरान हर्षना ने विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखा। कॉलेज में छात्रों को पेश आने वाली समस्याओं, उनकी आवश्यकताओं तथा छात्र कल्याण से जुड़े विषयों को लेकर उन्होंने अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी। चुनाव प्रचार के दौरान उनका जोर व्यक्तिगत राजनीति से अधिक विद्यार्थियों से जुड़े सवालों और उनके समाधान की दिशा में काम करने पर रहा। छात्रों के बीच सहज संवाद, मिलनसार व्यवहार और लोगों की बात सुनने की उनकी शैली ने भी उन्हें समर्थन जुटाने में मदद की। चुनाव परिणाम सामने आने के बाद केंद्रीय काउंसलर पद पर उनकी जीत ने यह स्पष्ट किया कि कॉलेज के विद्यार्थियों ने उन्हें अपनी आवाज और प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार किया है।

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जीत के बाद हर्षना ने अपने समर्थक विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम उनके लिए केवल एक पद हासिल करने का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों द्वारा जताए गए विश्वास की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने घोषणापत्र में रखे गए प्रमुख मुद्दों और वादों को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। हर्षना ने अपनी सफलता का श्रेय अकेले स्वयं को देने के बजाय उन सभी विद्यार्थियों को दिया, जिन्होंने चुनावी प्रक्रिया के दौरान उनके साथ खड़े होकर उन पर भरोसा जताया। उनके अनुसार, यह जीत किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम छात्रों के विश्वास की अभिव्यक्ति है, जिन्होंने बेहतर छात्र प्रतिनिधित्व की उम्मीद के साथ उनका समर्थन किया।

इस अवसर पर अपने माता-पिता को याद करते हुए हर्षना ने कहा कि सामाजिक सरोकारों को समझने और गलत बात के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार से मिली है। जनहित को प्राथमिकता देने और अन्याय अथवा गलत के सामने चुप न रहने का संस्कार उनके माता-पिता ने उनके भीतर विकसित किया। यही पारिवारिक सीख उनके सार्वजनिक जीवन और छात्र राजनीति में भी दिखाई देती है।हर्षना की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि उनकी सक्रियता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही है। शिक्षा के साथ राष्ट्रीय स्तर पर टेबल टेनिस में भागीदारी और अब दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में प्रतिनिधित्व इन अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को सामने रखती है।

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केंद्रीय काउंसलर के रूप में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उनके सामने चुनावी वादों को व्यवहारिक रूप देने की चुनौती होगी। विद्यार्थियों की समस्याओं को संबंधित मंच तक पहुंचाना, कॉलेज में छात्र हित से जुड़े विषयों को मजबूती से उठाना और प्रशासन तथा विद्यार्थियों के बीच प्रभावी संवाद कायम करना उनकी आगामी भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। हर्षना ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता शहीद भगत सिंह कॉलेज को विद्यार्थियों के लिए अधिक सुविधाजनक, बेहतर और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में काम करना है। उनकी इस नई भूमिका को लेकर अब कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच उनसे अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। दरभंगा के पघारी गांव से दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रतिष्ठित कॉलेज तक की यह यात्रा उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा का विषय है, जो शिक्षा, खेल और सामाजिक नेतृत्व....तीनों क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं। हर्षना कुमारी चौधरी की यह उपलब्धि बताती है कि छोटे शहर और गांव से निकलने वाली प्रतिभा, अवसर मिलने पर राष्ट्रीय राजधानी के बड़े शैक्षणिक मंच पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकती है।